Batla House Encounter: क्या है बाटला हाउस एनकाउंटर? जिसे लेकर PM मोदी ने कहा कि सोनिया गाँधी रोई थीं
देश में अनेक स्थानों पर बम धमाके के साजिशकर्ता इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी दिल्ली के बाटला हाउस इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में छुप कर रह रहे थे।
Batla House encounter, इंटेलिजेंस की सूचना के आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 19 सितंबर 2008 के दिन वहां धावा बोला जिसमें दो आतंकी मारे गए, जबकि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा वीरगति को प्राप्त हुए। "बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान कांग्रेस के नेता आतंकियों के समर्थन में रोए थे। दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकार आतंकियों को छुड़ाने में अपनी पूरी ताकत लगा देती थी। कांग्रेस सरकार आतंकियों को नहीं, मोदी को टारगेट करने में लगी रही।" ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 27 नवंबर को सूरत की एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा।

रैली में क्या बोले पीएम मोदी
गुजरात के सूरत में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सूरत और अहमदाबाद में हुए विस्फोटों को याद किया। उन्होंने इन घटनाओं के लिए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तब कांग्रेस केंद्र में थी, हमने उनसे आतंकवाद को निशाना बनाने को कहा लेकिन उन्होंने मोदी को निशाना बनाया।
मोदी ने कहा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद कांग्रेस नेताओं ने आतंकवादियों के समर्थन में आंसू बहाए। "सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, इस तरह की कई पार्टियां आईं, जो शॉर्टकट और तुष्टिकरण की राजनीति में यकीन करती हैं। ऐसी पार्टियों से गुजरात और देश को सतर्क रहने की जरूरत है। गुजरात के 25 साल तक के युवाओं ने अभी तक कर्फ्यू कैसा होता है, ये नहीं देखा है। मुझे उन्हें बम धमाकों से बचाना है।" पीएम मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार में आतंकवाद चरम पर था। कांग्रेस आतंकियों को 'वोट बैंक' की तरह देखती है।
बीजेपी-कांग्रेस में जुबानी जंग हुई शुरू
पीएम मोदी के इस बयान के बाद से राजनीति गलियारे में एक बार फिर बाटला हाउस एनकाउंटर का मामला सुर्खियों में आ गया है। इसके जवाब में अहमदाबाद की एक रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि "वे हर वक्त अपनी बात करते हैं। आप किसी को मत देखो मोदी को देखकर वोट दो। भाई तुम्हारी सूरत कितनी बार देखना। कॉर्पोरेशन में भी तुम्हारी सूरत देखना, एमएलए इलेक्शन में भी तुम्हारी सूरत देखना, एमपी इलेक्शन में भी तुम्हारी सूरत देखना। हर जगह। कितने हैं भाई, क्या आपके रावण के जैसे 100 मुख हैं क्या?"
इस बयान के बाद बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी पलटवार करते हुए कहा कि "पीएम मोदी को रावण कहना घोर अपमान है। पूरे गुजरात का अपमान किया है। यह कथन सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे का ही नहीं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के भी हैं। सोनिया के कहने पर पीएम का अपमान किया गया है। सोनिया ने मोदी को मौत का सौदागर कहा था।"
बाटला हाउस एनकाउंटर की पूरी कहानी
आज से करीब 14 साल पुरानी है बाटला हाउस एनकाउंटर की कहानी। 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में तीन जगह करोलबाग, कनॉट प्लेस और ग्रेटर कैलाश में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इन बम धमाकों में करीब 30 लोगों की मौत और 100 से भी ज्यादा लोग घायल हुए थे। जबकि कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा हॉल, इंडिया गेट और संसद मार्ग से चार बमों को फटने से पहले पुलिस ने बरामद करके उन्हें डिफ्यूज कर दिया था। इस आतंकी हमले के बाद सारी एजेंसियां चौंकन्ना हो गई थी।
साल 2005 में भी कई आतंकी हमले होने के बाद से ही पुलिस ने आतंकियों को पकड़ने के प्रयास शुरू कर दिए थे। इस कड़ी में मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने अफजल उस्मानी को गिरफ्तार किया जिसने गुजरात हमलों में चोरी की कारें मुहैया करवाई थी।
