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दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति देखने 1 दिन में पहुंचे 34000 लोग, टूटा जन्माष्टमी और दिवाली का रिकॉर्ड

गांधीनगर। गुजरात के केवडिया में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रविवार को 34 हजार पर्यटक लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस प्रतिमा को देखने पहुंचे। यह संख्या अब तक एक दिन में पहुंचे टूरिस्ट्स की सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी-शनिवार को 31700 पर्यटकों के पहुंचने से दीपावली पर बना एक दिन में सर्वाधिक 28400 पर्यटकों का रिकॉर्ड टूटा था। हालांकि, जल्द ही यह रिकॉर्ड भी टूट गया। 24 घंटे के अंदर ही 34000 पर्यटकों के पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया।

2 दिन में 66 हजार लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे

2 दिन में 66 हजार लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे

'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' अथॉरिटी से जुड़े व्यवस्थापकों ने बताया कि बीते शनिवार-रविवार (यानी 2 दिन) को 66 हजार लोगों के पहुंचने से प्रबंधन को 1 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि अमूमन नेशनल हॉलीडे पर यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। किंतु, सामान्य दिनों में 6 टिकट खिड़कियां कार्यरत रहती हैं। अब इन खिड़कियों की संख्या बढ़ानी पड़ी है।

भयंकर गर्मी में भी टूरिस्ट्स के बीच था खुमार

भयंकर गर्मी में भी टूरिस्ट्स के बीच था खुमार

इसी साल मई में प्राप्त डेटा के अनुसार, प्रतिमा के अनावरण वाले महीने से लेकर 7वें महीने तक सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट को टूरिस्ट्स से 35 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। मई-जून में गुजरात में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा दर्ज किया गया, तब उस भयंकर गर्मी में भी सरदार पटेल की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के लिए टूरिस्ट्स में काफी दिलचस्पी दिखी। हर रोज करीब 10 हजार लोग इसके दीदार करने पहुंचे।

182 मीटर ऊंची है यह प्रतिमा

182 मीटर ऊंची है यह प्रतिमा

लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) 182 मीटर ऊंची है। दुनिया में यह सबसे ज्यादा ऊंची प्रतिमा है। पहले स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का नाम चर्चित था, अब लोगों की जुबां पर 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' ज्यादा होती है। अक्टूबर-2018 में इसका अनावरण हुआ था। 1 नवंबर-2018 से यह आम लोगों के लिए खुली हुई है।

143वें जन्मदिन के मौके पर हुआ अनावरण

143वें जन्मदिन के मौके पर हुआ अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में 31 अक्टूबर को सरदार सरोवर डैम के निकट 'साधू बेट' स्थान पर इस मूर्ति का अनावरण किया। देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री "लौह पुरूष" सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की ये प्रतिमा उन्हीं के 143वें जन्मदिन के मौके पर पब्लिक को सौंपी गई।

2013 में काम शुरू हुआ, 33 महीने में बन गई

2013 में काम शुरू हुआ, 33 महीने में बन गई

31 अक्‍टूबर, 2013 के दिन इस प्रतिमा की रूपरेखा तैयार हुई. भारत की ही एक बहुराष्‍ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (Larsen and Tubro) ने सबसे कम बोली लगाकर इसके निर्माण कार्य व रखरखाव की जिम्‍मेदारी ली। 33 माह (लगभग ढाई साल) के कम समय में ​इस प्रतिमा का बुनियादी ढ़ांंचा बना, जो भी एक वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा।

7 किलोमीटर दूर से नजर आ जाती है यह

7 किलोमीटर दूर से नजर आ जाती है यह

यह प्रतिमा 597 फीट ऊंची है, जो 7 किलोमीटर दूर से नजर आती है। यह इतनी विशाल है कि 30 फीट का तो चेहरा ही बनाया गया। इसमें 3डी टेक्नीक यूज की गई।

70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट

70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट

प्रतिमा के होंठ, आंखें और जैकेट के बटन 6 फीट के इंसान के कद जितने बड़े हैं। 70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा है।

4 धातुओं के मिश्रण से बनी, 85% तांबा

4 धातुओं के मिश्रण से बनी, 85% तांबा

यह प्रतिमा 4 धातुओं के मिश्रण से बनी है, लेकिन सबसे ज्यादा 85% तांबा इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में इसमें जंग लगने का भी डर नहीं है। एक लिफ्ट भी लगाई है, जिससे प्रतिमा के हृदय तक जा सकेंगे।

17 KM लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी

17 KM लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी

यहां से लोगों को सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा दिख सकता है। अपनी तरह की पहली और सबसे बड़ी प्रतिमा के लिए मटेरियल जुटाने पर भी बहुत मेहनत हुई।

6 लाख लोगों को लोहा-तांबा जुटाने में लगाया गया

6 लाख लोगों को लोहा-तांबा जुटाने में लगाया गया

जब ये तय हुआ कि सरदार पटेल की सबसे बड़ी प्रतिमा बनेगी तो सवाल ये था कि इतना लोहा कहां से जुटाएं? इसके लिए गुजरात सरकार ने "सरदार वल्‍लभ भाई पटेल राष्‍ट्रीय एकता ट्रस्‍ट" बनाया, जिसके तहत देशभर में 36 दफ्तर खुले और करीब 6 लाख लोगों को लोहा-तांबा इकट्ठा करने में लगा दिया गया।

5 हजार मैट्रिक टन लोहा किसानों से मिला

5 हजार मैट्रिक टन लोहा किसानों से मिला

किसानों से ही लगभग 5 हजार मैट्रिक टन लोहा दान में मिला। 57,00,000 किलो तो स्टील ही था। मटेरियल मिलते रहने पर इस मूर्ति को बनाने में 3400 मजदूरों, 250 इंजीनियरों ने कम से कम 42 महीने काम किया। लागत 2990 करोड़ रुपए आई।

पटेल से जुड़े 2000 दुर्लभ फोटो देख सकेंगे

पटेल से जुड़े 2000 दुर्लभ फोटो देख सकेंगे

यह प्रतिमा तैयार होने के साथ ही सरदार म्यूजियम भी बन रहा है। इस म्यूजियम में पटेल से जुड़े 40,000 दस्तावेज और उनके करीब 2000 दुर्लभ फोटो देख सकेंगे। अब चहुंओर इसी मूर्ति के चर्चे हो रहे हैं।

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