Students and Drugs: क्यों बढ़ रही है छात्रों में नशे की लत, क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
Students and Drugs: पश्चिम बंगाल में जादवपुर विश्वविद्यालय के एक 18 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कोलकाता पुलिस को छात्र स्वप्नदीप कुंडू की एक डायरी मिली है। इस डायरी में स्वप्नदीप कुंडू ने खुलासा किया है कि उसके कॉलेज और हॉस्टल में छात्र चरस, गांजा के आदी हैं और बहुत ज्यादा स्मोक करते हैं। साथ ही रैंगिंग का भी मुद्दा उठाया है।
इस खबर के बाहर आने के बाद चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं कि क्या देश के बड़े विश्वविद्यालयों में छात्र नशे के आदी होते जा रहे हैं? दरअसल साल 2017 में भी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-कानपुर में विद्यार्थियों के ड्रग्स लेने की बात सामने आई थी। तब आईआईटी कानपुर की ओर से आंतरिक जांच में खुलासा हुआ था कि करीब 25 छात्र ऐसे थे जो ड्रग्स ले रहे थे। साथ ही कई छात्र तंबाकू, स्मैक, चरस, गांजा आदि का भी सेवन करते थे।

जनवरी 2023 में 'द ट्रिब्यून' ने चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) के हवाले से लिखा कि चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में नशीली दवाओं का दुरुपयोग बढ़ रहा है। सीसीपीसीआर के अध्ययन में यह पाया गया है कि 50 प्रतिशत छात्र 'भूखी', गांजा, तंबाकू और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।
माता-पिता की व्यस्तता
क्राइस्ट यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु) में साइकोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजली मौर्या बताती हैं कि आजकल छात्रों में नशे के प्रति झुकाव बढ़ने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि बच्चे जब किशोरावस्था में होते हैं तो उनके माता-पिता उन्हें बातचीत का कम स्पेस देते हैं। इस वजह से वे छात्र अपने दोस्तों से ज्यादा से ज्यादा बातें, फिलिंग्स शेयर करते हैं।
तब उनके दोस्त जो कर रहे होते हैं वे उसे सही मानते हैं। चाहे वह नशा ही क्यों न हो। वे सही गलत का पैमाना न मापकर उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं। जिनके कारण उनमें नशा बढ़ने लगता है। यहां पर माता-पिता की भूमिका होनी चाहिए कि वो अपने बच्चों (14-21) के साथ ज्यादा से ज्यादा बातचीत करें और उन्हें सही गलत बताएं, वो भी एक दोस्त की तरह।
छात्रों में पश्चिम की नकल का ट्रेंड
डॉ. अंजली मौर्या आगे बताती हैं कि आजकल के छात्रों में एक ट्रेंड चल पड़ा है देखादेखी करने का। तकनीकी और इंटरनेट के प्रसार के कारण गांव या शहर के प्रत्येक विद्यार्थी के लिए पश्चिमी देशों की फिल्में और अन्य वीडियो देखना आसान हो गया है। उनके किरदारों को नशा करते देखकर भारत के युवा भी उनकी देखादेखी नशा करना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा जब युवा कॉलेजों में आते हैं तब वह नये-नये ग्रुप के लोगों से मिलते हैं। इस दौरान वह अपने आप को थोड़ा मॉडर्न और कूल दिखाने के लिए शुरू-शुरू में शौक या ट्रेंड में रहने के लिए नशा करते हैं। इसके बाद वे धीरे-धीरे इसके आदी होते चले जाते हैं। नशे की लत के कारण ऐसे हालात भी बनते हैं जिससे वे आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं।
छात्रों में नशे की लत का कारण?
छात्रों में नशे की लत पर बालाजी सेवा संस्था के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर व विश्व स्वास्थ्य संगठन से पुरस्कृत अवधेश कुमार बताते हैं कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में नशे का प्रचलन बहुत अधिक बढ़ गया है। इसका कारण है चरस तथा गांजे जैसे नशीले पदार्थों की आसानी से उपलब्धता। एक आंकड़े के अनुसार उत्तराखंड राज्य की बात करें तो लगभग 30% छात्र नशे का सेवन करते हैं। इसमें मध्यम वर्ग के परिवार के छात्रों की संख्या ज्यादा है।
हालांकि, देश के विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा छात्रों में नशा का प्रचलन न बढ़े इसके लिए कई तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। जबकि केंद्र या किसी भी राज्य सरकार के पास कहीं कोई सटीक आंकड़ा नहीं है, यह बताने के लिए कि देश में कितने प्रतिशत छात्र ड्रग्स या चरस जैसे नशों का सेवन करते हैं।
'स्कूलों में 8.5% बच्चे करते हैं तम्बाकू का सेवन'
अवधेश कुमार बताते हैं कि वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण (GYTS) के मुताबिक 2019 में किशोरों (13-15 वर्ष) के बीच तंबाकू के सेवन की दर 8.5% थी। यह सर्वे 987 स्कूलों में मुख्य रूप से 13-15 साल के बच्चों के बीच किया गया था। इस सर्वे के तहत बताया गया कि लड़कों में तम्बाकू सेवन की व्यापकता 9.6% और लड़कियों में 7.4% थी। धूम्रपान तम्बाकू का प्रचलन 7.3% था। धुआं रहित तंबाकू उत्पाद के मामले में, प्रचलन 4.1% था। छात्रों के बीच ई-सिगरेट का उपयोग 2.8% था।
वह आगे कहते हैं एक तरह से कहें तो ये तम्बाकू का सेवन बाद में अन्य प्रकार के नशे की ओर झुकाव का कारण बनता है। वहीं इस सर्वे के मुताबिक 15 साल के ऊपर के लगभग 28.6 प्रतिशत लोग किसी न किसी तरह के तम्बाकू का सेवन करते हैं।
देश में कितने छात्र नशा करते हैं?
हालांकि, देश में कितने छात्र नशे के आदी हैं इसका कोई सरकारी या प्राइवेट डाटा तो नहीं है लेकिन दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में 'बच्चों में नशे की लत' को लेकर केंद्र सरकार ने एक जवाब में कहा था कि देश में बच्चों में बढ़ती नशे की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
केंद्र सरकार का पक्ष रख रही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ को कहा कि साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद भारत में मादक पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया गया था।
इस सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में 10 से 17 साल की उम्र के 1.58 करोड़ बच्चे नशीले पदार्थों के आदी हैं। ये बच्चे और किशोर अल्कोहल, अफीम, कोकीन, भांग सहित कई तरह के नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। शराब भारतीयों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला साइको एक्टिव पदार्थ है। इसके बाद भांग और नशीली दवाओं का सेवन किया जाता है।












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