क्या चिराग पासवान दे पाएंगे तेजस्वी को टक्कर?

Chirag Paswan Tejasavi Yadav: अभी हाल में ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और गया लोकसभा से एनडीए के उम्मीदवार जीतन राम मांझी कहा है कि चिराग पासवान बिहार के भविष्य हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि जब केंद्र में एनडीए की सरकार फिर बन जाएगी तो बिहार की जिम्मेदारी चिराग पासवान को सौंप दी जाएगी। यानी चिराग को एनडीए तेजस्वी यादव के मुकाबले खड़े होते देखना चाहता है।

दिवंगत राम विलास पासवान ने भी एक बार कहा था कि उनका बेटा एक दिन बिहार का मुख्यमंत्री बनेगा। खुद चिराग पासवान ने हालांकि कभी नहीं कहा कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, लेकिन उन्होंने अपनी आलोचना की दिशा हमेशा बिहार के मुख्यमंत्री की ओर ही रखी। वह हाल तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के खिलाफ मुखर रहे हैं। हालांकि उनकी पार्टी का गठबंधन एनडीए के साथ है, फिर भी राज्य का नेतृत्व उनको देने के बारे में कभी बीजेपी के किसी बड़े नेता की ओर से बयान नहीं आया है।

Will Chirag Paswan be able to give competition to Tejashwi yadav

जब तक चिराग अपनी पार्टी का कैनवास बड़ा नहीं करते, समाज के एक बड़े वर्ग के लिए स्वीकार्य नहीं होते तब तक यह कहना सही भी नहीं होगा कि उनके हाथ में बिहार का भविष्य आ सकता है। चिराग को यदि कोई अवसर मिलता है तो पहले उन्हें खुद को साबित करना होगा। सिर्फ राजनीतिक स्टंट से उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकती।

राम विलास पासवान एक व्यावहारिक राजनेता थे। अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी और सरकार के विभिन्न पदों पर कैसे समायोजित किया जा सकता है, वह खूब जानते थे। लेकिन चिराग की तो चाचा पशुपति पारस से ही नहीं बनी और 2020 में ही दोनों अलग हो गए। वह अकेले ही अपने गुट से संसद सदस्य रह गए। इनके 5 सांसदों ने दलबदल कर लिया।

लोक सभा 2024 चुनाव से पहले जेडीयू और बीजेपी में जब दुबारा गठबंधन हुआ तो भी चिराग ने नीतीश के प्रति अपना रुख नहीं बदला। नीतीश कुमार ने भी दलित और महादलित के दो वोट बैंक बनाकर एक बड़े दलित ब्लॉक को छोटा कर दिया।

बिहार में बीजेपी के साथ भी चिराग दबाव की राजनीति करते रहे। वह अपनी भूमिका कर्नाटक के जेडीएस की तरह किंग मेकर की बनाना चाहते हैं। उनका दवाब कुछ हद तक कामयाब भी रहा। बीजेपी से कहकर उन्होंने अपने चाचा और भाई समेत पांचों सांसदों का टिकट कटवा दिया और खुद एनडीए पार्टनर के तौर पर लोक सभा की पांचों सीटें ले ली।

लेकिन यहीं से उनकी चुनौती भी शुरू हो गई। यदि 2024 के इस लोक सभा चुनाव में दी गई सीटों पर चिराग खुद और अपने बाकी के चारों उम्मीदवार को नहीं जीता पाते तो उनकी राजनीति की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाएगी। अगले साल बिहार में विधान सभा का चुनाव है। एक युवा नेता के रूप में चिराग का भविष्य वहाँ भी दाव पर होगा।

नीतीश कुमार के सामने बिहार के सीएम उम्मीदवार बनने के लिए केवल महत्वाकांक्षी होना ही काफी नहीं होगा। वह बीजेपी के साथ और नीतीश के खिलाफ रह कर भी राजनीति नहीं कर सकते। हालांकि बिहार के एससी एसटी फैक्टर को ध्यान में रखते हुए बीजेपी चिराग पासवान का हाथ थामे रखना चाहती है, क्योंकि बीजेपी के लिए एलजेपी और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया जैसी राजनीतिक पार्टियां बेहद अहम हैं।

चिराग पासवान के नेतृत्व वाली एलजेपी के पास पासवानों के 3 प्रतिशत वोटों का एक ठोस वोट बैंक है। जिनका कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभाव है। रामविलास पासवान के असली वारिस के चलते चिराग की अपील पर वोट किसी भी सहयोगी को हस्तांतरित किया जा सकता है। पिछले कुछ चुनावों से एलजेपी एनडीए के साथ थी और मिल रही सीटों और मंत्री पदों से संतुष्ट थी।
नीतीश कुमार व अन्य दिग्गजों की उम्र बढ़ने और लालू के राजनीति से लुप्त हो जाने के बाद बिहार में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं।

ऐसे में महत्वाकांक्षी चिराग पासवान एक मजबूत दावेदार तो हैं ही। उन्हे यह भी ध्यान होगा कि उनके दिवंगत पिता राम विलास पासवान को 2005 में सीएम की कुर्सी का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उन्होंने उसे अपने हाथ से फिसल जाने दिया। इसलिए अबकि चिराग अपने 3 प्रतिशत वोटों का हिस्सा बीजेपी और जेडीयू से जरूर लेंगे।

चिराग पासवान को मनपसंद सीटें मिली हैं। क्योंकि ये वो सीटें हैं जहां सामाजिक समीकरण भी एलजेपी के पक्ष में है। चिराग इस चुनाव में मोदी के हनुमान होने के तमगे के साथ उतर रहे हैं। एनडीए के वोट शेयर में पिछले कुछ चुनावों में भारी बढ़ोतरी हुईं है। इस बार भी एनडीए के मतदाताओं को उत्साहित करने में बीजेपी सफल हो रही है।

आज के हालत में तेजस्वी यादव निश्चित रूप से चिराग के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। एक तो उनकी पार्टी बड़ी है और सहयोगियों के बीच उनकी स्वीकार्यता भी है। उन्होंने आरजेडी के भीतर अपना नेतृत्व साबित कर दिया है। लालू प्रसाद के वोट बैंक को मजबूत करना ही तेजस्वी यादव के लिए चुनौती है। वह लोकसभा के इस चुनाव में सफल होते हैं तो बेहतर राजनीतिक भविष्य की दौड़ में आगे निकल सकते है।

चिराग पासवान को मौजूदा वोट बैंक को मजबूत करने के लिए बहुत कुछ करना होगा और उनके सामने अपनी पार्टी का दबदबा बढ़ाने का बड़ा काम होगा। प्रारंभ में, उन्हें भाजपा के लिए दूसरी भूमिका निभानी होगी और राज्य में शीर्ष नेतृत्व की दौड़ में आगे बढ़ना होगा। राजद से चुनौती के लिए भाजपा को चिराग की जरूरत है, क्योंकि इस समय राजद ही बीजेपी की समस्या है।

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