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Sriharikota: इसरो हमेशा श्रीहरिकोटा से ही क्यों रॉकेट लॉन्च करता है?

हाल ही में इसरो ने हेवीलिफ्ट LVM3-M4 रॉकेट पर अपना तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान 3 लॉन्च किया है। मिशन चंद्रयान भारत का ड्रीम प्रोजेक्ट है।

इस पर भारत सरकार और वैज्ञानिकों ने अपने कई वर्ष दिए हैं। 7 सितंबर 2019 को लैंडर के क्रैश होने के बाद भी देश के वैज्ञानिकों का हौसला नहीं टूटा।

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इसके चार साल बाद 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान 3 को दोपहर 2.35 बजे लॉन्च किया गया। यह लॉन्चिंग सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा से की गयी। यही वह जगह है जहां से इसरो अपने रॉकेट्स के जरिए सेटेलाइट और चंद्रयान भेजता है। आखिर इसरो ने इस जगह को ही क्यों इस कार्य के लिए चुना। आइए जानते हैं विस्तार से।

क्यों महत्वपूर्ण है श्रीहरिकोटा
श्रीहरिकोटा एक स्पिंडल शेप आइलैंड है, जो आंध्र प्रदेश में स्थित है। इक्वेटर से इसकी करीबी यहां से लॉन्चिंग होने की एक बड़ी वजह है। वहीं आपको बता दें कि श्रीहरिकोटा कोई बहुत आकर्षक शहर नहीं है। यह बंगाल की खाड़ी के तट पर एक छोटा सा द्वीप है। इस द्वीप में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र है, जो भारत के दो उपग्रह प्रक्षेपण केंद्रों में से एक है।

वहीं दूसरा केरल के तिरुवनंतपुरम में थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन है। 1969 में इस जगह को सैटलाइट लॉन्चिंग स्टेशन के रूप में चुना गया। इसके बाद यहां से लॉन्चिंग का सिलसिला वर्ष 1971 से शुरु हुआ था। जब 'आरएच-125' रॉकेट ने श्रीहरिकोटा रेंज से उड़ान भरी थी।

अब इस स्थान को क्यों चुना गया। इसके पीछे की वजह यह रही कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई ने अपने करीबी सहयोगी एकनाथ वसंत को देश के पूर्वी तट पर एक प्रक्षेपण स्थल की तलाश करने को कहा था। इसके बाद एकनाथ ने आंध्र प्रदेश के तत्कालीन उद्योग निदेशक से संपर्क किया था।

उस दौरान उन्होंने श्रीहरिकोटा सहित अन्य संभावित स्थलों के लिए जानकारी हासिल करने और मानचित्र तैयार करने में उनकी मदद की थी। यह जगह पूर्व दिशा की ओर की जाने वाली लॉन्चिंग के लिए बेहतरीन मानी जाती है। क्योंकि ज्यादातर सैटलाइट पूर्व की तरफ ही लॉन्च किए जाते हैं। पहला ऑर्बिट सैटलाइट 1979 को लॉन्च किया गया था।

तीव्र कंपन को झेलने की ताकत
फ्रॉम फिशिंग हैमलेट टू रेड प्लैनेट: इंडियाज स्पेस जर्नी पुस्तक में लिखा गया है कि पूर्व की ओर रॉकेट लॉन्च करके कोई पृथ्वी के घूर्णन का लाभ उठा सकता है। वहीं किसी प्रक्षेपण को सफलतापूर्वक करने के लिए जमीन इतनी ठोस होनी चाहिए कि वह प्रक्षेपण के दौरान उत्पन्न होने वाले तीव्र कंपन को झेल सके।

एक रिपोर्ट में इसरो के जनसंपर्क निदेशक देवीप्रसाद कार्णिक ने बताया था कि मजबूत मिट्टी की संरचना और इसके नीचे कठोर चट्टान के साथ श्रीहरिकोटा इस आवश्यकता को पूरा करता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर के बाद श्रीहरिकोटा को ही दुनिया का सबसे अच्छा स्पेसपोर्ट माना जाता है। यहां की आबादी बेहद कम है और यहां रहने वाले ज्यादातर लोग या तो इसरो से ही जुड़े हैं या फिर स्थानीय मछुआरे हैं। यह स्थान नेशनल हाइवे पांच पर है। इसके सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन 20 किलोमीटर दूर है।

चेन्नई का इंटरनेशनल पोर्ट भी यहां से मात्र 70 किलोमीटर दूर ही है। ऐसे में सेटेलाइट व रॉकेट से जुड़े सामानों को दुनियाभर से लाने के लिए यह स्थान जल, जमीन और आकाश तीनों में उपयुक्त है।

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