Tomato Price: महीनेभर पहले एक रुपये किलो बिका टमाटर, अब भाव आसमान पर
Tomato Price: उपभोक्ता मामलों के विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 27 जून को देशभर में टमाटर की औसत कीमत 46 रुपये प्रति किलो थी। वहीं बाजार में टमाटर अधिकतम 122 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने मीडिया से कहा कि टमाटर जल्द खराब होने वाली सब्जी की कैटेगिरी में आता है। जिन इलाकों में अचानक बारिश होती है, वहां ट्रांसपोर्टेशन प्रभावित हुआ है। यह एक अस्थाई मुद्दा है और कीमतें जल्द ही कम हो जाएंगी। ऐसा इस दौरान हर साल होता है।
भारत में टमाटर का उत्पादन और निर्यात
भारत में टमाटर की लगभग 1000 किस्में हैं। इसका पुराना वानस्पतिक नाम 'लाइकोपोर्सिकान एस्कुलेंटम मिल' है। वर्तमान समय में इसे 'सोलेनम लाइको पोर्सिकान' कहते हैं। बता दें कि चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक देश है। वर्तमान में कुल वैश्विक टमाटर उत्पादन में भारत का 11% हिस्सा है।

स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल तकरीबन 20 मिलियन मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है। आंकड़े देखें तो 2018 में 19.76 मिलियन मीट्रिक टन, 2019 में 19.01 मिलियन मीट्रिक टन, 2020 में 20.55 मिलियन मीट्रिक टन, 2021 में 21.18 मिलियन मीट्रिक टन और 2022 में 20.34 मिलियन मीट्रिक टन का टमाटर पैदा हुआ।
साल 2022 में भारत से निर्यात होने वाले फ्रोजन टमाटरों की कुल मात्रा लगभग 89 हजार मीट्रिक टन थी। हम दुनिया में टमाटर के तीसरे सबसे बड़े निर्यातक देश हैं। जबकि पहले दो देशों में इटली और तुर्किये शामिल हैं। 'वोल्जा ग्रो ग्लोबल' के मुताबिक भारत से टमाटर का अधिकांश निर्यात मालदीव, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका को होता है।
सड़कों पर फेंका गया टमाटर
अप्रैल-मई के महीने में हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के किसान टमाटर की सही कीमत न मिलने पर उन्हें सड़कों पर फेंक रहे थे। 19 मई 2023 को नासिक की कृषि उपज मंडी में टमाटर किसानों में खासी नाराजगी देखने को मिली थी। तब मंडी में टमाटर की बोली एक रुपये किलो लगी थी। जिसके विरोध में किसानों ने अपना सारा टमाटर सड़क पर फेंककर विरोध दर्ज कराया था।
ऐसा ही कुछ अप्रैल 2023 में हरियाणा के चरखी दादरी क्षेत्र में देखने को मिला। दरअसल, जब किसान टमाटर लेकर मंडी में बेचने के लिए पहुंचे तो उनके माल की बोली 3 से 4 रुपये प्रति किलो लगी। इतने कम दाम सुनकर किसान भड़क गये और ट्रांसपोर्ट का भाड़ा भी न निकलता देख, उन्होंने सड़कों पर ही टमाटर फेंक दिया।
सब्जियों को स्टोर और प्रोसेस करने की व्यवस्था नहीं
टमाटर की कीमतों में उछाल को केंद्र सरकार ने अस्थायी और मौसम-जनित बताया है, सरकार का कहना है कि जल्द ही इसके दाम नीचे आ जाएंगे। दरअसल, कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से भयंकर गर्मी पड़ रही थी। इसी दौरान उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बिपरजॉय तूफान के कारण भारी बारिश हुई। जिससे टमाटर की फसल को भारी नुकसान हुआ। टमाटर ही नहीं मंडियों में अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। अब सवाल ये है कि प्राकृतिक आपदाएं आती रहेंगी तो उपाय क्या है?
