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Cancer: क्यों बढ़ रहे हैं भारत में कैंसर रोगी, किन राज्यों में हैं ज्यादा खतरा?

Cancer: अपोलो हॉस्पिटल्स की 'वर्ल्ड हेल्थ डे 2024' के लिए 'हेल्थ ऑफ द नेशन रिपोर्ट' में बताया गया है कि कैंसर के मामलों में बहुत तेजी से वृद्धि के कारण भारत को "दुनिया का कैंसर कैपिटल" कहा जा रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में कैंसर के मामलों की संख्या 2020 में 13 लाख से बढ़कर 2025 में 15.7 लाख होने की उम्मीद है, जो कि केवल पाँच वर्षों में 13% की वृद्धि दर्शाता है। वैश्विक दरों की तुलना में भारत में कैंसर की बढ़ती घटनाओं के कारण देश को "दुनिया का कैंसर कैपिटल" कहा जाने लगा है।

cancer patients

भारत में कौन से कैंसर सबसे आम

भारत में कैंसर के सबसे आम प्रकारों में ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर, सर्वाइकल (गर्दन) कैंसर, ओरल (मुंह) कैंसर और लंग (फेफड़े) कैंसर शामिल हैं। स्तन कैंसर भारत में कैंसर का सबसे आम रूप है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (एनसीडीआईआर) की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, महिला रोगियों में होने वाले कैंसर के लगभग 39.4% मामले स्तन कैंसर के होते हैं। 2020 में देश में दो लाख से ज़्यादा महिलाओं में स्तन कैंसर की पुष्टि हुई थी।

सर्वाइकल कैंसर भारत में दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है। हेल्थ जर्नल द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में से 23% भारत में होती है।

भारत में मुंह का कैंसर तीसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है और ये मुख्य रूप से तंबाकू और शराब के सेवन के कारण होता है। भारत में फेफड़ों का कैंसर भी बहुत आम है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के सर्वे के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर सभी मृत्यु मामलों में से 9.3% के लिए जिम्मेदार है। 2022 में भारत में फेफड़े के कैंसर के लगभग 70,275 मामले थे।

भारत क्यों बन रहा "दुनिया का कैंसर कैपिटल"

वैश्विक दरों की तुलना में, विशेष रूप से युवाओं में कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि के कारण भारत को "दुनिया का कैंसर कैपिटल" के रूप में जाना जा रहा है। अध्ययनों से पता चला है कि एक्सरसाइज न करना, नौकरी का दबाव, खराब आहार जैसे बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारत में युवाओं में कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही हैं।

भारत में कैंसर के 70% मामलों के लिए तंबाकू का सेवन, इंफेक्शन, खराब आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी जिम्मेदार हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 40% कैंसर तंबाकू के कारण होते हैं, 20% इन्फेक्शन के कारण होते हैं और 10% खराब आहार और शारीरिक गतिविधि न करने के कारण होते है। भारत में मुंह, स्तन और गर्दन के कैंसर की स्क्रीनिंग तो की जाती है, लेकिन वर्तमान स्क्रीनिंग दरें एक प्रतिशत से भी कम हैं।

भारत में वर्तमान में कितने कैंसर मरीज़

इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में भारत में कैंसर के नए मामलों की अनुमानित संख्या 14,61,427 थी, यानी कि लगभग देश में प्रति एक लाख लोगों में से 100 को कैंसर था। आंकड़े बताते है कि भारत में लगभग नौ में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि फेफड़ों के कैंसर पुरुषों में सबसे अधिक है, जबकि स्तन कैंसर महिलाओं में शीर्ष स्थान पर है। बचपन के कैंसर (0-14 वर्ष) में, लिम्फोइड ल्यूकेमिया प्रमुख रूप से उभरा, जो लड़कों में 29.2% और लड़कियों में 24.2% था। आगे देखते हुए, 2020 की तुलना में 2025 तक कैंसर की घटनाओं में अनुमानित 12.8% की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो लगभग 15.7 लाख लोगों को होगा।

भारत में किस राज्य में कैंसर दर सबसे ज्यादा

अगर बात की जाए देश में कैंसर दर की, तो देश में जिस राज्य का कैंसर दर सबसे ज्यादा है वह राज्य है केरल, जहां हर एक लाख लोगों पर 135.3 लोगों को कैंसर है। दूसरे स्थान पर आता है मिजोरम, जहां हर एक लाख में से 121.7 लोगों को कैंसर है। और तीसरे स्थान पर है हरियाणा, जहां हर एक लाख लोगों पर 103.4 को कैंसर है।

अब बात करते हैं कि 2023 में किस राज्य में सबसे ज्यादा कैंसर के मामले सामने आए थे। 2023 में लगभग 2.10 लाख नए कैंसर मामलों के साथ उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर था। वहीं 2021 में उत्तर प्रदेश में नए कैंसर के मामलों की संख्या लगभग 2 लाख थी। दूसरे स्थान पर 1.21 लाख मामलों के साथ महाराष्ट्र था और 1.13 लाख नए कैंसर मामलों के साथ पश्चिम बंगाल तीसरे स्थान पर था।

भारत सरकार कैंसर के लिए क्या कर रही

भारत सरकार ने देश में कैंसर से निपटने के लिए कई पहल की हैं। इन पहलों में आम कैंसर की जांच के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की स्थापना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उपचार कवरेज, एम्स जैसे संस्थानों में ऑन्कोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करना, आदि शामिल हैं।

इसके अलावा, सरकार स्वास्थ्य मंत्री के कैंसर रोगी कोष, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इन प्रयासों का मकसद देश भर में कैंसर के इलाज के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना, इलाज मुहैया कराना और कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण उपाय करना है।

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