Nobel Peace Prize: नरगिस मोहम्मदी को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार, जानें ईरान की प्रतिक्रिया
Nobel Peace Prize: 'किसी को भी मत कहने दो कि तुम कमजोर हो क्योंकि तुम एक औरत हो...' ये वाक्य आज की तारीख में ईरान की उस महिला पत्रकार और एक्टिविस्ट नरगिस मोहम्मदी पर सटीक बैठता है, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नरगिस को 13 बार गिरफ्तार किया गया, पांच बार दोषी ठहराया गया। 31 साल की जेल और 154 कोड़ों की सजा सुनाई गई है और वह आज भी जेल में बंद है।
इन सबके बावजूद नरगिस करीब 3 दशकों से महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और उनके हक़ की लड़ाई लड़ रही हैं। नोबेल कमेटी ने माना कि उन्होंने महिलाओं की आजादी और उनके हक के लिए आवाज उठाई हैं। कमेटी ने शांति पुरस्कार की घोषणा ईरान की महिलाओं के नारे 'जन- जिंदगी-आजादी' के साथ की।

पुरस्कार पर ईरान की प्रतिक्रिया
किसी देश की नागरिक को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाए और वह नाराज़ हो जाए, यह शायद ही कभी हुआ हो पर ईरानी सरकार ने नरगिस मोहम्मदी को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार देने के नोबेल शांति समिति के फैसले की निंदा करते हुए इसे एक 'राजनीतिक कदम' बताया है। ईरानी सरकार ने समिति पर पुरस्कार का राजनीतिकरण करने और 'कुछ यूरोपीय सरकारों की हस्तक्षेपवादी और ईरानी विरोधी नीतियों' के साथ जोड़ने का आरोप लगाया है। सरकारी प्रतिनिधि ने कहा कि मोहम्मदी को 'बार-बार कानून के उल्लंघन और आपराधिक कृत्यों' के लिए दोषी ठहराया गया था।
आखिर कौन हैं नरगिस मोहम्मदी?
नरगिस मोहम्मदी एक ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उपाध्यक्ष हैं। नरगिस का जन्म 21 अप्रैल, 1972 को कुर्दिस्तान ईरान के जंजन शहर में हुआ था। उन्होंने क़ज़्विन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से भौतिकी में डिग्री प्राप्त की और एक पेशेवर इंजीनियर बन गईं। अपने विश्वविद्यालय जीवन के दौरान ही उन्होंने छात्र समाचार पत्र में महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने वाले लेख लिखे और राजनीतिक छात्र समूह ताशक्कोल दानेशजुयी रोशनगरान (छात्र समूह) की दो बैठकों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता में एक नया करियर शुरू किया और उन समाचार पत्रों के लिए काम किया, जो उस समय सुधारवादी आंदोलन का हिस्सा थे।
'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स अधिकार' संगठन के मुताबिक नरगिस वर्तमान में तेहरान की एविन जेल में लगभग 12 साल से कैद की सजा काट रही हैं। दरअसल नोबेल प्राइज की वेबसाइट के मुताबिक नरगिस मोहम्मदी को जेल में बंद कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की सहायता करने की कोशिश करने के आरोप में पहली बार 2011 में जेल हुई थी। उन्हें 2 साल बाद जमानत मिल गई थी लेकिन 2015 में उन्हें दोबारा जेल हुई।
'8 साल से बच्चों को नहीं देखा'
2 जून, 2023 को 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में छपी एक लेख के मुताबिक नरगिस कहती हैं कि उन्होंने 8 साल से अपने बच्चों को नहीं देखा है। आखिरी बार अपनी जुड़वा बेटियों अली और कियाना की आवाज एक साल पहले सुनी थी। नरगिस की दोनों बेटियां उनके पति तागी रहमानी के साथ फ्रांस में रहती हैं। उनके पति तागी भी एक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट हैं। जिन्हें ईरान की सरकार ने 14 साल जेल की सजा सुनाई थी।
किताब के लिए मिल चुका है पुरस्कार
नरगिस ने ईरान में सामाजिक सुधारों को लेकर कई लेख लिखे हैं। इस बीच उन्होंने एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम व्हाइट टॉर्चर है। जेल में रहते हुए भी नरगिस ने बाकी महिला कैदियों की तकलीफ को दर्ज करना शुरू किया। कैदियों से बातचीत के पूरे ब्योरे को उन्होंने व्हाइट टॉर्चर किताब में उतार दिया।
2022 में उनकी किताब 'व्हाइट टॉर्चर: इंटरव्यूज़ विद ईरानी वूमेन प्रिजनर्स' ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और मानवाधिकार फोरम में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के लिए एक पुरस्कार भी जीता है। साथ ही साल 2009 में अलेक्जेंडर लैंगर पुरस्कार और साल 2023 की शुरुआत में यूनेस्को/गिलर्मो कैनो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम पुरस्कार और ओलोफ पाल्मे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
नोबेल जीतने वाली ईरान की दूसरी महिला बनीं
नरगिस मोहम्मदी नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली दुनिया की 19वीं महिला हैं। जबकि 2003 में शिरीन एबादी के बाद यह पुरस्कार जीतने वाली दूसरी ईरानी महिला हैं। शिरिन एबादी वहीं हैं जिन्होंने गैर सरकारी संगठन 'डिफेंडर ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर' की स्थापना की थीं। बता दें कि 122 साल के इतिहास में यह पांचवीं बार है, जब शांति पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति को दिया गया है जो जेल में है या फिर घर में नजरबंद है।
ईरानी हिजाब आंदोलन में रही अहम भूमिका
ईरान के कानून के मुताबिक महिलाओं को उनके नियमित परिधानों के साथ हिजाब या हेडस्कार्फ पहनना अनिवार्य है। इसका अनुपालन नहीं करने वालों को गिरफ्तार और टॉर्चर किया जाता है। इसी दरम्यान सितंबर, 2022 में एक 22 वर्षीय महसा अमिनी को परिधानों संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसके बाद उनकी पुलिस हिरासत में ही मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात पूरे देश में हंगामा मच गया। हिजाब के खिलाफ आंदोलन हुए। लाखों प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे। नरगिस मोहम्मदी ने उन प्रदर्शनकारियों के लिए जेल से समर्थन दिया। अपने साथी कैदियों के बीच एकजुटता कार्यों का आयोजन करवाया। इसके लिए नरगिस मोहम्मदी पर ईरानी पुलिस ने ईरान सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया था। इस पूरे प्रदर्शन के दौरान 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए और हजारों लोग घायल हो गए हैं।
नरगिस को क्यों मिला शांति पुरस्कार
नॉर्वे नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने 6 अक्टूबर (शुक्रवार) को ओस्लो में नोबेल शांति पुरस्कार 2023 की घोषणा की थी। नरगिस मोहम्मदी को ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई, मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की उनकी लड़ाई के लिए प्रदान किया गया है। अकादमी ने एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्हें बहादुरीपूर्ण संघर्ष के लिए जबरदस्त व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी है। शासन ने उन्हें 13 बार गिरफ्तार किया है, 5 बार दोषी ठहराया और कुल 31 साल जेल व 154 कोड़ों की सजा सुनाई है।
अब तक 111 लोगों को मिला नोबेल पुरस्कार
नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी। अब तक यह सम्मान 111 लोग और 30 संस्थाओं को दिया जा चुका है। साल 2022 में नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के मानवाधिकार अधिवक्ता एलेस बायलियात्स्की, रूसी मानवाधिकार संगठन मेमोरियल और यूक्रेनी मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज़ को प्रदान किया गया था।












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