गुजरात में सबसे भ्रष्ट निकला गृह विभाग, फिर सबसे ज्यादा मामले पंचायत और राजस्व विभाग के
गांधीनगर। गुड गवर्नेंस के उदाहरण के तौर पर देश में गुजरात का नाम लिया जाता है, लेकिन यहां भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खूब मामले सामने आ रहे हैं। जो आंकड़े जारी हुए हैं, उनसे पता चला है कि राज्य में पुलिस डिपार्टमेंट में सबसे ज्यादा रिश्वत ली जाती है। रिश्वत लेते पकड़े जाने के सर्वाधिक अपराध गृह विभाग में पाए गये हैं। पिछले कुछ वर्षों में रिश्वत लेने का सबसे अधिक केस राजस्व विभाग में दर्ज किया जा रहा था, लेकिन अब राजस्व विभाग तीसरे स्थान पर आ गया है। अब ज्यादातर मामले पुलिस विभाग में सामने आ रहे हैं।

पंचायत विभाग में रिश्वतखोरी के 250 से अधिक अपराध दर्ज हुए
गुजरात एंटी करप्शन ब्यूरो के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है। जिनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में, 400 से ज्यादा अधिकारी एवं कर्मचारियों को गृह विभाग में रिश्वत लेते पकड़ा गया। उन लोगों के खिलाफ केस चल रहे हैं। दूसरी ओर, पंचायत में 250 से अधिक अपराध दर्ज हुए हैं और तीसरे स्थान पर आने वाले राजस्व विभाग में 230 रिश्वत के अपराध दर्ज हैं। गुजरात सरकार के 26 विभागों में से 7 में रिश्वतखोरी का कोई अपराध नहीं है। यह विभागों में रिश्वत के किस्से एक या दो और नहीं के बराबर हैं।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने 5 साल में 80 मामलों को पकड़ा
गुजरात में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों में भी भ्रष्टाचार हो रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने पांच साल में 80 मामलों को पकड़ा है औऱ उनको सजा दिलायी है। कहा जाता है कि राज्य में रिश्वत लेने का हर दिन एक मामला सामने आता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जीआईडीसी सबसे भ्रष्ट पाये गये
राज्य के शीर्ष 12 विभागों में जिनमें सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार किया जाता है, उसमें गृह, पंचायत और राजस्व के अलावा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, शिक्षा, ऊर्जा और पेट्रो रसायन, उद्योग और खनन, कृषि और सहयोग विभाग, शहरी विकास, नर्मदा और जल संसाधन, बंदरगाह और वाहन व्यवहार एवं वन और पर्यावरण विभाग हैं। इन 12 विभागो में भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं। सरकारी बोर्ड-निगमों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जीआईडीसी सबसे भ्रष्ट पाये गये हैं।

रिश्वत लेने के सर्वाधिक मामले यहां
रिश्वत लेने वालों की सबसे अधिक संख्या अहमदाबाद, खेड़ा, आनंद, मेहसाणा, गांधीनगर के अलावा राज्य के 32 जिलों में दर्ज है। हैरानी की बात है कि राज्य के आदिवासी क्षेत्रों जैसे तापी, नर्मदा, डांग, नवसारी और अरावली में सबसे कम मामले सामने आए हैं। राज्य के चार महत्वपूर्ण शहरों में रिश्वत के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

इन जगहों पर भी खूब हो रहा भ्रष्टाचार
राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो की तरह, राज्य सतर्कता आयोग, लोकायुक्त, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक और अन्य जांच संगठनों को भी रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामलों का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, भ्रष्ट विभागों का क्रम विभिन्न संगठनों में चला जाता है।












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