National Security Act: क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, कैसे फंसे इसमें यूट्यूबर मनीष कश्यप

मनीष कश्यप पर तमिलनाडु में 6 मुकदमे और बिहार में 3 मुकदमे दर्ज किये गये हैं। जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून अलग से लगाया गया है। यूट्यूब के माध्यम से पत्रकारिता करने वाले किसी व्यक्ति पर एनएसए लगाने का यह पहला मामला है।

What is National Security Act in which YouTuber Manish Kashyap got stuck

National Security Act: यूट्यूबर मनीष कश्यप के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और बिहार सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने 21 अप्रैल 2023 को मनीष कश्यप की एनएसए के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों को नोटिस जारी किया है।

अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि आखिर यह एनएसए कानून है क्या, जिसे लेकर बिहार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। इस कानून में किस तरह की सजा का प्रावधान है? वहीं किन परिस्थियों में यह लगाया जाता है?

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    राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) क्या है?

    नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) या राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) एक ऐसा कानून है जिसके तहत बड़े खतरे के चलते किसी अपराधी को हिरासत में लिया जा सकता है। अगर प्रशासन को लगता है कि अमुक अपराधी की वजह से देश की सुरक्षा और सद्भावना को खतरा हो सकता है, तो ऐसा होने से पहले ही उसे एनएसए के तहत हिरासत में लिया जा सकता है।

    बता दें कि इस कानून को 1980 में देश की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार को अधिक अधिकार देने के मकसद से बनाया गया था। इस कानून का इस्तेमाल पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी या राज्य सरकारें कर सकती हैं।

    एनएसए में सजा का प्रावधान?

    राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अनुसार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को 3 महीनों के लिए बिना जमानत के हिरासत में रखा जा सकता है। वहीं इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। इस कानून में सबसे बड़ी बात यह है कि संबंधित व्यक्ति को हिरासत में रखने के लिए आरोप तय करने की भी जरूरत नहीं होती और समयावधि को 12 महीनों तक किया जा सकता है।

    वैसे हिरासत में लिया गया अपराधी सिर्फ हाईकोर्ट की एडवाइजरी बोर्ड के सामने ही अपील कर सकता है, उसे वकील भी नहीं मिलता। जब मामला कोर्ट में जाता है तब सरकारी वकील कोर्ट को मामले की जानकारी देते हैं। वहीं गिरफ्तारी के कारणों पर राज्य सरकार को यह बताना पड़ता है कि इस व्यक्ति को जेल में रखा गया तो उसे किस आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का इतिहास क्या है?

    इस कानून की जड़ें ब्रिटिश काल से मिलती है, तब इस कानून को अंग्रेजों द्वारा भारतीय क्रांतिकारियों से अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए लागू किया गया था। साल 1881 में ब्रिटिशर्स ने बंगाल रेगुलेशन थर्ड नाम का एक कानून बनाया था, जिसमें घटना होने से पहले ही गिरफ्तारी की व्यवस्था थी। उसी के बाद 1919 में रॉलेट एक्ट लाया गया, जिसमें ट्रायल की व्यवस्था तक नहीं थी। इस एक्ट के तहत अंग्रेज अधिकारियों को बिना मुकदमे के राजद्रोह के संदेह वाले किसी भी व्यक्ति को कैद करने की अनुमति मिल गई थी। इस अधिनियम की वजह से पंजाब सहित पूरे भारत में विरोध शुरू हुआ।

    रॉलेट एक्ट के कारण हुआ जलियांवाला बाग हत्याकांड?

    इसी दौरान पंजाब प्रांत के अमृतसर शहर में 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग में दो प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी नेताओं की रिहाई की मांग करने के लिए और रॉलेट एक्ट के खिलाफ शांति से विरोध किया जा रहा था। तभी जनरल रेजिनल्ड डायर ने उस भीड़ पर गोलियां चलवा दी, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गये थे। लेकिन, आजादी के बाद इस कानून के मायने बदल गये। आजाद भारत में इसी कानून की तर्ज पर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार साल 1950 में प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट लेकर आई।

    पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने इस एक्ट में किया बदलाव

    प्रिवेंटिव डिटेंशन एक्ट के तहत बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के घर में नजरबंद किया जा सकता है। यह अपराधी को दंडित करने के लिए नहीं बल्कि उन्हें अपराध करने से रोकने के लिए एक प्रक्रिया मात्र थी। जब प्रशासन को यह लगे कि कोई व्यक्ति अपराध करने जा रहा है, जो राज्य की सुरक्षा को खतरा है, तो प्रशासन द्वारा उसे बिना जांच के सीमित अवधि के लिए बंदी बनाया जा सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति को इस कानून के तहत 3 महीने से अधिक समय तक बंदी नहीं बनाया जा सकता है।

    इंदिरा गांधी लेकर आईं मीसा कानून

    इसके बाद 31 दिसंबर, 1969 को इस कानून की अवधि खत्म हो गई। तब 1971 में तत्कालीन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट यानी मीसा को लाया आया। जिसका 1975 में इमरजेंसी के दौरान राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। वहीं इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी की सरकार चली गईं और 1977 में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार, जनता पार्टी की सरकार केंद्र में आई। उस दौरान मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और उन्होंने इस मीसा कानून को ही खत्म कर दिया था।

    इसके बाद एक बार फिर से 1980 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं और उनकी सरकार ने 23 सितंबर 1980 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को संसद से पारित कर 27 दिसंबर 1980 को यह कानून बना दिया गया।

    मनीष कश्यप पर क्यों लगा एनएसए?

    अब सवाल यह है कि इस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून मामले में मनीष कश्यप कैसे फंसे? यह सवाल 21 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने भी पूछा कि मनीष कश्यप के खिलाफ रासुका या एनएसए क्यों लगाया गया है? जिस पर तमिलनाडु सरकार की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि मनीष कश्यप के यूट्यूब पर 60 लाख से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह एक राजनेता है और वह चुनाव लड़ चुका है। वह कोई पत्रकार नहीं है। वह फर्जी वीडियो बनाते हुए कहता है कि तमिलनाडु में रह रहे बिहार के लोगों पर हमला किया गया है। जोकि सच नहीं है।

    वहीं इस मामले में बिहार सरकार का पक्ष रखने वाले वकील ने कहा कि मनीष कश्यप एक आदतन अपराधी है। उसकी आदतें सिर्फ वीडियो बनाने तक ही सीमित नहीं हैं। उस पर गंभीर मामले हैं, जिसमें धारा 307 का मामला भी है।

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