Last Election: कई बड़े नेताओं के लिए हो सकता है यह लोकसभा का आखिरी चुनाव
Last Election: इट्स नॉट ओवर अनटिल इट्स ओवर... राजनीति के इस सूत्र वाक्य का मतलब है कि पूरी तरह खत्म होने से पहले कुछ भी खत्म नहीं होता।
लोकसभा चुनाव 2024 को अपना आखिरी लोकसभा चुनाव बताने और बाद में इस पर सफाई देने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा था कि राजनीति में 'कभी नहीं' शब्द कभी नहीं बोला जाता। इंडी अलायंस के दूसरे दलों ने भी इस लाइन पर बोलना जारी रखा है। सीपीआई (एम) के नेता एम बालाकृष्णन ने तमिलनाडु के मदुरई में इसी बात को दोहराया।

क्या लोकसभा 2024 का चुनाव देश के कई बड़े नेताओं के लिए लोकसभा का आखिरी चुनाव होगा? बहुत सारे नेताओं की उम्र, सेहत और चुनावी सक्रियता को देखते हुए इस संभावना को मजबूती मिलती है। देश के ऐसे कुछ वरिष्ठ नेताओं के बारे में जानते हैं, जिनके लिए यह आखिरी आम चुनाव हो सकता है। कुछ ऐसे हैं जो आखिरी बार चुनाव लडने की बात कर रहे हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो शायद आखिरी बार किसी लोकसभा चुनाव में प्रचार कर रहे हैं।
शरद पवार
महाराष्ट्र में एनसीपी के संस्थापक शरद पवार के आखिरी चुनाव के मुद्दे पर उनके भतीजे अजित पवार के साथ विवाद ने पहले ही तूल पकड़ लिया था, जब अजित ने शरद पवार के अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश का स्वागत किया था। कैंसर को पछाड़ चुके 83 वर्षीय शरद पवार को लेकर भावनात्मक अपील की जा रही है।
महाराष्ट्र के बारामती इलाके से आने वाले शरद गोविंदराव पवार फिलहाल राज्यसभा के सदस्य है। चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम करने वाले शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी की स्थापना की थी।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, बीसीसीआई और आईसीसी के अध्यक्ष रह चुके शरद पवार देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी नवाजे जा चुके हैं। एनसीपी पर अब अजित पवार का कब्जा हो चुका है और शरद परवार गुट का कांग्रेस में विलय होने की अटकलें लगई जा रही हैं। पवार के स्वास्थ्य को देखते हुए यही लग रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव उनकी लंबी राजनीतिक पारी का आखिरी गेम होगा।
सोनिया गांधी
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी हाल ही में राज्यसभा के लिए चुनी गई हैं। 77 साल से ज्यादा उम्र और स्वास्थ्य की दिक्कतों की वजह से वह अपनी राजनीतिक सक्रियता को वैसे भी काफी कम कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद सोनिया गांधी ने पहले ही इस बार चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।
सोनिया गांधी ने 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली थी। 1998 में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं और लोकसभा चुनाव 1999 में जीतकर विपक्ष की नेता बनीं। 2004 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विदेशी मूल के मुद्दे पर विवाद बढ़ने पर प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया था। इसके बाद वह नेशनल एडवाइजरी कमिटी की अध्यक्ष रहीं। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर सबसे लंबा कार्यकाल पूरा कर चुकीं सोनिया गांधी अब कांग्रेस के लिए संरक्षक की भूमिका में हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे
कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष 82 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे फिलहाल राज्यसभा के सदस्य है। वह पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे और इस बार उनके चुनाव लड़ने की संभावना काफी कम है। उनकी सेहत और सक्रियता फिलहाल ठीक है, लेकिन चुनावी गहमागहमी को देखते हुए उन्होंने भी अपने बेटे प्रियांक खड़गे को कर्नाटक में लॉन्च कर दिया है। प्रियांक कांग्रेस की सिद्दारामैया सरकार में मंत्री हैं। अनुसूचित जाति की राजनीति में बड़े चेहरे के तौर पर मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लिया जाता है। वकालत के पेशे से जुड़े खड़गे मनमोहन सिंह सरकार में रेल और श्रम मंत्री रह चुके हैं।
शशि थरूर
तिरुवनंतपुरम सीट से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिसंबर, 2023 में एक टीवी शो में कहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 उनका आखिरी चुनाव हो सकता है। बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि अगर मैंने तिरुवनंतपुरम से चुनाव लड़ा तो मैं इसे पूरी शिद्दत से अपना आखिरी चुनाव मानकर लड़ूंगा और अपना बेस्ट दूंगा। उन्होंने संकेत दिया है कि वह बाद में युवाओं के लिए जगह खाली कर सकते हैं।
68 साल के कांग्रेस नेता शशि थरूर 2009 से तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से लगातार सांसद हैं। पहली बार में उन्होंने सीपीआई कैंडिडेट पी रामचंद्रन नायर को 95 हजार वोट से हराया था। राजनीति में आने से पहले शशि थरूर संयुक्त राष्ट्र में अधिकारी थे। साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव में आधिकारिक उम्मीदवार भी थे।
कमलनाथ
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके कांग्रेस के दिग्गज कमलनाथ के लिए भी लोकसभा चुनाव 2024 आखिरी चुनाव हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर इसके संकेत दिए हैं। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से नौ बार सांसद रहे कमलनाथ ने एक तरह से अपनी राजनीतिक विरासत बेटे नकुलनाथ को सौंप दी है। हाल ही में कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने को लेकर अटकलों के दौरान उन्होंने साफ कर दिया था कि राजनीति में उनका मन अब नहीं लग रहा।
मायावती
लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए और इंडी गठबंधन दोनों से अलग राह चुनने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए भी कहा जा रहा है कि यह उनका आखिरी सक्रिय चुनाव हो सकता है। देश में अनुसूचित जाति की राजनीति का बड़ा चेहरा बन चुकीं 68 वर्षीय मायावती देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इसके अलावा वह लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की सदस्य भी रह चुकी हैं। बसपा में पहले अपने भाई और फिर भतीजे आकाश आनंद की ताजपोशी के साथ ही उन्होंने अपनी सक्रियता एक दम कम कर दी है।
डॉ हर्षवर्धन
भाजपा के 70 वर्षीय दिग्गज नेता डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिल्ली की चांदनी चौक से टिकट कटने के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है। केंद्र में स्वास्थ्य समेत कई मंत्रालय संभाल चुके हर्षवर्धन एक समय में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बताए जाते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कहने पर राजनीति में उतरने की बात कहते हुए सोशल मीडिया पर हर्षवर्धन ने लिखा कि अब क्लिनिक मेरा इंतजार कर रहा है।
राजनीतिक इतिहास में झांके तो बड़े नेताओं में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा चुनाव 2019 में मैनपुरी में यह दुहाई दी थी कि उनका आखिरी चुनाव है, जरा धूम धड़ाके के साथ जीतने का जश्न मनाने दीजिए। यूपी की मथुरा लोकसभा सीट से 2019 में नामांकन दाखिल करते वक्त ही हेमा मालिनी ने कह दिया था कि यह मेरा अंतिम चुनाव है, हालांकि वह इस बार भी उम्मीदवार बनाई गई हैं।












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