Yasin Malik: दर्जनों देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा है यासीन मलिक, पढ़ें अपराधों की लिस्ट
यासीन मलिक टेरर फंडिंग करने सहित देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करके अलगाववादी और प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को मौत की सजा देने की मांग की है। एनआईए की इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट 29 मई को सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 25 मई 2022 को एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकवादी यासीन मलिक को टेरर फंडिंग, यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, एनआईए ने यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग की थी।
यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए एनआईए की विशेष अदालत ने कहा था कि यासीन का मंसूबा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना तथा जम्मू और कश्मीर को बलपूर्वक देश से विभाजित करना था। अदालत ने यह भी कहा था कि यासीन ने इसके लिए विदेशी शक्तियों और आतंकवादियों की सहायता ली थी। अदालत ने एनआईए की यासीन को मौत की सजा दिए जाने की मांग पर कहा था कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' नहीं है कि उसे मौत की सजा दी जाए। गौरतलब है कि यासीन मलिक ने अपने उपर लगाए गए सभी आरोपों को कबूल लिया था।
यासीन के गुनाहों की लंबी है फेहरिस्त
यासीन मलिक ने किशोरावस्था से ही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था। 1980 के शुरुआती दिनों में उसने 'तला पार्टी' (Tala Party) नाम का एक अलगाववादी संगठन बनाया था। यासीन का नाम तब सुर्खियों में आया, जब उसके संगठन ने 1983 में श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जाने वाले क्रिकेट मैच में बाधा डाली और पिच को खोद दिया।
मकबूल बट्ट की फांसी का किया विरोध
साल 1984 में जब अदालत द्वारा आतंकवादी मकबूल बट्ट को फांसी की सजा सुनाई गई, तो यासीन मलिक ने इसका जमकर विरोध किया। यासीन मलिक ने अपने संगठन तला पार्टी के जरिये पूरे कश्मीर में मकबूल बट्ट को फांसी देने के फैसले के खिलाफ पोस्टर लगवाए और प्रदर्शन किए। इस पर यासीन मलिक को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।
साल 1986 में यासीन मलिक ने जेल से निकलकर तला पार्टी का नाम 'इस्लामिक स्टूडेंट लीग' कर दिया और वह इस संगठन का महासचिव बन गया। इसके बाद, उसने इस संगठन से कश्मीरी युवकों को जोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। कुछ ही समय में इस संगठन का विस्तार हो गया और इसके साथ अशफाक वानी, जावेद मीर और शेख अब्दुल हमीद जैसे अलगाववादी नेता जुड़ गए।
सैयद सलाहुद्दीन के चुनावी प्रचार का जिम्मा संभाला
साल 1986 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की गुलाम मोहम्मद शाह की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। जब राज्य में चुनाव की घोषणा हुई, तो नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा। दूसरी तरफ, जमात-ए-इस्लामी और कश्मीर की अन्य कट्टरंपथी मुस्लिम पार्टियों ने मिलकर मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट बनाया और कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन के खिलाफ चुनाव लड़ा।
इस चुनाव में श्रीनगर की अमीरा कदल विधानसभा सीट से मोहम्मद युसूफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट का उम्मीदवार बना। यासीन मलिक ने सैयद सलाहुद्दीन के समर्थन में प्रचार किया। हालांकि, सलाहुद्दीन हार गया। यह वही सैयद सलाहुद्दीन है, जिसने हिजबुल मुजाहिदीन नामक आतंकी संगठन बनाया और वह लंबे समय से पाकिस्तान में रह रहा है।
पाकिस्तान से प्रशिक्षित है यासीन मलिक
साल 1988 में यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट में शामिल हो गया। इसके बाद, वह आतंकी प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान चला गया और वहां पर आतंकवादियों से प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