दरअसल देश में किसी भी सब्जी को प्रोसेस करके अगले मौसम तक संभाल कर रखने वाला इंतजाम फिलहाल किसी राज्य में मजबूत नहीं है। भारत में आज भी कृषि उत्पादों का सिर्फ 10% हिस्सा ही प्रोसेस करके सुरक्षित रखने की व्यवस्था उपलब्ध है। देश में फलों का सिर्फ 4.5% और सब्जियों का केवल 2.70%, मछली व समुद्री चीजों का 8%, दूध को 35% और 6% पोलट्री का हिस्सा ही प्रोसेस करके मुश्किल समय के लिए सुरक्षित रखने का इंतजाम देश में हो पाया है। ये देश के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। इन सब वजहों से भी सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं।
स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में देश में सब्जियों का अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 200 मिलियन मीट्रिक टन है। अब आंकड़ों को देखें तो देश में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी क्षमता के दोहन में बड़ी बाधा बन रही है। अब उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं ज्यादातर एक ही वस्तु जैसे आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार, फूल आदि के लिए हैं, जिसके चलते क्षमता का उपयोग कम होता है। टमाटर जैसी सब्जियों के भंडारण की समस्या भी इसके दामों को बढ़ाने में एक बड़ी वजह होती है।
कैसे होगा टमाटर के मूल्य पर नियंत्रण
जब अप्रैल-मई के महीने में टमाटर का उत्पादन ज्यादा और सस्ता रहता है। तब देश में टमाटर को प्रोसेस और स्टोर करने की व्यवस्था करनी चाहिए। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों टमाटर को प्रोसेस करके छह सप्ताह तक रखा जाता है। गौरतलब है कि भारत में हर साल इन्ही एक-दो महीनों में टमाटर के भाव आसमान छूने लगते हैं।
13 जुलाई 2023 को 'द गार्जियन' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में टमाटरों की बुआई से कटाई का समय मार्च से नवंबर के बीच का है। इस दौरान यहां ग्रीनहाउस में टमाटर को प्रोसेस करके रखा जाता है। इसके प्रोसेस करने की प्रक्रिया को देखें तो टमाटर की कटाई के बाद उसमें मौजूद गर्मी को निकालने के लिए उसे सबसे पहले ठंडा करते है। ताकि वे जल्दी से न पक जाये। जब उन्हें उन टमाटरों को पकाना होता है तब एक खास तापमान देकर सही तरीके से पकाया जाता है ताकि वे अंदर से न गल जाये। इस तरह से ब्रिटेन के किसान टमाटर को एक से छह सप्ताह तक स्टोर करके रखते हैं। बाकी समय में ब्रिटेन अपने टमाटर का कोटा स्पेन, पुर्तगाल और कैनरी द्वीप समूह से आयात करके पूरा कर लेता है।
अमेरिका में नियंत्रित वातावरण भंडारण यानी कम ऑक्सीजन सहित उच्च नाइट्रोजन में परिपक्व हरे टमाटरों को छह सप्ताह तक रखकर उन्हें स्टोर किया जाता है।
भारत के इन राज्यों में होता है टमाटर का उत्पादन
एबीसीफ्रूट डॉट नेट के मुताबिक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भारत के प्रमुख टमाटर उत्पादक राज्य हैं। इन राज्यों में देश के कुल टमाटर उत्पादन का लगभग 90% हिस्सा होता है।
भारत में 2021-22 में कुल टमाटर उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 14.63% है। आंध्र प्रदेश टमाटर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल उत्पादन में 10.92% का योगदान देता है। कर्नाटक तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत में कुल टमाटर उत्पादन में 10.23% का योगदान देता है, इसके बाद तमिलनाडु, ओडिसा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और बिहार का स्थान आता है।
भारत में टमाटर की कटाई और खेती का मौसम
दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में रोपाई और कटाई चार चरणों में की जाती है। प्रारंभिक रोपाई का मौसम जून-जुलाई में शुरू होता है और कटाई अगस्त से सितंबर तक की जाती है। दूसरी रोपाई अक्टूबर से नवंबर तक की जाती है और कटाई दिसंबर से फरवरी तक की जाती है। तीसरी रोपाई का मौसम जनवरी से फरवरी तक होता है और कटाई मार्च से जून तक होती है। चौथा रोपाई का मौसम अक्टूबर से नवंबर तक होता है और कटाई जनवरी से मार्च तक होती है। उत्तरी, पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए रोपाई और कटाई की अवधि तदनुसार भिन्न होती है।












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