Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Coal: कोयले को क्यों कहते हैं काला सोना, जानें इसके उत्पादन व खपत के आंकड़े

धर्मेंद्र और माला सिन्हा की फिल्म ‘आंखें’ याद है आपको? इस फिल्म का गाना है, तुझको रक्खे राम तुझको अल्लाह रक्खे... गाना माला सिन्हा और महमूद पर फिल्माया गया था।

Coal: कोयला मंत्रालय ने सातवें दौर की नीलामी में चार राज्यों झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा व छत्तीसगढ़ की 6 कोयला खदानों का आवंटन किया है। जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की एनएलसी इंडिया एवं एनटीपीसी सहित तीन अन्य निजी कंपनियों हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड और नीलकंठ कोल माइनिंग को इनका आवंटन मिला।

यह जानकारी कोयला मंत्रालय ने 4 अगस्त 2023 को जारी अपने एक बयान में दी है। यह नीलामी प्रक्रिया 1 अगस्त से प्रारंभ होकर 3 अगस्त को समाप्त हुई। इन आवंटित 6 कोयले की खदानों में से दो खदानें पूरी तरह उत्खनित (खुदी हुई) तथा चार खदानें आंशिक रूप से ही उत्खनित हैं। इन 6 खदानों से लगभग 210 करोड़ टन कोयला उत्पादित होने का अनुमान है। वहीं सरकार को लगभग 787 करोड़ रूपये वार्षिक राजस्व की प्राप्ति होने का भी अनुमान है।

Why is coal called black gold, know its production and consumption figures

कोयले को कहते हैं काला सोना

पृथ्वी के अंदर अनेकों खनिज पदार्थो का भंडार है। जिसमें सोना, चांदी, हीरे, लोहा, तांबा, पीतल इत्यादि धातुएं मिलती है। इन धातुओं से हम अपनी सुविधानुसार अनेक वस्तुओं का निर्माण करते है। पृथ्वी के गर्भ से निकलने वाले पीले सोने के अलावा एक काला ठोस पदार्थ भी निकलता है, जिसे आम भाषा में कोयला कहा जाता है। कोयले को औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण होने के कारण काला सोना भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोयले का निर्माण पृथ्वी के अंदर करोड़ों सालों से दबे पेड़ों में अनेक रासायनिक क्रियाओं के उपरांत होता है।

इस प्रकार हम कह सकते है कि कोयला एक जीवाश्म ईंधन है, जो पृथ्वी के अंदर चट्टानों के रूप में पाया जाता है। इसका उपयोग लोहा, इस्पात, भाप इंजन जैसे उद्योगों में ईंधन के रूप में तथा बिजली पैदा करने में किया जाता है। कोयले से उत्पन्न बिजली को थर्मल पावर कहा जाता है।

भारत में कोयला खनन का इतिहास

भारत में कोयला खनन पहली बार 1774 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा रानीगंज (पश्चिम बंगाल) में किया गया। भारत में उस समय कोयले की मांग बहुत कम थी, जिसके कारण लगभग एक सदी तक इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। 1853 में भाप के इंजन के विकास के चलते कोयले की मांग में बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई, जिसके चलते कोयले का उत्पादन भी बढ़ने लगा। 1900 के दौरान भारत में कोयला उत्पादन 6.12 टन प्रतिवर्ष, 1920 में 18 टन प्रतिवर्ष और 1942 तक 29 टन प्रतिवर्ष पहुंच गया।

1973 में कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण हुआ, जिसके उपरांत कोयले का उत्पादन अधिकतर सरकारी कंपनियां ही करती हैं। जिसमें कोल इंडिया 90 प्रतिशत से अधिक कोयले का उत्पादन करती है।

दुनिया में कोयले के सबसे बड़े भंडार अमरीका, रूस, आस्ट्रेलिया, चीन और भारत में हैं। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के अनुसार भारत के पास 319 अरब टन का कोयला भंडार उपलब्ध है। भारत में कोयले के सबसे बड़े भंडार झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना व महाराष्ट्र में हैं। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, मेघालय, असम, नगालैंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में भी कोयला भंडार हैं।

भारत में कोयला उत्पादन व खपत

कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत ने 89.3 करोड़ टन कोयला उत्पादन किया, जो वित्तीय वर्ष 2021-22 के कोयला उत्पादन 77.82 करोड़ टन से 14.77 प्रतिशत ज्यादा है। वर्ष 2012-13 में कोयला उत्पादन 55.64 करोड़ टन था यानि पिछले लगभग 10 वर्षों के दौरान भारत के कोयला उत्पादन में 60.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 में 101.2 करोड़ टन होने का अुनमान है।

वहीं वर्ष 2022-23 के दौरान भारत में कोयले की खपत 93.67 करोड़ टन रही, जो वर्ष 2021-22 के दौरान 82.48 करोड़ टन थी। वहीं भारत में कोयले की खपत वर्ष 2012-13 में 60.28 करोड़ टन थी। यानि पिछले 10 वर्षों के दौरान भारत में कोयले की खपत में 55.39 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।

उत्पादन व खपत का आकलन किया जाये तो भारत ने उत्पादन में बढ़ोत्तरी तो की है, लेकिन अभी भी भारत अपनी खपत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।

दुनियाभर में कोयले का उत्पादन व खपत

एक अनुमान के अनुसार विश्व में 1.12 लाख करोड़ टन कोयला भण्डार है। वहीं वर्ष 2022 में दुनिया भर में 850 करोड़ टन से अधिक कोयला उत्पादन हुआ। जो 2019 में 796 करोड़ टन था, जबकि 2016 में यह आकंडा 729.3 करोड़ टन ही था। वर्ष 2016 से वर्ष 2019 यानि इन 3 वर्षों के दौरान विश्व स्तर पर कोयले के उत्पादन में 9.14 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं वर्ष 2020 में कोयला उत्पादन 4.85 प्रतिशत घटकर 757.5 करोड़ टन रह गया।

दुनिया भर में लगभग 856.18 करोड टन कोयले की प्रति वर्ष खपत होती है। चीन 50.5 प्रतिशत यानी 431.9 करोड़ टन के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा कोयले की खपत करने वाला देश है। वहीं दूसरा नंबर भारत का आता है, जो दुनिया भर में कोयले की कुल खपत का 11.3 प्रतिशत अर्थात 96.62 करोड़ टन कोयला प्रतिवर्ष खपत करता है। अमरीका 8.5 प्रतिशत (73.1 करोड़ टन प्रतिवर्ष) के साथ तीसरे स्थान पर, जर्मनी 3.0 प्रतिशत (25.74 करोड़ टन) व रूस 2.7 प्रतिशत (23.03 करोड़ टन) के साथ क्रमशः चौथे व पांचवें स्थान पर हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+