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Windfall Tax: क्या है विंडफॉल टैक्स, तेल कंपनियों से क्यों हो रही वसूली  

31 जुलाई 2023 को केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) पर विंडफॉल टैक्स में भारी इजाफा किया है। अब यह करीब 165.5 प्रतिशत बढ़ाकर ₹1600 से ₹4250 प्रति टन कर दिया गया है।

इसके साथ-साथ केंद्र सरकार ने यह विंडफॉल टैक्स डीजल पर भी लगाया है। अब डीजल पर ₹1 प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगाया गया है, जोकि पहले शून्य था। यह बढ़ी हुई दर 1 अगस्त 2023 से लागू हो गयी है।

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क्या होता है विंडफॉल टैक्स
विंडफाल टैक्स (अप्रत्याशित कर), एक बार लगने वाले टैक्स की वह उच्च दर है जो किसी विशेष कंपनी अथवा उद्योग पर उसके अप्रत्याशित रूप से बढ़े मुनाफे पर लगाई जाती है। यानी विंडफॉल टैक्स ऐसी परिस्थितियों में लगाया जाता है जब किसी बाहरी या अन्य कारणों से किसी उद्योग का मुनाफा अचानक से बढ़ जाता है।

इसमें उद्योग को कोई अतिरिक्त मेहनत अथवा अतिरिक्त व्यय नहीं करना पड़ा है। जैसे कोरोना महामारी के दौरान अनेक वस्तुओं के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई तथा रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बहुत से देशों में तेल महंगा हो गया, जिसके चलते कंपनियों का मुनाफा एकदम बढ़ गया।

कहने का मतलब यह है कि जब कोई कंपनी अथवा उद्योग बिना किसी अतिरिक्त मेहनत, खर्च अथवा निवेश के औसत से ज्यादा लाभ अर्जित करने लगता है तो केंद्र सरकार कर की सामान्य दरों के ऊपर एकमुश्त कर लगाती है। इसे ही विंडफॉल टैक्स (कर) कहा जाता है।

भारत में विंडफॉल टैक्स
भारत में विंडफॉल टैक्स 1970 में अस्तित्व में आया था। फिलहाल विंडफॉल टैक्स पर हर 15 दिनों में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड की ओर से इसकी समीक्षा होती है। यह कर आमतौर पर लंबे समय से स्थापित व्यापार के अप्रत्याशित लाभ पर लगाया जाता है। 1 मई 2023 को केंद्र सरकार ने कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को ₹6400 प्रति टन से घटाकर ₹4100 प्रति टन कर दिया था। इसके उपरांत 16 मई को इसे शून्य कर दिया गया और जुलाई माह में इसको बढ़ाकर ₹1600 प्रति टन कर दिया गया, जिसको अब ₹4250 प्रति टन कर दिया गया है।

सरकार ने क्यों लगाया विंडफॉल टैक्स
सरकार घरेलू बाजार में आपूर्ति को ध्यान में रखकर भी विंडफॉल टैक्स लगाती है। दरअसल, अनेक कंपनियां निर्यात के जरिये अपने लाभ में इजाफा करती हैं। जिसके कारण घरेलू बाजार में वस्तु की कमी हो जाती है और कीमतों में वृद्धि होती है। जैसे पहले अनेक रिफाइनरी देश के भीतर कच्चे तेल को बेचने के बजाय निर्यात कर दिया करती थी। जिसके बाद भारत सरकार ने तेल निर्यातकों को पहले भारतीय घरेलू बाजार में तेल की मांग को अनिवार्य रूप से पूरा करने के लिए बाध्य किया और अप्रत्यक्ष रूप से तेल निर्यात पर लगाम लगाई।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड उच्च स्तर तक बढ़ गया था और कमजोर रुपये के कारण भारत का आयात मूल्य बढ़ा। इसके साथ-साथ सरकार की कमाई घटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती व भोजन, उर्वरकों पर खर्च व अन्य खर्चों से सरकार के घाटे में बढ़ोतरी हुई। जिसके चलते इस अंतर को पूरा करने के लिए तेल कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने का फैसला किया गया।

विंडफॉल टैक्स से सरकार को राजस्व लाभ
राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा ने 1 सितंबर से 31 मार्च 2023 तक विंडफॉल टैक्स द्वारा ₹25000 करोड़ के राजस्व का अनुमान लगाया था। यानि अनुमान के अनुसार कुल 7 महीने में ₹25000 करोड़ का विंडफॉल टैक्स संग्रह हुआ। अगर इसी अनुमान से एक वर्ष का आकलन करें तो करीब ₹43000 करोड़ विंडफॉल टैक्स से सरकार को प्राप्त हो सकते हैं।

जनता पर क्या होगा असर?
विंडफॉल टैक्स का असर आम जनता पर नहीं दिखाई देता, लेकिन इसका असर उन कंपनियों पर दिखाई देता है, जो कम कीमत पर क्रूड ऑयल खरीदती हैं और रिफाइन कर दूसरे देशों को ज्यादा कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाती हैं। इसी मुनाफे पर सरकार विंडफॉल टैक्स लगाकर कमाई करती है और घरेलू सप्लाई में कमी को रोकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विंडफॉल टैक्स से निवेशक हतोत्साहित हो सकते है, क्योंकि उनको लाभांश भुगतान कम होगा। जिसके परिणामस्वरूप वे अपना निवेश बंद कर सकते हैं।

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