पूछताछ में अफजल ने बताया कि उसमें इंडियन मुजाहिद्दीन का बशीर नाम का एक 'टॉप कमांडर' दिल्ली के जामिया नगर में किसी 'सेफ हाउस' में छुपा हुआ है। इसके बाद गुजरात पुलिस क्राइम ब्रांच को भरूच से एक फोन बरामद हुआ जो कि अहमदाबाद आतंकी हमलों के बाद से एकदम बंद हो गया था। फोन की डिटेल्स निकालने के बाद पता चला कि उस मोबाइल से दिल्ली के जामिया नगर में कई बार फ़ोन किये गए थे।
प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व निदेशक और बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान स्पेशल सेल जॉइंट कमिश्नर करनैल सिंह ने इंडिया टुडे को बताया था कि यह सभी इनपुट्स दिल्ली पुलिस के साथ शेयर किये गए थे। दिल्ली पुलिस ने संदिग्ध आतंकियों में से एक आतिफ अमिन के 9811004309 मोबाइल नंबर को ट्रैस करना शुरू कर दिया। जिससे पुष्टि हो गयी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी दिल्ली के जामिया नगर की एक चार मंजिला इमारत में फ़्लैट संख्या 108, L-18, बाटला हाउस में किराए पर रह रहे थे। यह दिल्ली का भीड़भाड़ वाला एक मुस्लिम बहुल इलाका है।
आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा और DCP संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में सात सदस्यों की टीम का गठन किया गया। उन्होंने वहां छापा मारने के लिए 19 सितंबर, 2008 का दिन तय किया था। दोनों तरफ से चली गोलीबारी में दो आतंकी मोहम्मद साजिद और आतिफ अमिन मारा गया। मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि शहजाद अहमद और जुनैद नाम के दो आतंकी भागने में सफल रहे।
हालांकि, शहजाद को साल 2010 और जुनैद को साल 2018 में उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया गया था। बाटला हाउस के इस फ्लैट में यासीन भटकल भी रह चुका था। दुर्भाग्य से इस एनकाउंटर में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा आतंकियों की गोली से घायल हो गए थे जो बाद में इलाज के दौरान वीरगति प्राप्त हो गए।
क्या वास्तव में सोनिया गाँधी, एनकाउंटरमें मारे गए आतंकियों के लिए रोयी थी?
साल 2008 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी और उनके नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने तो कई बार ऑन-रिकॉर्ड इस एनकाउंटर को फर्जी बताया है।
2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने यह बोलकर सबको सन्न कर दिया था कि बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए लड़कों की तस्वीरें देखकर सोनिया गांधी भावुक हो गई थीं, उनकी आंखों में आंसू थे। सलमान खुर्शीद के इस बयान पर भारी विवाद हुआ था। वहीं जब इस बयान के बाद मामला बिगड़ा तो खुर्शीद ने पलटी मार ली और सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने रोने की बात नहीं की थी।
आतंकवाद से जुड़े अन्य मामलों पर भी 'बेतुका' बयान दे चुके हैं कांग्रेस नेता
याकूब मेमन फांसी -
मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन की फांसी दिए जाने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दुख जताया था। थरूर ने ट्वीट कर लिखा था कि मैं इस बात से दुखी हूं कि हमारी सरकार ने एक इंसान को फांसी पर लटका दिया। राज्य प्रायोजित हत्याएं हमें हत्यारों के समकक्ष ला खड़ा करती है।
'26/11 RSS की साजिश' - 26/11 मुंबई हमलें में पाकिस्तान का हाथ था और उसके सबूत केंद्रीय सुरक्षा एजंसियों ने पाकिस्तान सरकार को भी मुहैया करवा दिए थे। बावजूद इसके, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह इस हमले का जिम्मेदार आरएसएस (RSS) को बताने में जुटे थे। दरअसल, पत्रकार अजीज़ बर्नी (Aziz Burney) ने '26/11 RSS की साज़िश' नाम से एक किताब प्रकाशित की थी। जिसका लोकार्पण खुद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने किया, वो भी एक बार नहीं बल्कि दो बार एक दफा दिल्ली और दूसरी बार मुंबई में।
'अफजल गुरु की फांसी एक गलती' -
एक बार संसद भवन के बाहर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि अफजल गुरु के साथ नाइंसाफी हुई थी। वहीं शशि थरूर ने भी कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देना गलत था। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी अपने साथियों को समर्थन देते हुए कहा था कि संसद हमले के दोषी अफजल पर फैसला शायद ठीक नहीं था।












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