Necrophilia: लाश के साथ बलात्कार? जानें क्या होता है नेक्रोफिलिया और इसके खिलाफ देश-दुनिया में कानून

नेक्रोफीलिया एक घिनौना मनोविकार यानी मेंटल डिसऑर्डर है। जहां कोई शख्स या अपराधी लाश के साथ यौन संबंध बनाता है। फिलहाल भारत में इस अपराध से संबंधित कोई कानून नहीं है।

what is necrophilia and laws against it in the world

Necrophilia: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक शव के साथ बलात्कार के आरोपी को हत्या का दोषी करार दिया है। जबकि देश में शव के साथ बलात्कार पर कानून न होने का हवाला देते हुए उसे इस मामले में बरी कर दिया। यह मामला 25 जून 2015 का था। जहां आरोपी ने 21 साल की लड़की की हत्या करने के बाद उसके मृत शरीर के साथ बलात्कार किया। जस्टिस बी. वीरप्पा और जस्टिस वेंकटेश नायक टी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी पर बलात्कार का चार्ज नहीं लगाया जा सकता। आईपीसी (Indian Penal Code) की सेक्शन 302 (मर्डर) के तहत मुजरिम को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है। इसके साथ ही ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

नेक्रोफिलिया पर बहस तेज

हाईकोर्ट ने कहा कि आईपीसी के सेक्शन 375 और 377 को ध्यान से पढ़ने पर यह साफ होता है कि डेड बॉडी (मृत मानवीय शरीर) को ह्यूमन या पर्सन नहीं कहा जा सकता। इस वजह से भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 375 या 377 लागू नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने हत्या करने के बाद विक्टिम का यौन उत्पीड़न किया। ये सैडिज्म (Sadism), नेक्रोफिलिया (Necrophilia) है लेकिन भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 376 में इस अपराध की कोई सजा ही नहीं है।

आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इस तरह के अपराधों पर कानून बनाने को कहा है। कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर नेक्रोफिलिया पर बहस तेज हो गई है।

क्या है नेक्रोफिलिया?

नेक्रोफिलिया शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है। जहां नेक्रो का मतलब होता है मृत शरीर और फीलिया यानी प्यार अथवा आकर्षण। इस प्रकार नेक्रोफीलिया का अर्थ होता है मृत शरीर के साथ यौन संबंध बनाना। नेक्रोफीलिया को एक घिनौना मनोविकार यानी मेंटल डिसऑर्डर कहा गया है। नेक्रोफिलिया को मेडिकल क्षेत्र में अन्य कई और नामों से भी जाना जाता है। इसे नेक्रोफिलिज्म, नेक्रोलाग्निया, नेक्रोकाइटस, नेक्रोक्लेसिस और थानाटोफिलिया भी कहा गया हैं।

प्रोफेसर आनंद कुमार वसुदेवन व उनके सहयोगियों द्वारा नेक्रोफिलिया पर किये गये एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक नेक्रोफिलिया एक बेहद गंभीर किस्म की मानसिक बीमारी कही जा सकती है। क्योंकि इसमें शव के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा में मरीज किसी की हत्या करने से भी गुरेज नहीं करता है। अगर किसी मरीज की शव के साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा हो रही है और उसे शव न मिले तो वह किसी की हत्या करके उसके शव के साथ यौन संबंध बनाने का काम भी कर सकता है।

बलात्कार और नेक्रोफिलिया

हाईकोर्ट ने बलात्कार और नेक्रोफिलिया में अंतर बताते हुए कहा कि बलात्कार जीवित व्यक्ति के साथ हो सकता है, शव के साथ नहीं। जीवित व्यक्ति के अंदर भावना होती है, मृतकों में नहीं। इस कारण मरे हुए व्यक्ति के साथ बलात्कार को नेक्रोफिलिया कहते हैं।

क्या कहते हैं नेक्रोफिलिया से जुड़े अध्ययन

जर्मनी की रिसर्च गेट (वैज्ञानिक के रिसर्च पेपर को संग्रहित और प्रकाशक) के मुताबिक 1989 में जोनाथन रोसमैन और फिलिप रेसनिक ने नेक्रोफिलिया से संबंधित 122 मामलों की समीक्षा की थी। इसमें उनके उद्देश्यों का पता लगाया गया था। नेक्रोफिलिया को यहां एक मानसिक बीमारी माना गया। ऐसे मरीज कई कारणों से मृत शरीर के साथ सेक्स करते हैं। उनका मकसद एक ऐसे साथी पर कब्जा करना है, जो उनका विरोध या अस्वीकार करने में असमर्थ है।

अध्ययन के मुताबिक इनमें 68 प्रतिशत मामलों में गैर-विरोध और गैर-अस्वीकार करने वाले साथी की इच्छा से प्रेरित थे। 21 प्रतिशत अपने खोए हुए साथी के साथ पुनर्मिलन की इच्छा से प्रेरित थे। 15 प्रतिशत लोग मृत लोगों के प्रति यौन आकर्षण से प्रेरित थे। 15 प्रतिशत आराम की इच्छा या अलगाव की भावनाओं को दूर करने के लिए प्रेरित थे और 12 प्रतिशत एक लाश पर अपनी ताकत दिखाकर अपने आत्मसम्मान को मापने की इच्छा से प्रेरित थे।

10 लाख लोगों में एक को होता है नेक्रोफिलिया?

