Premature Babies: हर दसवां प्रीमैच्योर बच्चा जन्म के कुछ दिन बाद ही मर जाता है
Premature Babies: संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट के अनुसार 2020 में लगभग 13.4 मिलियन बच्चे प्रीमैच्योर पैदा हुए, जिनमें से लगभग 10 लाख बच्चे कुछ समय बाद ही स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण मौत की गोद में समा गए। यानि लगभग हर उन 10 में से एक बच्चे की जल्दी ही मृत्यु हो जाती है, जो गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले पैदा होते हैं। इसका मुख्य कारण है खराब मातृ स्वास्थ्य और कुपोषण। इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की देखभाल के साथ-साथ मातृ स्वास्थ्य और पोषण - दोनों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।
5 अक्टूबर को जारी डब्ल्यूएचओ, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन का कहना है कि प्रीमैच्योर बच्चे जो जीवित हैं, उनमें जन्म के समय से ही बड़ी बीमारियां, विकलांगता और विकास संबंधी समस्याएं वयस्क होने पर भी बरकरार रहती हैं। ऐसे बच्चे मधुमेह और हृदय की बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे विशेष रूप से जीवन-घातक स्वास्थ्य जटिलताओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, और उनकी विशेष देखभाल और ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

रिपोर्ट के अनुसार 2020 में समय से पहले जन्मने वाले लगभग 65 प्रतिशत बच्चे उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिणी एशिया में जन्म लिए। सबसे अधिक प्रीमैच्योर बच्चे वाले देशों में बांग्लादेश, मलावी और पाकिस्तान हैं, जबकि सबसे कम प्रीमैच्योर बच्चों वाले देशों में - सर्बिया, मोल्दोवा और कजाकिस्तान हैं। समय से पहले जन्म दर की समस्या केवल कम या मध्यम आय वाले देशों में ही नहीं है। आकड़ों से पता चलता है कि यह समस्या दुनिया के सभी हिस्सों में है। ग्रीस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे कुछ उच्च आय वाले देशों में भी प्रीमैच्योर बच्चों की संख्या 10 प्रतिशत या उससे अधिक है।
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मातृ स्वास्थ्य जोखिम को कम करने के लिए बहुत जरूरी है कि किशोर गर्भावस्था, संक्रमण, खराब पोषण पर ध्यान दिया जाए, क्योंकि ये ही प्री-एक्लेमप्सिया यानि समय से पहले जन्म के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। गर्भ की जटिलताओं का पता लगाने और उसका प्रबंधन करने के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन के माध्यम से सटीक गर्भावस्था डेटा प्राप्त किया जा सकता है। उचित उपचार के माध्यम से प्रसव समय से कराने के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल महत्वपूर्ण है।
भारत में भी हर साल समय से पहले या अपरिपक्व जन्म के कारण लाखों बच्चों की जान चली जाती है, बल्कि भारत उन देशों में है जहां प्रीमैच्योर बच्चों की मौत की संख्या बहुत अधिक है। 2020 में जो 134 लाख बच्चे समय से पहले पैदा हुए, जिनमें से 30 लाख या 22 प्रतिशत भारत में ही थे।












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