Saudi Arabia and Iran: ‘सुन्नी’ सऊदी अरब और ‘शिया’ ईरान के बीच क्या था विवाद, अब किसने सुलझाये मतभेद?
साल 2016 में शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र सहित 47 शियाओं को सऊदी अरब की सरकार ने मौत की सजा दी थी।शिया बहुल ईरान के सुन्नी बहुल सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक संबंध समाप्त हो गए थे।

सालों से एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब और शिया बहुल देश ईरान अब आपसी समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। यह दोनों देश दो महीनों में अपने-अपने दूतावास और संबंधित कार्यालय खोलेंगे। इस समझौते में यह भी सहमति हुई कि दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। सऊदी अरब और ईरान की सहमति इस बात पर भी हुई है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री इस समझौते को लागू करने के लिए बातचीत कर आपसी संबंध बढ़ाने की कोशिशें करते रहेंगे।
चीन की मध्यस्थता
दोनों देशो की बीच मध्यस्थता में चीन की भूमिका अहम है। बीजिंग में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर इस समझौते की घोषणा की है। इस बैठक में सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसाद बिन मोहम्मद अल-ऐबन, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली शामखानी और चीन के वरिष्ठ राजनयिक तथा पूर्व विदेश मंत्री वांग यी मौजूद थे।
हालांकि, इससे पहले भी ईराक की अगुवाई में सऊदी अरब और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी थी। लेकिन तब कोई परिणाम सामने नहीं आया। गौरतलब है कि साल 2016 में शिया धार्मिक विद्वान निम्र अल-निम्र को सऊदी सरकार ने मौत की सजा दी थी। इसके बाद दोनों देशों के आपसी संबंध बिगड़ गए थे।
संबंधों में तनाव का कारण
ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव उस समय बढ़ गया जब 2016 में शिया धार्मिक विद्वान निम्र अल-निम्र सहित 47 लोगों को सऊदी सरकार के आदेश पर मौत की सजा दी गई। इन लोगों पर सऊदी सरकार ने जनता को भड़काने, कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और आतंकवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था।
इस मौत की सजा के विरोध में ईरान में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गये। ईरान स्थित सऊदी दूतावास पर भी हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के बाद सऊदी अरब ने ईरानी राजनयिकों को 48 घंटे के अंदर सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दे दिया।
सऊदी अरब का कहना था कि निम्र अल-निम्र सहित 47 लोगों को इसलिए फांसी की सजा दी गई है, क्योंकि वे आतंकी गतिविधियों में लिप्त थे। ईरान उनका समर्थन करके एक तरह से आतंकवाद का साथ दे रहा है। इसके बाद, सऊदी अरब के अलावा सूड़ान और बहरीन ने भी ईरान से अपने डिप्लोमेटिक संबंध तोड़ लिए थे।
इससे पहले साल 2015 में मक्का में हज के दौरान मची भगदड़ में दुनियाभर के हजारों मुस्लिम हाजियों की मौत हो गई थी। इस भगदड़ में 464 ईरानी भी मारे गए थे। घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया। ईरान ने सऊदी अरब पर सुरक्षा की कमी और मृतकों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया। जवाब में सऊदी अरब ने ईरान पर आपदा में राजनीति करने और सऊदी अरब को बदनाम करने का आरोप लगाया।
हज को लेकर भी हुई राजनीति
मई 2016 में ईरान ने यह फैसला किया कि उसके नागरिक हज के लिए सऊदी अरब नहीं जाएंगे। ईरान ने यह आरोप लगाया कि सऊदी सरकार ईरानी नागरिकों के हज पर जाने में बाधा डाल रही है। ईरान ने दावा किया कि सऊदी सरकार से हमने ईरानी हाजियों की सुरक्षा और सम्मान का आश्वासन मांगा था। लेकिन इस पर सऊदी अरब का जवाब संतोषजनक नहीं था। इसके जवाब में सऊदी अरब ने कहा कि ईरान ने हज के दौरान सऊदी अरब के खिलाफ प्रदर्शन की मांग की थी। इससे हज करने में अव्यवस्था पैदा होती। इसलिए यह मांग हमें स्वीकार्य नहीं है।
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए कहा कि हज प्रबंधन का कार्य सऊदी अरब के शासकों से वापस ले लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के शासक हज के लिए जाने वाले लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, उसको देखते हुए यह जरूरी है कि हज का प्रबंधन किसी एक देश के हाथ में नहीं होना चाहिए।
हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब में संघर्ष
साल 2014 में हूती विद्रोहियों ने यमन की सऊदी समर्थक सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद, साल 2015 में यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब ने संयुक्त अरब अमीरात और अन्य अरब देशों के साथ मिलकर एक सैन्य गठबंधन का नेतृत्व किया और हूती विद्रोहियों के खिलाफ जबर्दस्त अभियान चलाया। इस दौरान कई बार सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष हुआ। इन संघर्षों में सैकड़ों हूती विद्रोही और सऊदी अरब समर्थित सैनिक मारे गए।
सऊदी अरब ईरान पर यह आरोप लगाता रहा है कि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है और वे लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं। हालांकि ईरान इससे इंकार करता रहा है। गौरतलब है कि हूती विद्रोही भी शिया संप्रदाय से ही आते हैं।
साल 2019 में हूती विद्रोहियों ने मिसाइल और ड्रोन से सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर भीषण हमला किया। इस हमले के चलते सऊदी तेल संयंत्रों को भारी नुकसान हुआ और तेल का उत्पादन कुछ समय के लिए ठप हो गया। मार्च 2022 में भी हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल संयंत्रों को ड्रोन से अपना निशाना बनाया।
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