Black Fungus: क्या है ब्लैक फंगस संक्रमण, कमजोर इम्यून सिस्टम वालों के लिए खतरे की घंटी
कोरोना वायरस महामारी के समय आपने भी ‘ब्लैक फंगस’ नाम की एक बीमारी का नाम सुना होगा। हालांकि अभी भी इस फंगस का प्रकोप खत्म नहीं हुआ है।

बीते दिनों टेलीविजन अभिनेता फहमान खान ने बताया कि उनके भाई और अभिनेता फराज खान का निधन ब्लैक फंगस के कारण हुआ था। फराज खान का निधन 2020 में हुआ था। फहमान ने एक इंटरव्यू में बताया कि अपने आखिरी दिनों में वह अपना और उनका दोनों का नाम तक भूल गए थे।
क्या है ब्लैक फंगस?
ब्लैक फंगस को म्यूकोर्मिकोसिस के नाम से भी जाना जाता है। एक गंभीर फंगल इंफेक्शन है। यह म्यूकोर्मिसेट्स नामक फंगी के समूह के कारण होता है। ब्लैक फंगस साइनस, फेफड़े, शरीर की त्वचा और दिमाग सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता हैं। आमतौर पर यह फंगस पर्यावरण में मौजूद होता है और ज्यादातर बासी खाने या मिट्टी में पाया जाता है। जब भी कोई व्यक्ति सांस लेता है तब यह फंगस सांस के साथ इंसान के शरीर में घुस जाता है। इसके बाद जिस व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है उसको ये फंगस नुकसान पहुंचा सकते हैं।
क्या होते है ब्लैक फंगस के लक्षण?
ब्लैक फंगस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि संक्रमण शरीर में कहां हुआ है? यदि ब्लैक फंगस साइनस और मस्तिष्क पर असर करता है तो इससे चेहरे पर सूजन, सिर दर्द, नाक बंद, नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव, बुखार जैसे लक्षण दिख सकते हैं। यदि यह फेफड़ों पर असर करता है तो इसमें बुखार, खांसी, छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। यदि यह शरीर की त्वचा पर हमला करता है तो इसमें त्वचा पर छाले, संक्रमित क्षेत्र काला पड़ना, घाव के आसपास दर्द, गर्मी, अत्यधिक सूजन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
किन लोगों को ब्लैक फंगस से खतरा
ब्लैक फंगस उन लोगों को मुख्य रूप से प्रभावित करता है जिनका इम्यून सिस्टम बहुत ज्यादा कमजोर होता है। भले ही वो एचआईवी/एड्स, वायरल रोग, आदि के कारण हो या कोई और रोग के कारण। यह मधुमेह के रोगियों को भी बहुत नुकसान पहुंचाता है। साथ ही उन लोगों के लिए भी खतरा बन जाता है जिनका अंग प्रत्यारोपण हुआ होता है। ब्लैक फंगस उन लोगों को भी नुकसान पहुंचाता है जिन्हें फेफड़ों से संबंधित समस्या होती है या जिन लोगों को मिट्टी या धूल के संपर्क में आने से त्वचा पर कोई चोट लगी होती है, जैसे खरोंच या जलन।
क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट पर ब्लैक फंगस सम्बन्धी जानकारियां उपलब्ध है। जिसमें ब्लैक फंगस, उसके खतरों, कैसे फैलता है, उसके लक्षण, उसके इलाज, उससे बचाव, आदि के बारे में पूरी जानकारी ग्राफिक्स के साथ प्रदान की गयी है। जबकि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने भी ब्लैक फंगस के बारे में दिशानिर्देश जारी किए है। जनवरी 2018 में संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) में भारत समेत 33 देशों ने ब्लैक फंगस प्रबंधन पर रिपोर्ट्स को परखा और यूरोपीय देशों की 'वन वर्ल्ड वन गाइडलाइन' पहल के रूप में पूरी दुनिया के देशों के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे।
भारत में ब्लैक फंगस
भारत जब कोरोना वायरस की पहली, दूसरी ओर तीसरी लहर का मुकाबला कर रहा था तब मुख्य रूप से कोविड-19 रोगियों में ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि आई थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने ब्लैक फंगस रोकथाम के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें उन्होंने एंटिफंगल दवाओं के उपयोग, एंटीबायोटिक दवाओं, एंटीफंगल दवाओं के अनावश्यक उपयोग की रोकथाम की बात कही थी। भारत में ब्लैक फंगस का उपचार में 21 दिनों के लिए इंजेक्शन शामिल होता है। इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹9,000 प्रति दिन है।
देश में ब्लैक फंगस से कितनी मौतें?
भारत में 28 मई 2021 तक ब्लैक फंगस के कम से कम 14,872 मामले दर्ज किए गए थे। 28 जून तक भारत में ब्लैक फंगस के कारण 3,129 लोगों की मौत हुई थी। 20 जुलाई तक भारत में ब्लैक फंगस के कारण 4,252 लोगों की मौतें हुई थी। जबकि 21 जुलाई 2021 के दिन तक देश में ब्लैक फंगस इंफेक्शन के 45,374 मामले सामने आए थे। यह सभी मामले कोरोना की लहर के दौरान ज्यादा देखने को मिले।
विशेषज्ञों की ब्लैक फंगस पर राय
देश और दुनिया के कई विशेषज्ञों ने ब्लैक फंगस पर अपनी टिप्पणियां दी है। डॉ. ली, जो अमेरिकी त्वचा विशेषज्ञ हैं, उनका कहना है कि भारत में ब्लैक फंगस के प्रकोप का प्रमुख कारण मधुमेह (डायबटीज) रहा है। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के समय एम्स के तत्कालीन निदेशक रणदीप गुलेरिया और एम्स के डॉक्टर पीयूष रंजन ने कहा कि इस फंगल इंफेक्शन का जल्द पता लगाना महत्वपूर्ण है जिससे कई जानें बच सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि गंदगी वाले स्थानों पर ब्लैक फंगस संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल के अनुसार कोविड-19 के मरीज जो डायबिटिक हैं उनमें फंगल इंफेक्शन आम है और यह कोई बड़ी समस्या नहीं है।












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