Bangladesh Cricket: खिलाड़ी से लेकर मैनेजर तक बंगले झांकने में लगे

Bangladesh Cricket: इंगलैंड के साथ साथ बांग्लादेश के लिए भी वर्ल्ड कप का सफर समाप्त हो गया है। टाइगर्स के लिए बाकी के मैच औपचारिकता मात्र रह गए हैं। 2023 के आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप में भाग लेने वाली 10 टीमों में से अंतिम से दूसरे पायदान पर है। अफ़ग़ानिस्तान और नीदरलैंड इनसे आगे हैं। बांग्लादेश क्रिकेट टीम के लिए यह एक बुरे सपने जैसा है क्योंकि वर्ल्ड कप में आने से पहले उन्होंने इतिहास रचने का जज़्बा दिखाया था। बंगाल टाइगर्स ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले एक नारा दिया था "इतिहास बनाने और इतिहास बनने में एक दिन लगता है।" पर अफ़सोस कि बांग्लादेश की टीम कोई इतिहास नहीं बना सकी।

शुरुआत तो अच्छी ही हुई थी। ओपनिंग मैच में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ शानदार जीत हासिल की थी। खिलाडियों में आशावाद बढ़ गया था। उनके प्रशंसकों को भी यह विश्वास होने लगा था कि टीम इस बार वर्ल्ड कप में कुछ कमाल जरूर करेगी। लेकिन ऐसा हो न सका। शुरुआती जीत के बाद लगातार हार का सामना करना पड़ा है। समर्थकों के साथ साथ खिलाड़ियों में भी हताशा नजर आने लगी। उसका सबूत था टीम के द्वारा अपने विरोधियों के सामने घुटने टेक देना, मानों वे कोई क्लब के क्रिकेट मैच खेल रहे हों। कोच, मैनेजर और स्टाफ सभी सर झुकाते नज़र आये। मैदान पर टीम के सम्मान की जबर्दस्त हानि हुई। हालाँकि आई सी सी टूर्नामेंट में बांग्लादेश की टीम एक बार के अलावा कभी भी सेमीफाइनल के आगे नहीं बढ़ी है, पर दस टीमों में नवें नंबर पर रहने का यह रिकॉर्ड भी हाल के वर्षों में नहीं रहा। बांग्लादेश की टीम नीदरलैंड्स से भी मैच हार चुकी है।

world cup 2023 Bangladesh out from race of cricket world cup match

सबसे निराशाजनक प्रदर्शन

बांग्लादेश को वर्ष 2000 में टेस्ट खेलने वाले देशों की श्रेणी में शामिल किया गया, उसके बाद से वहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी लगातार बढ़ती ही गयी। कभी बांग्लादेश का सबसे पसंदीदा खेल फुटबॉल हुआ करता था पर अब क्रिकेट ने लोकप्रियता में फुटबॉल को काफी पीछे छोड़ दिया है। बांग्लादेश के लिए क्रिकेट राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक बन गया है। क्रिकेट वर्ल्ड में इन्हें रॉयल बंगाल टाइगर का तमगा ऐसे ही नहीं मिला है। टीम लाखों लोगों की भावनाओं के साथ जुड़ी हुई है। खेल की शुरुआत में राष्ट्रगान के प्रति लोगों में सम्मान और राष्ट्रीय झंडे के तले खड़े खिलाड़ी देश के गौरव के प्रतिमान बन गए हैं।

लेकिन पिछले कुछ समय से टीम आंतरिक राजनीति और सत्ता संघर्ष की शिकार हो गयी है। टीम के खिलाड़ियों के बीच न तो सामंजस्य है और न ही एकजुटता। कुछ एक खिलाड़ी छोड़ दें तो पूरी टीम बिखरी बिखरी लग रही है। कुछ खास खिलाड़ी लंबे समय से शीर्ष पर बने हुए हैं, जबकि उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा है। शायद इसका कारण राजनीतिक हस्तक्षेप रहा है। टीम में ना तो कोई महत्वपूर्ण सुधार हो रहा है और ना ही कोई बड़ी प्रतिभा सामने आ रही है। यह क्रिकेट बोर्ड में लचीलेपन की कमी को दर्शाता है।

माफ़ी मांग रहे हैं खिलाड़ी

खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन को लेकर कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर खड़े स्टार क्रिकेटर जनता से माफ़ी मांग रहे हैं। बाएं हाथ के स्टाइलिस्ट बल्लेबाज तमीम इकबाल ने देश की जनता से अपील की है कि टीम इस समय कठिन परिस्थितियों से गुजर रही है इस समय जितना संभव हो सके टीम का समर्थन करें। बांग्लादेश के इस पूर्व कप्तान ने देशवासियों से भारत में आईसीसी वनडे विश्व कप में चल रहे खराब अभियान के दौरान टाइगर्स के प्रति एकजुटता दिखाने को कहा। हालांकि तमीम को 15 सदस्यीय टीम से बाहर कर दिया गया क्योंकि वह 100 प्रतिशत फिट नहीं थे। कहा जाता है कि शाकिब अल हसन ने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज हार के लिए तमीम को जिम्मेदार ठहरा कर टीम से बाहर करवा दिया था।

प्रबंधन भी पल्ला झाड़ रहा

खिलाड़ी ही नहीं अब टीम के प्रबंधक भी अपनी जान छुड़ाने में लगे हैं। आईसीसी एकदिवसीय विश्व कप में बांग्लादेश टीम के निदेशक खालिद महमूद का कहना है कि टीम में उनके पास निर्णय लेने की कोई शक्ति नहीं है और कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता तो वह इस टीम में शामिल ही नहीं होते। महमूद ने यहां तक कहा कि मुझे निर्देश दिए गए हैं कि मैं कितना कर सकता हूं और क्या नहीं। क्रिकेट के मामले मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। मौजूदा विश्व कप में, महमूद केवल टीम के अनुशासनात्मक मामलों को देख रहे हैं, जो उनके लिए काफी निराशा की बात है।

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