Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

महाभारत: अर्जुन से पहले कौन आया था द्रोपदी के जीवन में?

महाभारत की उम्र पांच हजार साल पुरानी बताई जाती है। इन पांच हजार सालों में एक सवाल आज भी गौण है कि द्रोपदी की महाभारत में कितनी और क्या भूमिका थी? देखा जाय तो द्रोपदी का नाम चीर हरण के सन्दर्भ में सबसे ज्यादा प्रयुक्त होता है। यह सन्दर्भ वर्तमान समाज में अबला पर हुए अत्याचार के नाते इमोशन का अतिरिक्त क्रेडिट भी हासिल कर लेता है।

Draupadi ka cheerharan

यही संदर्भ कृष्ण को द्रोपदी के सबसे बड़े संरक्षक के तौर पर स्थापित भी करता है, लेकिन ये वो बातें हैं जो मुख्यधारा के नजरिये से कही गयी हैं। इसको द्रोपदी के नजरिये से जब समाज के पटल पर रखा जाता है, तो द्रोपदी का वह 'विराट-व्यक्तित्व' सामने आता है, जो चर्चा से बाहर है।

कौन था द्रौपदी का पहला प्यार?

बहुत कम लोगों को पता है कि द्रोपदी का मूल नाम 'कृष्णा' था और वो भगवान 'कृष्ण' की सखी थीं। द्रोपदी यानि कृष्णा के मन में जिस पहले प्यार की कल्पना अंकुरित हुई वो प्यार कृष्ण के प्रति था।

द्रौपदी का पहला बलिदान

द्रोपदी के चाहने के बावजूद कृष्ण ने स्वयंवर के माध्यम से उस प्रेम को अंकुरण काल में ही समाप्त कर दिया। अर्थात, कृष्णा ने कृष्ण से प्रेम किया और कृष्ण ने कृष्णा को 'सखी' भर माना। यह द्रोपदी के रूप में कृष्णा का पहला बलिदान था।

द्रौपदी का दूसरा बलिदान

हालांकि ऐसा नहीं है कि स्वयं-वर के दौरान द्रोपदी ने खुद को अर्जुन को समर्पित कर दिया। बल्कि अर्जुन से पहले जो योद्धा स्वयं-वर की शर्त पूरा कर सकता था वो 'कर्ण' था। लेकिन कृष्ण एवं सभा के दबाव में द्रोपदी ने न चाहकर भी कर्ण को अस्वीकृत किया। द्रोपदी की यह अस्वीकृति को स्व-इच्छा की बजाय सभा के दबाव में थी। यह द्रोपदी का दूसरा बलिदान था, या यूं कहें तो अर्जुन से पहले द्रोपदी कर्ण की होते-होते रह गयी थी।

द्रौपदी का तीसरा बलिदान

दो पुरुषों को तमाम कारणों के दबाव में न हासिल कर पाने वाली द्रोपदी के जीवन में अर्जुन तीसरे पुरुष के रूप में दाखिल हुए। लेकिन जबतक द्रोपदी उन्हें अपना बनाती, उससे पहले माता कुंती के एक भयानक भ्रम की वजह से द्रोपदी को पांच पतियों की पत्नी बनना पड़ा। यह एक स्त्री के रूप द्रोपदी का तीसरा और सबसे भयावह बलिदान था। यह वह समय था जब द्रोपदी को वस्तु के तौर पर विभाजित होना पड़ा था।

-
-
-
-
-
-
-
-
-
-
-
-

एक स्त्री का वस्तु समझा जाना न तब कोई अनोखी बात थी और न आज कोई अनोखी बात है। इसे वर्तमान और प्राचीन समाज के बीच साम्य के तौर पर देखा जाना चाहिए। पांच पतियों की पत्नी तो थी ही, फिर अर्जुन आदि पांडव कई विवाह करते रहे और द्रोपदी उनकी नई पत्नियों का स्वागत करती रही। इसे एक स्त्री के सन्दर्भ में बलिदानी चरित्र के रूप में देखा जाय या समाजिक रूप से स्त्री के नियति के रूप में समझा जाय, इसका मूल्यांकन समाज को करना चाहिए।

दांव पर लगीं दौपदी

द्रोपदी के सन्दर्भ में दुनिया को ज्यादा करके इतना भर पता है कि उसे एक गलत फैसले में ज्येष्ठ पांडव धर्मराज ने जुए में दाव पर लगा दिया था। जबकि द्रोपदी के नजरिये से देखें तो वो जाने कबकी दांव पर लगाई चुकी थी।

पढ़ें- इतिहास से जुड़ी ऐसी बातें जो बहुत कम लोग जातने हैं

धर्मराज ने तो सिर्फ जुए में द्रोपदी को दाँव पर लगाया, लेकिन सही मायने में अगर देखें तो द्रोपदी का तो पूरा जीवन ही दाँव पर लगा था। धर्मराज एक बार हारे जबकि द्रोपदी उससे बहुत पहले से अनेक बार हारती ही आ रही थी। द्रोपदी की लाज भी कृष्ण ने एकबार बचायी जबकि उसे उघार तो जाने कबसे किया जा रहा था।

दबी-शोषित दौपदी

चर्चित अदाकारा हेमा मालिनी एवं उनकी टीम ने नाटक 'द्रोपदी' के माध्यम से दौपदी के जीवन के इन्हीं तथ्यों को सामने लाने के प्रयास किये हैं। इस नाटक के माध्यम से महाभारत में द्रोपदी के तमाम अनकहे पक्षों को रखा गया है। इस नाटक में द्रोपदी का चित्रण 'दबाई' गयी शोषित स्त्री के रूप में किया गया है।

अब उस द्रोपदी को वर्तमान समाज एक असाधारण स्त्री द्वारा किया गया असाधारण कार्य मानकर उल्लेखित करता है अथवा उसे एक शोषित अबला के तौर पर स्वीकार करता है, ये तो समाज के अपने विवेक का विषय है।

आज जब समाज में महिलाओं की सुरक्षा, उनका सम्मान एक यक्ष प्रश्न बना है तो हमे यह देखना होगा कि कहीं हर घर में एक द्रोपदी तो नहीं रह रही है। अब यहाँ भी वही प्रश्न है कि हमारे-आपके घर में जो द्रोपदियां हैं उन्हें हम 'बलिदानी नारी' की उपाधि दे रहे हैं अथवा शोषित अबला समझकर उनको दबा रहे हैं! अत: जबतक द्रोपदी के नजरिये से जबतक महाभारत का पुनर्पाठ नहीं होता है तबतक महाभारत का समग्र 'द्रोपदी' पक्ष सामने नहीं आएगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+