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Aizawl Bombing: एयरफोर्स ने मिजो अलगाववादियों पर बमबारी क्यों की थी, कौन थे दो पायलट जो बने कांग्रेस नेता

संसद के मानसून सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए अपने लंबे भाषण में मिजोरम की राजधानी आइजोल में 1966 में भारतीय वायुसेना की बमबारी का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।

मणिपुर हिंसा पर कांग्रेस के आरोपों के जवाब में उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 5 मार्च 1966 को मिजोरम के आइजोल में नागरिकों पर वायुसेना के माध्यम से हमला कराया था। इस हमले की याद में हर साल 5 मार्च को मिजोरम शोक मनाता है। उन्होंने कांग्रेस पर इस सच को देश से छुपाने का भी आरोप लगाया।

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वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि साल 1966 में मिजो नेशनल फ्रंट के बागी आइजोल पर कब्जा कर चुके थे। उन्हें भगाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बमबारी कराने का फैसला लेना जरूरी हो गया था। बमबारी की वजह से बागी भाग खड़े हुए और वहां भारत का आधिपत्य जमा रहा। आजादी के बाद का शायद यह पहला और आखिरी सैन्य मामला था जब वायुसेना ने अपने ही देश के नागरिकों पर बमबारी की थी।

मिजो अलगाववादियों पर हमले की तुलना ऑपरेशन ब्लू स्टार से भी

द इंडियन एक्सप्रेस के तत्कालीन संपादक शेखर गुप्ता ने 7 सितंबर, 2011 को संपादकीय में इस घटना की जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि कैसे पूर्वोत्तर को लेकर पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को 1960 में नागाओं के खिलाफ वायु सेना की कार्यवाही की जानकारी मिली थी। वहीं, जब मिज़ो विद्रोहियों ने राजकोष पर अपना झंडा फहराया था और असम राइफल्स बटालियन मुख्यालय (जिसमें न केवल सैनिक बल्कि उनके परिवार भी रहते थे) को लूटने वाले थे तब इंदिरा गांधी ने आइजोल पर बमबारी करने के लिए हवाई जहाज भेजे थे। उन बमबारी अभियानों के पायलटों में दो नाम शामिल थे जिन्हें हम सभी राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी के नाम से जानते हैं।

अपने लेख में उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई की तुलना बाद के दिनों में हुए ऑपरेशन ब्लूस्टार (जिसमें इंदिरा गांधी स्वर्ण मंदिर में टैंक, एपीसी और हॉवित्जर तोपों का इस्तेमाल किया) से भी की। शेखर गुप्ता ने इसकी तुलना सरदार पटेल के 1947 में हैदराबाद में निज़ाम को अधीन करने के लिए सेना भेजने और इसे "पुलिस कार्रवाई" बताने से की थी।

आइजोल पर बमबारी करने वाले विमान उड़ा रहे थे राजेश पायलट और सुरेश कलमाडी

साल 1966 की शुरुआत में मिजो विद्रोह के शुरू होने पर लगा था कि आइजोल पर बागी कब्जा कर लेंगे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विद्रोहियों पर हमला करने के लिए भारतीय वायुसेना को वहां भेजा। यहाँ तक कि कैरिबस जैसे परिवहन विमान से भी बमबारी की गई। इन्हें राजेश पायलट उड़ा रहे थे। वहीं दूसरे विमान को सुरेश कलमाड़ी उड़ा रहे थे। दोनों ही बाद के दिनों में कांग्रेस के दिग्गज नेता बने।

राजेश पायलट ने 1996 में 1971 के युद्ध के 25 वर्ष होने पर पत्रकार गौरव सावंत के साथ एक लंबे इंटरव्यू में इसका भी जिक्र किया था। राजेश पायलट (10 फरवरी, 1945- 11 जून 2000) ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय वायुसेना की ओर से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में वायुसेना से इस्तीफा देकर राजनीति में आए और 1980 से 1999 तक लगातार दौसा से सांसद रहे।

वहीं, सुरेश कलमाड़ी 1960 में पुणे के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल हो गए थे। इसके बाद साल 1964 में जोधपुर और इलाहाबाद में एयर फ़ोर्स फ्लाइंग कालेजों के साथ जुड़ गए। 1964-1972 के बीच उन्होंने भारतीय वायु सेना की सेवा की थी। इसके बाद वह खेल की राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हो गए थे।

इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही दिन बाद हुई बमबारी

इंदिरा गांधी पहली बार 19 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री बनी थी और कुछ ही दिनों के बाद 5 मार्च को इंडियन एयरफोर्स के लड़ाकू विमान को मिजोरम के आइजोल शहर पर बमबारी के लिए कहना पड़ा था। 1966 में अलगाववादी नेशनल मिजो फ्रंट को पूर्वी पाकिस्तान से सीधी मदद मिला करती थी। बमबारी से आइजोल शहर के चार प्रमुख इलाके रिपब्लिक वेंग, हमेच्चे वेंग, डवपुई वेंग और छिंगा वेंग पूरी तरह तबाह हो गए थे।

मार्च 1966 में कलकत्ता से छपने वाले अखबार 'हिंदुस्तान स्टैंडर्ड' ने इंदिरा गांधी का एक बयान छापा जिसमें बताया गया था कि लड़ाकू विमानों को केवल जवानों और उनकी रसद को 'एयर ड्रॉप' करने के लिए भेजा गया था। विपक्ष ने तब भी सवाल उठाया था कि रसद पहुंचाने के लिए चार-चार जेट फाइटर्स की क्या जरूरत थी? भारतीय वायुसेना के इस हमले के कारण चीन और पाकिस्तान की शह पर भारत में आतंक फैला रहे मिजो अलगाववादियों की कमर टूट गई और भारत को तोड़कर अलग मिजो नेशन बनाने की योजना पर पानी फिर गया।

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