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Data Protection Bill: क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, क्यों है इसकी जरूरत?

Data Protection Bill: केन्द्र सरकार इस मानसून सत्र में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल को पेश करने वाली है। इस बिल को हाल में केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली है। यह बिल भारतीय यूजर्स के निजी डेटा के गलत उपयोग को रोकने के लिए लाया जा रहा है। साथ ही, इसमें मौजूदा और भविष्य की टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं।

दरअसल, केन्द्र की मोदी सरकार इस मानसून सत्र में टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े दो बिल - डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल और टेलीकॉम बिल पेश कर सकती है। इनमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल काफी महत्वपूर्ण है। 5 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग ने इस बिल को मंजूरी दी है। केन्द्रीय टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही इन दोनों बिलों को मानसून सत्र में पेश किए जाने की बात कही थी। इस बिल को डिजिटल इंडिया बिल भी कहा जा रहा है। इस बिल में मौजूदा परिवेश और भविष्य की टेक्नोलॉजी को देखते हुए नियम बनाए गए हैं, ताकि टेक्नोलॉजी की क्रांति से किसी भी तरह का नुकसान आम नागरिक को न हो सके।

What is Digital Personal Data Protection Bill, why is it needed?

क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल?

मोदी सरकार का यह बिल पुराने आईटी एक्ट 2000 की जगह लेगा। पुराने कानून में टेक्नोलॉजी क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य के परिवेश को देखते हुए कई खामियां है। जबकि नये बिल का मुख्य मकसद टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में यूजर्स के निजी डेटा और उनकी डिजिटल आइडेंटिटी की रक्षा करना है। यह बिल गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर समेत सभी टेक कंपनियों और सरकारी संस्थानों द्वारा भारतीय यूजर्स के डेटा प्रोसेसिंग को पारदर्शी बनाने का काम करेगा। इस बिल में किसी भी संस्थान द्वारा यूजर्स के डेटा को स्टोर करने और उसके इस्तेमाल करने के लिए उनकी अनुमति अनिवार्य करेगा। इस बिल के लागू होने के बाद कोई भी संस्थान और कंपनी यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं कर पाएगी।

इन दिनों यूजर्स डेटा की चोरी, ऑनलाइन फ्रॉड जैसी घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। डिजिटल एक्सेस होने के बाद से यूजर्स डेटा के दुरूपयोग होने की संभावनाएं बढ़ी हैं। आप फूड ऑर्डर करने से लेकर रेलवे टिकट बुक कराने तक में अपनी निजी जानकारियां दर्ज करते हैं। आपके नाम, पता, फोन नंबर, जन्म तिथि के अलावा आपकी बैंक डिटेल्स तक सर्विस प्रोवाइडर्स यानी सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों के पास रहती हैं। कई कंपनियां आपके निजी डेटा का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करती हैं। कंपनियां यूजर डेटा का इस्तेमाल टारगेटेड ऐड चलाने के लिए करती हैं।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

किसी भी डेटा चोरी की स्थिति में पिछले दो दशक से पुराने कानून यानी आईटी एक्ट 2000 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके नियम उस समय के दौर की टेक्नोलॉजी के हिसाब से बनाए गये थे। उस समय सोशल मीडिया कंपनियां और स्मार्टफोन नहीं थे, जिसकी वजह से यूजर्स के निजी डेटा के दुरूपयोग का खतरा नहीं था। मौजूदा और भविष्य की टेक्नोलॉजी को देखते हुए पुराने कानून में यूजर्स के निजी डेटा को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं किया जा सकता है। भारत में काम करने वाली कई टेक्नोलॉजी कंपनियां, सर्विस प्रोवाइडर्स यूजर्स के डेटा को भारत से बाहर स्टोर करती हैं और उसका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करती हैं।

उदाहरण के तौर पर आप अगर फेसबुक, गूगल सर्च या फिर यूट्यूब में कुछ भी सर्च करते हैं तो आपको कुछ सेकेंड्स के भीतर ही आपके द्वारा सर्च किए गए प्रोडक्ट के विज्ञापन दिखने लगते हैं। ऐसा इसलिए हो पाता है कि ये कंपनियां आपके डेटा को ऐड दिखाने के लिए यूज करती है। पिछले तीन साल में भारत सरकार ने यूजर्स के निजी डेटा की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैकड़ों ऐप्स पर बैन लगाया है, क्योंकि इन ऐप्स के सर्वर भारत में नहीं थे। इनमें से ज्यादातर ऐप्स बनाने वाली कंपनियों का मुख्यालय चीन में था। ऐसे में भारतीय यूजर्स के निजी डेटा के दुरूपयोग होने की संभावना थी। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार यह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल ला रही है।

पहली बार कब हुआ पेश?

मोदी सरकार के नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में भारत में होने वाले यूजर डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी का पूरा ध्यान रखा गया है। इस बिल को सबसे पहले 11 दिसंबर 2019 को संसद में पेश किया गया था। इस बिल में निजी डेटा शेयरिंग, उसकी सुरक्षा और स्टोरेज के बारे में कंपनियों को पारदर्शी बनने का प्रावधान है। इसके अलावा प्राइवेट कंपनियों के साथ-साथ सरकार को भी यूजर के निजी डेटा की पूरी तरह से रक्षा करने के लिए कहा जाएगा।

इस डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल का सफर साल 2018 में शुरू हुआ था। इस बिल को जस्टिस बी एन श्रीकृष्णा की अगुवाई वाली एक स्पेशल एक्सपर्ट कमिटी ने ड्राफ्ट किया था। केन्द्र सरकार ने इसे 2019 में संसद में पेश किया था। बाद में इस बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी ने 2021 में रिव्यू किया और सरकार को इसका रिवाइज्ड वर्जन लाने के लिए कहा था, जिसे अब दोबारा मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

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