Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP): कौन हैं पाकिस्तानी तालिबान? क्यों लड़ते हैं पाकिस्तानी सेना से?
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को पाकिस्तानी तालिबान के नाम से भी जाना जाता है। यह आतंकी संगठन अफगान तालिबान के तर्ज पर पाकिस्तान में हुकूमत कायम करने की फिराक में है।

Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP): तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने 18 दिसंबर को पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा स्थित बन्नू छावनी के आतंकवाद निरोधी विभाग (सीटीडी) पर हमला किया। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक, आतंकवाद निरोधी विभाग में लगभग 25 आतंकवादियों से पूछताछ की जा रही थी। इसी दौरान इनमें से एक आतंकी ने पुलिस से हथियार छीन लिया और दूसरे आतंकवादियों को भी पुलिस के कब्जे से छुड़ा लिया। इस गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद इन आतंकवादियों ने पूरी बिल्डिंग को ही अपने कब्जे में ले लिया।
इसके बाद, टीटीपी ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसने पाकिस्तानी सेना के नौ जवानों को बंधक बना लिया है। इनमें एक बड़ा नाम मेजर खुर्शीद अकरम भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टीटीपी ने पाकिस्तानी नागरिकों को शरिया का अनुसरण करने वाले पर्चे भी बांटे हैं।
टीटीपी ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी दी है कि उनके आतंकियों को वजीरिस्तान स्थित टीटीपी के सुरक्षित ठिकाने तक ले जाया जाए, वरना किसी भी तरह के नुकसान के लिए सेना जिम्मेदार होगी। इस घटना के बाद पूरे इलाके को सैनिक छावनी में बदल दिया गया है। पाकिस्तानी सरकार और आतंकियों के बीच वार्ता जारी है, लेकिन अभी तक किसी भी तरह का परिणाम सामने नहीं आया है।
टीटीपी के साथ संघर्ष विराम
गौरतलब है कि टीटीपी ने पाकिस्तान सरकार के साथ इसी वर्ष के जून महीने में अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम की घोषणा की थी। हालांकि, 28 नवंबर को टीटीपी की ओर से इसे खत्म कर दिया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि संघर्ष विराम भी तब समाप्त किया गया, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा सेवानिवृत्त हुए। दरअसल, टीटीपी की नजर हमेशा पाकिस्तान की सेना और सरकार की अस्थिरता पर बनी रहती है। ऐसे में नए सेना प्रमुख आसिम मुनीर को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता हैं।
संघर्ष विराम समाप्त होते ही टीटीपी ने अपने आतंकियों को पूरे पाकिस्तान पर हमले करने के आदेश दे दिए हैं। टीटीपी ने कहा है कि पाकिस्तान के अनेक इलाकों में हमारे आतंकियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाए जा रहे हैं। इसलिए हम भी पूरे पाकिस्तान पर जब मौका मिलेगा, हमला करेंगे।
क्या है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान?
वैसे तो पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों की कोई कमी नहीं हैं। इसीलिए उसे आतंकवाद की 'फैक्ट्री' भी कहा जाता है। मगर वहां जितने भी आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं, उनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को माना जाता है।
दरअसल, टीटीपी की नींव पाकिस्तान में तभी पड़ गई थी, जब 2002 में अमेरिका ने अफगानिस्तान में कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई के बाद अफगानिस्तान से भागकर कई आतंकी पाकिस्तान के कबाइली इलाके में छिप गए थे। इन आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई शुरू की तो स्वात घाटी में सेना का विरोध शुरू हो गया। इस इलाके में कई विद्रोही गुट सक्रिय होने लगे। इसके बाद 2007 में बैतुल्लाह महसूद के नेतृत्व में 13 गुटों ने एक तहरीक यानि अभियान में शामिल होने का निर्णय लिया और इसका नाम तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) रखा गया।
अलकायदा से भी टीटीपी के गहरे संबंध हैं। 2010 में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर हुए हमले में भी टीटीपी का नाम सामने आया था। यह आमतौर पर आत्मघाती हमलावरों का ज्यादा इस्तेमाल करता है। वर्ष 2009 में लाहौर पुलिस अकादमी पर हुए हमले की जिम्मेवारी भी टीटीपी ने ही ली थी। इस हमले में आठ लोगों की मौत और सैंकड़ों लोग घायल हो गए थे।
टीटीपी का उद्देश्य अफगान तालिबान की तर्ज पर पाकिस्तान की कथित चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकना है, ताकि पाकिस्तान में इस्लामिक शरिया कानून को और भी कट्टर तरीके से लागू किया जा सके। पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए टीटीपी ने कई बार पाकिस्तानी सेना पर भी हमला किया हैं और कई पाकिस्तानी नेताओं की नृशंस हत्याओं में भी इसका नाम शामिल है।
मलाला यूसुफजई पर हमला
टीटीपी ने हमेशा महिलाओं एवं लड़कियों के पढ़ने का विरोध किया है। उसने स्वात घाटी के कई स्कूल भी बंद करवा दिये। इस फैसले का विरोध मलाला यूसुफजई ने किया और कहा कि टीटीपी लड़कियों को शिक्षा से वंचित करने का फरमान कैसे जारी कर सकता है? इसके बाद मलाला टीटीपी की नजरों में आ गईं। साल 2012 में जब मलाला बस से स्कूल जा रही थी। उसमें टीटीपी के आतंकी पहले से ही सवार थे। आतंकियों ने मलाला की पहचान करके उस पर गोली चला दी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उन्हें बेहतर इलाज के लिए लंदन ले जाया गया। इसके बाद मलाला की चर्चा पूरी दुनिया में होने लगी और 2014 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
पेशावर स्थित आर्मी स्कूल पर हमला
16 दिसंबर 2014 को टीटीपी के सात आतंकी सेना की वर्दी में पेशावर स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल के पिछले दरवाजे से अंदर घुसे और अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दी। उन्होंने अलग-अलग क्लास रूम में जाकर बच्चों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया। कुछ ही देर में स्कूल में लाशों का ढेर लग गया। इस हमले में 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई, जिनमें 131 बच्चे भी शामिल थे।
इस घटना के कुछ देर बाद जब पाकिस्तानी आर्मी ने आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की तो कुछ आतंकवादियों ने खुद को गोली मार ली। बाकी आतंकियों की सेना ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस हमले ने पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।
इसके अतिरिक्त टीटीपी के आतंकवादियों को जब भी मौका मिलता है, वे पाकिस्तान में आतंकी हमला करते रहते हैं। इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी के अनुसार, टीटीपी पर 83 हजार पाकिस्तानियों की हत्या का आरोप है।
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