इतिहास के पन्नों से-संकट में सरदार पटेल के साथी वीपी मेनन
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) देश का विभाजन का वक्त जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था वैसे वैसे तमाम रियासतें भारत में विलय की बात को मान रही थीं। इस काम को अंजाम दे हे थे सरदार पटेल। पर जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर पर मामला फंस रहा था।
तब सरदार पटेल सलाह लिया करते थे वी.पी.मेनन की। वी.पी. मेनन लार्ड माउंटबेटन के भी सलाहकार थे। उन्होंने ही मेनन की ड्यूटी लगाई थी कि वे पटेल को सहयोग करें। वे इन तीनों रियासतों के राजाओं को समझाने से लेकर धमकाने तक का काम करते थे।
पेपरवर्क करते थे
वे ही सारा पेपरवर्क करते थे। बेहद लायक इंसान थे मेनन। वे मूल रूप से केरल के रहने वाले थे। पर, दिल्ली में आकर बस गए गए। मेनन के बारे में कहा जाता है कि वे उस दौर के राजाओं की मानसिकता और मनोविज्ञान से भलीभांति परिचित थे। उनका पूरा नाम वापल पनगुन्नी मेनन था।
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विलक्षण प्रतिभा
अपनी विलक्षण के बल पर वे सरदार पटेल के खास बन गए। मेनन को अंग्रेजी, हिन्दी,तमिल, संस्कृत, मलयालम की गहन समझ थी। भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने एक बार मेनन के बारे में लिखा था कि उनकी वजह से पटेल का मिशन सरल हो गया था। उन्हें देश के चप्पे-चप्पे की जानकारी थी।
उन्हें हर प्रदेश के लोगों के रहने सहन से लेकर मूल्यों की समझ थी। पर अफसोस देखिए कि देश के आजाद होने के बाद मेनन को किसी ने याद नहीं रखा। वे वापस केरल चले गए। अब तो किसी को ये भी नहीं पता कि उनके परिवार के लोग कहा रहते हैं। उनके नाम पर दिल्ली में कोई सड़क या चौराहा भी नहीं है।













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