जस्टिस गंजू की हत्या का जिम्मेदार
4 नवंबर 1989 को श्रीनगर में जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई थी। यह वही नीलकंठ गंजू थे, जिन्होंने आतंकवादी मकबूल बट्ट को फांसी की सजा दी थी। बाद में, यासीन मलिक ने जस्टिस गंजू की हत्या की जिम्मेवारी भी ली थी।
रूबिया सईद के अपहरण में यासीन का हाथ
भारत के तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण 8 दिसंबर 1989 को कुछ आतंकियों ने कर लिया। रूबिया सईद उस समय एक अस्पताल में कार्यरत थी। जब वह अस्पताल से लौट रही थी, तभी रास्ते में आतंकियों ने उन्हें अगवा कर लिया। इस अपहरण का अगुवा जेकेएलएफ का आतंकी अशफाक वानी था और इसकी योजना यासीन मलिक ने बनाई थी।
आतंकियों ने रूबिया को मुक्त करने के बदले में कुछ आतंकियों को रिहा करने की सरकार के सामने शर्त रखी। सरकार ने उनकी शर्त को मानते हुए पांच आतंकियों को रिहा कर दिया। इसके बाद, रूबिया सईद को भी आतंकियों ने रिहा कर दिया। रूबिया सईद के अपहरण के मामले में टाडा कोर्ट ने यासीन मलिक, अशफाक वानी, मोहम्मद सलीम, याकूब पंडित, अमानतुल्लाह खान और जावेद मीर को आरोपी बनाया था।
साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन और उनकी हत्या में भी यासीन मलिक का नाम जुड़ा। साल 1991 में नेशनल कांफ्रेंस के तत्कालीन सांसद सैफुद्दीन सोज (अब कांग्रेस में) की बेटी नाहिदा इम्तियाज का अपहरण जम्मू कश्मीर स्टूडेंट लिबरेशन फ्रंट, जिसका सलाहकार यासीन मलिक था, के आतंकियों ने कर लिया था। नाहिदा की रिहाई के बदले में सरकार को खूंखार आतंकवादी मुश्ताक अहमद को रिहा करना पड़ा था।
एयरफोर्स के जवानों की हत्या
जनवरी 1990 में यासीन मलिक ने अपने साथियों के साथ मिलकर श्रीनगर में एयरफोर्स के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें चार जवान शहीद हो गए। इस घटना के दो महीने बाद सुरक्षाबलों ने अशफाक वानी को मार गिराया। इसके बाद, यासीन मलिक को भी घायलावस्था में गिरफ्तार कर लिया गया। चार साल तक जेल में रहने के बाद यासीन मलिक जमानत पर रिहा हो गया।
वाजपेयी सरकार के दौरान फिर से गया जेल
यासीन मलिक को साल 1999 में केंद्र की एनडीए सरकार के दौरान जम्मू कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, उसे साल 2002 में पोटा के तहत तब गिरफ्तार किया गया, जब वह कश्मीर स्थित हुर्रियत कांफ्रेंस के मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर रहा था।
यूपीए सरकार के दौरान फिर से राजनीति में हुआ सक्रिय
साल 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न संगठनों और पार्टियों को अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया था, जिसमें यासीन मलिक भी शामिल था। इसके बाद, साल 2007 में यासीन मलिक ने 'सफर-ए-आजादी' के नाम से एक अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत यासीन ने कई देशों में जाकर भारत विरोधी भाषण दिए। इसी दौरान, साल 2013 में वह लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से भी मिला था।
टेरर फंडिंग का बनाया गया आरोपी
साल 2016 में पाकिस्तान के उकसावे पर कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान जबरदस्त हिंसा भी हुई, जिसमें यासीन मलिक का भी हाथ पाया गया। साल 2017 में टेरर फंडिंग के केस में यासीन मलिक को अभियुक्त बनाया गया। एनआईए ने जब जांच शुरू की, तो यासीन के खिलाफ उसे कई पुख्ता सबूत मिले। इसके अतिरिक्त, कश्मीर समेत घाटी के कई इलाकों में उसकी अवैध संपत्तियों का भी पता चला। अप्रैल 2019 में एनआईए ने टेरर फंडिंग के आरोप में यासीन मलिक को गिरफ्तार कर लिया। इसी मामले में 25 मई 2022 को एनआईए की अदालत ने यासीन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।












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