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    भारत छोड़ो आंदोलन- जानिए पूरी कहानी

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    नई दिल्ली। 9 अगस्‍त को 'भारत छोड़ो आंदोलन' के 75 साल पूरे होने पर संसद के दोनों सदनों में एक दिन की विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा, इस दिन दोनों सदनों में आंदोलन के बहाने आजादी की लड़ाई पर दिन भर चर्चा होगी, इस चर्चा में पीएम मोदी समेत पक्ष-विपक्ष समेत सभी नेता शामिल होंगे। इस दिन संसद भवन को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तर्ज पर सजाया जाएगा।

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    लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर 'भारत छोड़ो आंदोलन' था क्या, जिसके वर्षगांठ पर सरकार की ओर से इतनी तैयारियां हो रही हैं, तो चलिए जानते हैं देश के इस क्रांतिकारी आंदोलन के बारे में विस्तार से...

     8 अगस्त 1942

    8 अगस्त 1942

    'भारत छोड़ो आंदोलन' द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 8 अगस्त 1942 को आरम्भ किया गया था, जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना था। ये आंदोलन देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ओर से चलाया गया था। बापू ने इस आंदोलन की शुरूआत अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुम्बई अधिवेशन से की थी।

    करो या मरो

    करो या मरो

    गांधी और उनके समर्थकों ने स्पष्ट कर दिया कि वह युद्ध के प्रयासों का समर्थन तब तक नहीं देंगे जब तक कि भारत को आजादी न दे दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार यह आंदोलन बंद नहीं होगा। उन्होंने सभी कांग्रेसियों और भारतीयों को अहिंसा के साथ 'करो या मरो' के जरिए अंंतिम आजादी के लिए अनुशासन बनाए रखने को कहा।

    गांधी जी को अहमदनगर किले में नजरबंद कर दिया

    गांधी जी को अहमदनगर किले में नजरबंद कर दिया

    लेकिन जैसे ही इस आंदोलन की शुरूआत हुई, 9 अगस्त 1942 को दिन निकलने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे और कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया गया था, यही नहीं अंग्रेजों ने गांधी जी को अहमदनगर किले में नजरबंद कर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस जनान्दोलन में 940 लोग मारे गए थे और 1630 घायल हुए थे जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारी दी थी।

    लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली ...

    लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली ...

    लेकिन लोग ब्रिटिश शासन के प्रतीकों के खिलाफ प्रदर्शन करने सड़कों पर निकल पड़े और उन्‍होंने सरकारी इमारतों पर कांग्रेस के झंडे फहराने शुरू कर दिये। लोगों ने गिरफ्तारियां देना और सामान्‍य सरकारी कामकाज में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करना शुरू कर दिया। विद्यार्थी और कामगार हड़ताल पर चले गये। बंगाल के किसानों ने करों में बढ़ोतरी के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। सरकारी कर्मचारियों ने भी काम करना बंद कर दिया, यह एक ऐतिहासिक क्षण था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ही डॉ. राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली जैसे नेता उभर कर सामने आये।

    1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया

    1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया

    भारत छोड़ो आंदोलन को अपने उद्देश्य में आशिंक सफलता ही मिली थी लेकिन इस आंदोलन ने 1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया। युद्ध के अंत में, ब्रिटिश सरकार ने संकेत दे दिया था कि संत्ता का हस्तांतरण कर उसे भारतीयों के हाथ में सौंप दिया जाएगा। इस समय गांधी जी ने आंदोलन को बंद कर दिया जिससे कांग्रेसी नेताओं सहित लगभग 100,000 राजनैतिक बंदियों को रिहा कर दिया गया।

    अगस्त क्रांति

    अगस्त क्रांति

    सन् 1857 के पश्चात देश की आजादी के लिए चलाए जाने वाले सभी आंदोलनों में सन् 1942 का 'भारत छोड़ो आंदेालन' सबसे विशाल और सबसे तीव्र आंदोलन साबित हुआ। जिसके कारण भारत में ब्रिटिश राज की नींव पूरी तरह से हिल गई थी। आंदोलन का ऐलान करते वक़्त गांधी जी ने कहा था मैंने कांग्रेस को बाजी पर लगा दिया। यह जो लड़ाई छिड़ रही है वह एक सामूहिक लड़ाई है। सन् 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन भारत के इतिहास में 'अगस्त क्रांति' के नाम से भी जाना जाता रहा।

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    English summary
    The Quit India Movement or the India August Movement, was a movement launched at the Bombay session of the All-India Congress Committee by Mahatma Gandhi on 8 August 1942, during World War II, demanding an end to British Rule of India.
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