विश्व योग दिवस- पढ़ें योग पर निबंध

Essay on Yoga (पं. दयानंद शास्त्री): पूरी दुनिया में विश्व योग दिवस को मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। आखिर योग में ऐसा क्या है, जो पूरी दुनिया इसके पीछे भाग रही है। लेकिन कुछ लोग हैं जो चाहते हुए भी इसे अपनाना नहीं चाहते हैं और इसके नाम पर समाज को तोड़ने में जुटे हुए हैं। खैर जो भी हो गण‍ित में तो योग का मतलब जोड़ना ही होता है। तो चलिये हम बात करते हैं जोड़ने की।

योग की परिभाषा

योग इंसान के शरीर, व्यवहार, मन और भावनाओं को नियंत्रित करने वाली एक प्रक्रिया है। यह हृदय, मस्त‍िष्क और शरीर के बाकी अंगों को नियंत्रित करने वाला विज्ञान है, जो इंसान की जीवनशैली में बदलाव लाता है।

योग का नाम सुनते ही लोगों को व्यायाम याद आ जाता है। उन्हें लगता है कि योग महज एक व्यायाम है जो सुबह उठकर करना चाहिये। कई लोग लोग किसी पहाड़ की गुफा में बैठे किसी साधु के बारे में सोचते हैं। कई लोगों के जहन में योग एरोबिक्स आता है। उन्हें लगता है कि योग शारीरिक व्यायाम होता है और इसे करने से इंसान फिट रहा है। जबकि सच पूछिए तो योग इससे कहीं आगे है।

प्राचीन काल में देश में तमाम योगी अनेक प्रकार के जानवरों को देख आसन, मुद्राएं सीखने के प्रयास करते थे। ऐसा करने से उनकी आयु में वृद्धि हुई। प्राचीन काल में योग के माध्यम से रोग दूर करने का काम किया जाता था।

योग का इतिहास

वैसे तो योग का अलग से इतिहास बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसे हमेशा से ध्यान से जोड़कर देखा जाता रहा है। इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में गुफाओं के अंदर तमाम लोग ध्यान करते थे। इसके प्रमाण मुंबई की एलीफैंटा केव से लेकर अफगानिस्तान या जम्मू-कश्मीर में हिमालय पर्वत की गुफाओं में आज भी मिलते हैं। तमिलनाडु से लेकर असम तक और बर्मा से लेकर तिब्बत तक के जंगलों की कंदराओं में आज भी वो गुफाएं मौजूद हैं, जहां पर योग व ध्यान किया जाता था। जिस तरह भगवान राम के निशान इस भारतीय उपमहाद्वीप में जगह-जगह बिखरे पड़े है उसी तरह योगियों और तपस्वियों के निशान जंगलों, पहाड़ों और गुफाओं में आज भी देखे जा सकते हैं।

योग की उत्पत्त‍ि

योग संस्कृत धातु 'युज' से उत्‍पन्न हुआ है जिसका अर्थ है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन। योग 5000 वर्ष प्राचीन भारतीय ज्ञान का समुदाय है। यद्यपि कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं जहाँ लोग शरीर को तोड़ते-मरोड़ते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। वास्तव में देखा जाए तो ये क्रियाएँ मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमताओं की तमाम परतों को खोलने वाले ग़ूढ विज्ञान के बहुत ही सतही पहलू से संबंधित हैं।

योग विज्ञान में जीवन शैली का पूर्ण सार आत्मसात किया गया है , जिसमें ज्ञान योग या तत्व ज्ञान,भक्ति योग या परमानन्द भक्ति मार्ग,कर्म योग या आनंदित कार्य मार्ग और राज योग या मानसिक नियंत्रण मार्ग समाहित हैं । राजयोग आगे और 8 भागों में विभाजित है। राजयोग प्रणाली के मुख्य केंद्र में उक्त विभिन्न पद्धतियों को संतुलित करना एवं उन्हे समीकृत करना ही योग के आसनों का अभ्यास है।

विश्व योग दिवस

भारत में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला तो उन्होंने पूरे विश्व से आग्रह किया कि वे स्वस्थ्य रहने के लिये योग को अपनायें। पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में घोष‍ित किया। सच पूछिए तो भारत के लिये यह गर्व की बात है, क्योंकि योग की जननी भारत माता ही हैं।

योग के नाम पर धार्मिक कलह

देश के तमाम राज नेता योग को धर्म से जोड़ने के प्रयास कर रहे हैं। खास तौर से हिंदूवादी संगठन बार-बार योग को खुद की संपत्त‍ि बताने में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि मुस्ल‍िम खुद को योग से कनेक्ट नहीं कर पाते हैं।

NEXT में पढ़ें- योग एवं ध्यान के लाभ

लेखक परिचय- पं. दयानंद शास्त्री भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद के राष्ट्रीय सचिव हैं और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य भी हैं।

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