सबसे बड़ी बात यह है कि इस बीमारी से संबंधित अभी तक पीड़ितों का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, रोसमैन और रेसनिक के रिसर्च के आधार पर एक अनुमान के मुताबिक प्रति 10 लाख लोगों में से कोई एक इस बीमारी से पीड़ित होता है। इसके मुताबिक नेक्रोफिलिया से पीड़ित लोगों में 92 प्रतिशत पुरुष और 8 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।

नेक्रोफिलिया पर भारत का कानून

नेक्रोफिलिया एक अपराध तो है लेकिन भारतीय दंड संहिता में इसकी सजा नहीं दी गयी है। कुछ लीगल वेबसाइट्स के मुताबिक अभी तक नेक्रोफिलिया को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। हालांकि, कुछ केस में आईपीसी सेक्शन 297 लगाया जाता है लेकिन इनमें भी नेक्रोफिलिया पर साफतौर से कुछ नहीं कहा गया है।

आईपीसी सेक्शन 297 के अनुसार अगर कोई किसी इंसान की भावना को ठेस पहुंचाने की मंशा से धर्म का अपमान करने के लिए शमशान या कब्रिस्तान (लाश की खुदाई या लाश से गलत हरकत करना) में घुसता है, जबकि उस संबंधित शख्स को पता है कि उसके कार्य से किसी को ठेस पहुंचेगी तो इसे अपराध माना जाएगा।

किन देशों में है इससे संबंधित कानून?

यूनाइटेड किंगडम में यौन अपराध अधिनियम, 2003 की धारा 70 के तहत जानबूझकर या लापरवाही से शव के साथ संबंध बनाने पर आरोपी को 6 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, कनाडा की आपराधिक संहिता, 1985 की धारा 182 नेक्रोफिलिया को दंडनीय बनाती है। गौरतलब है कि कनाडा में तो नेक्रोफीलिया शब्द का यूज किए बिना यह मेंशन है कि मृत शरीर की गरिमा व अधिकार को नुकसान पहुंचाने पर ज्यादा से ज्यादा 5 साल की सजा का हवाला दिया जा सकता है।

दक्षिण अफ्रीका में आपराधिक कानून (यौन अपराध और संबंधित मामले) संशोधन अधिनियम, 2007 की धारा 14 नेक्रोफिलिया पर रोक लगाती है। यहां इसे यौन अपराध से जुड़ा मामला माना जाता है। इसके अलावा, न्यूजीलैंड, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस कानून को लेकर अधिकतम 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

नेक्रोफिलिया से संबंधित जघन्य मामला

नेक्रोफिलिया का पहला मामला साल 1948 में कैलिफोर्निया में मिला था। इसका मरीज करीब 50 महिलाओं की हत्या करके उनके शव के साथ यौन संबंध बना चुका था। जबकि सबसे जघन्य मामला ब्रिटेन में साल 1987 का है। जहां केंट एंड सेसेक्स हॉस्पिटल में इलेक्ट्रीशियन के पद पर कार्यरत 67 साल के डेविड ने दो महिलाओं की हत्या कर उनके शवों के साथ बलात्कार किया था। पकड़े जाने के बाद उसने जो कहानी बताई, उसे सुनकर सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, पूरी दुनिया ही हिल गई थी। डेविड ने स्वीकारा कि अस्पताल में 99 मृत महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाये थे। इतना ही नहीं, उसके घर की तलाशी ली गई तो पुलिस को लाशों के साथ सेक्सुअल एब्यूज की लाखों तस्वीरें मिली थीं।

भारत में नेक्रोफिलिया के मामले

भारत में साल 2006 के निठारी कांड में भी निक्रोफिलिया का अपराध सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 के डी-5 कोठी में रहने वाले मनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली ने 19 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर शवों के साथ बलात्कार करने की बात स्वीकार की थी। अक्टूबर 2015 में गाजियाबाद में तीन लोगों ने 26 साल की महिला की कब्र खोदकर लाश निकाली और उसका सामूहिक बलात्कार किया था। साल 2019 में हापुड़ जिले के हाफिजपुर थाना के गिरधरपुर-तुमरैल गांव की एक 50 वर्षीय महिला का शव दो दिन बाद कब्र से गायब हो गया। शव की तलाश की गयी तो वह कुछ दूर गन्ने के खेत में मिला।

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