Bangladesh Election: भारत के लिए बहुत मायने रखता है बांग्लादेश में चुनाव
Bangladesh Election: हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी आम चुनाव होने जा रहा है। भारत के लिए यह चुनाव बहुत मायने रखता है इसलिए हमारे लोगों की दिलचस्पी लाजिमी है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए जनवरी, 2024 में संसदीय आम चुनाव करवाने का ऐलान कर चुकी हैं। अमेरिका और यूरोप ने अपने पर्यवेक्षक भेजे हैं। करीब 75 साल की शेख हसीना साल बांग्लादेश में 2009 से लगातार सत्ता में हैं। वह 2024 में भी रिकॉर्ड पांचवी बार पीएम पद की दावेदार हैं। आम चुनाव में वह जीतीं तो किसी देश की लगातार पांच बार चुनी हुई प्रधानमंत्री रहने वाली दुनिया में अकेली महिला नेता हो जाएंगी। शेख हसीना के समर्थकों का दावा है कि उनके शासन में बांग्लादेश तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है, लेकिन व्यापक हिंसा और राजनीतिक विवाद देश की छवि खराब कर रहा है।
विपक्ष का बहिष्कार और भारी जीत
2014 में तो शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश आवामी लीग को सत्ता आसानी से मिल गई थी, क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसकी नेता पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की ओर से आम चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया गया था। 2018 के आम चुनाव में शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश आवामी लीग को करीब सभी सीटों पर जीत हासिल हुई थी। तब बीएनपी ने चुनाव में धाँधली और भारत के समर्थन को इस जीत का कारण बताया था।

बांग्लादेश के आगामी आम चुनाव पर चीन-अमेरिका की भी नजर
पड़ोसी देशों के आम चुनावों में ड्रैगन की बढ़ती दखल को लेकर भारत का सावधान होना स्वाभाविक ही है। अपने सभी पड़ोसी देशों की राजनीति में कम्यूनिस्ट शासन वाले चीन की भूमिका जगजाहिर है। दूसरी ओर, अमेरिका ने तो बांग्लादेश में आम चुनाव को लेकर अपनी वीजा नीति में बदलाव की घोषणा तक कर दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने अपनी नई वीज़ा नीति की घोषणा करते हुए कहा था कि बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति को वह वीज़ा नहीं देगा। इसके अलावा, कई पश्चिमी देशों के राजनयिक काफी समय पहले से ही ढाका समेत बांग्लादेश के कई प्रमुख शहरों में सक्रिय हैं।
इस बीच, अगस्त, 2023 में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बांग्लादेश आम चुनाव से जुड़े सवालों पर साफ कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि बांग्लादेश में चुनाव योजनाबद्ध और शांतिपूर्ण तरीके से होंगे। भारत भी अन्य पड़ोसी देशों की तरह ही बांग्लादेश के आम चुनाव पर नजदीकी नजर रखता है।
बांग्लादेश में कितना अलग होगा आगामी आम चुनाव
बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव यानी 12वें संसदीय चुनाव में 11 करोड़ से ज्यादा वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। कई दशक से बांग्लादेश की चुनावी राजनीति शेख हसीना और खालिदा जिया के ही आसपास है। इस बार भी खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और शेख हसीना की बांग्लादेश आवामी लीग के बीच ही मुकाबला देखने को मिलेगा। हालांकि, बीते चुनाव में 40 से ज्यादा पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
बांग्लादेश में थोड़े-बहुत अंतर के साथ भारतीय संसदीय व्यवस्था की तरह ही हर पांच साल में आम चुनाव होता है और चुनाव में जीत हासिल करने वाली पार्टी का नेता देश का प्रधानमंत्री होता है। 1947 से 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान वाला समय छोड़ दें तो 1971 में बने बांग्ला भाषी बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जाते हैं। हालांकि, पड़ोसी पाकिस्तान और म्यांमार की तरह बांग्लादेश को भी सैन्य शासन का सामना करना पड़ा है। बांग्लादेश में साल 1975 में शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या और तख्तापलट के बाद 15 साल तक सैन्य शासन रहा था। बांग्लादेश में लंबे समय बाद साल 1990 में एक बार फिर लोकतंत्र का जागरण हुआ। तब से तमाम विवादों के बावजूद आम चुनाव के जरिए ही सरकार चुनी जा रही है।
बांग्लादेश की जॉतियो संसद और महिला आरक्षण
