Shaheed Diwas 2020: भारत में 23 मार्च को हर साल क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस, यहां जानिए

नई दिल्ली। देश में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस (Shaheed Diwas) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हम उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया था। इस दिन को विशेष रूप से महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए भी याद किया जाता है। क्योंकि आज के ही दिन (23 मार्च, 1931) साल 1931 में इन महान क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी।

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    इन तीनों पर साल 1928 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सैंडर्स की हत्या का आरोप लगाया गया था। दरअसल उन्होंने उसे (सैंडर्स) ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट समझकर मारा था। वो स्कॉट ही था, जिसने लाठीचार्ज का आदेश दिया था। इसी लाठीचार्ज के कारण लाला लाजपत राय का निधन हो गया था। देश के लिए मर मिटने वालों का जब भी नाम लिया जाता है, तो उसमें सबसे ऊपर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद किया जाता है। जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपना जीवन देश के लिए न्योछावर कर दिया था।

    जब अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ रहा था, तब सबसे पहले लौहार में सैंडर्स की गोली मारकर हत्या की गई। उसके बाद 'पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल' के विरोध में भगत सिंह ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। हालांकि, उनका मकसद सिर्फ अंग्रेजों तक अपनी आवाज पहुंचाना था ना कि किसी को मारना। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना को लेकर भगत सिंह ने कहा था, यदि बहरों को सुनना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने (असेंबली) बम गिराया था, तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आजाद करना चाहिए।

    ये तीनों शहीद क्रांतिकारी देश के युवाओं के लिए ना केवल उस समय बल्कि आज भी प्रेरणा स्त्रोत हैं। ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने वाले तीन महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उनके बलिदान को देश हमेशा याद रखे। इन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना रास्ता खुद बनाया था।

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