बांग्लादेश की संसद को जॉतियो संसद या हाउस ऑफ द नेशन कहा जाता है। 200 एकड़ में फैली जॉतियो संसद की नई इमारत 15 फरवरी 1982 को बनकर तैयार हुई थी। बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सीटें हैं। इनमें से 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। संसद में 300 सदस्य वोटिंग के जरिए चुने जाते हैं और महिलाओं के लिए रिजर्व 50 सीटें वोट शेयर के आधार पर बांटी जाती है। संसद में महिलाओं के लिए सीट रिजर्व करने के मामले में दुनिया में बांग्लादेश ही एकमात्र मुस्लिम-बहुल देश है।
भारत की तरह बांग्लादेश में भी एक व्यक्ति एक वोट का अधिकार है और सबसे ज्यादा वोट पाने वालों को विजयी होने की घोषणा की जाती है। बांग्लादेश में सरकार बनाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या दलों के गठबंधन को 151 सीटें जीतने की जरूरत होती है। जीती हुई पार्टी या गठबंधन ही प्रधानमंत्री तय करता है और फिर वह अपने मंत्रिमंडल का गठन करता है। वे सभी बांग्ला या अंग्रेजी भाषा में शपथ ग्रहण करते हैं।
बांग्लादेश में 2018 के आम चुनाव के दौरान कई इलाकों में ईवीएम के जरिए उम्मीदवारों का चयन किया गया था। बांग्लादेश की मौजूदा जॉतियो संसद में प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग के पास 302 सीटें हैं। इसके बाद हुसैन इरशाद की बांग्लादेश जॉतिया पार्टी का नंबर है। उनके पास 26 सीटें हैं। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी के पास महज 7 सीटें हैं।
शेख हसीना पर जबर्दस्त दबाव
यह सही है कि शेख हसीना भारत की सबसे करीबी सहयोगियों में से एक हैं । यदि चीन के प्रश्रय और अमेरिका के दबाव के कारण बांग्लादेश का चुनाव प्रभावित होता है तो वहां की चरमपंथी ताकतों का हाथ मजबूत हो सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। भारत ने इस मामले में अमेरिका को अपनी चिंताओं से अवगत भी करा दिया है। भारत का यह स्पष्ट मानना है कि चुनाव के मुद्दे पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो बांग्लादेश मजबूरी में चीन के करीब जा सकता है।
मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) इस समय जबर्दस्त उत्साह में है और चुनाव जीतने के लिए पाकिस्तान की करीबी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन में है। यह वही इस्लामी संगठन है जो बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के समय पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग कर रहा था। शेख हसीना के कार्यकाल में कई जमात नेताओं को कथित "युद्ध अपराधों" के लिए फांसी की सजा दी गई थी। बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने इस संगठन का पंजीकरण रद्द कर दिया था और उसे चुनाव लड़ने से रोक लगा दिया था। इसलिए बीएनपी द्वारा जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के समर्थन से बांग्लादेश पर शासन करने की संभावना ने ढाका और नई दिल्ली के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
-
Indus Waters Treaty: बिना भारत के क्यों हो रहा सिंधु जल संधि पर फैसला, हेग कोर्ट का एकतरफा रुख क्यों? -
बिहार के 6 मेडिकल कॉलेजों में बनेगा हिमोफीलिया-थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर, मरीजों को मिलेगी मुफ्त सुविधा -
बिहार में पहली बार रोबोटिक सर्जरी से पैनक्रियाज कैंसर का सफल ऑपरेशन, IGIMS ने रचा इतिहास -
ईरान-सऊदी युद्ध से बचने के लिए पाकिस्तान का खतरनाक खेल? भारत के खिलाफ 'फॉल्स फ्लैग' की चली चाल -
एमपी और यूपी विकास पर सहयोग करते हैं-CM डॉ. मोहन यादव -
Dubai Gold Rate Today: दुबई या भारत? आज सोना कहां से खरीदना है फायदे का सौदा? ₹7000 की सीधी बचत -
Iran Vs America War: मोदी का मास्टरस्ट्रोक! पश्चिम एशिया में तनाव के बीच 1,171 भारतीयों का 'महा-रेस्क्यू' -
IAS Tina Dabi Transfer: दो लव मैरिज-एक से तलाक, विवादों में घिरीं UPSC टॉपर टीना डाबी का कहां-क्यों ट्रांसफर? -
LPG Price Today: युद्ध के बीच जनता पर फूटा महंगाई बम, सिलेंडर के दाम बढ़े, आपके शहर में कहां पहुंचा रेट? -
Ashok Kumar Mittal Caste: मिठाई वाले का बेटा कैसे बना AAP का नया डिप्टी लीडर? क्या है जाति? पत्नी-बच्चे कौन? -
IPL 2026 के बीच क्रिकेट जगत में पसरा मातम, सचिन के पहले शतक के 'असली हीरो' का निधन! शराब ने डुबोया करियर -
Iran America War: ईरान ने Amazon पर किया हमला, बहरीन का उड़ाया डेटा सेंटर, क्यों है बेहद खतरनाक?












Click it and Unblock the Notifications