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Charles Sobhraj: चालबाज सीरियल किलर शोभराज का वो किस्सा जो आपने कभी नहीं सुना होगा

चार्ल्स शोभराज का अभी तक का आधा जीवन जेल की सलाखों के पीछे बीता है लेकिन बचा हुआ आधा जीवन रोमांच और ग्लैमर से सराबोर रहा है।

story of The Serpent and Bikini Killer Serial Killer Charles Sobhraj

Charles Sobhraj: डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है... यह फिल्मी डायलॉग सच में चार्ल्स शोभराज पर ही 'शोभा' देता है। वैसे, 2015 में रिलीज हुई 'मैं और चार्ल्स' में लीड रोल निभाने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा ने दावा भी किया था कि यह मशहूर डायलॉग चार्ल्स शोभराज की निजी जिंदगी से लिया गया था। वास्तव में एक वक्त ऐसा भी आया जब चार्ल्स को पकड़ने का इंतजार भारत समेत फ्रांस, नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार, ईरान, ग्रीस और तुर्की समेत करीब नौ देशों की पुलिस कर रही थी। हालांकि, उसने कैदी के रूप में सिर्फ चार ही देशों में जिंदगी का ज्यादातर समय गुजारा है।

'द सर्पेंट' और 'बिकनी किलर' के नाम से मशहूर चार्ल्स शोभराज का जन्म 6 अप्रैल 1944 को वियतनाम के साइगॉन में हुआ, जो उस वक्त फ्रांस के कब्जे में था। मां वियतनाम की और पिता भारतीय थे। हालाँकि, उसके मां-बाप ने शादी नहीं की थी। बाद में, वियतनाम में पोस्टेड एक फ्रांसीसी फौजी से उसकी मां ने शादी की और फिर चार्ल्स को फ्रांस की नागरिकता मिली। चार्ल्स शोभराज के नाम का जिक्र आते ही एक के बाद एक कई किस्सों की पूरी फेहरिस्त सामने आ जाती है। एक-एक किस्से पर बॉलीवुड और हॉलीवुड में तो रोमांच से भरपूर फिल्म बन जाएगी। वैसे, बीबीसी पर उसके जीवन पर आधारित शो "द सर्पेंट" 2021 में दिखाया जा चुका है।

तिहाड़ से फरार होने की फिल्मी दास्तान

दिन था रविवार 16 मार्च 1986। उस दिन चार्ल्स शोभराज ने तिहाड़ के जेल अधिकारियों के पास एक खत भेजा। जिसमें उसने जेल प्रशासन से गुजारिश की कि वो अपने जन्मदिन पर जेल में मिठाई और फल बांटना चाहता है। दरअसल, उसे 10 साल पहले, 1976 में भारत की सैर पर आए एक फ्रांसीसी ग्रुप के चार लोगों और एक इजराइली सैलानी की हत्या के आरोप में भारत की पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में चार्ल्स को पहले सात साल की सजा और फिर दूसरे मामले में पांच साल की सजा देकर कुल 12 साल के लिए तिहाड़ भेज दिया गया था।

अब तिहाड़ जेल में चार्ल्स को जेल काटते हुए तकरीबन 10 साल बीत चुके थे। इस दौरान उसने ऐसा कोई भी काम नहीं किया था, जिससे जेल प्रशासन को उस पर शक हो कि वह भागने का कोई प्लान भी बना सकता है। कई रिपोर्ट में ऐसा बताया गया है कि जब चार्ल्स तिहाड़ में जेल में था तो वह ज्यादातर समय लाइब्रेरी में गुजारता था। साथ ही सभी काम को नियम और कायदे के हिसाब से करता था। ऐसे में जेल प्रशासन ने उसे जेल में मिठाई बांटने की परमिशन दे दी।

लेकिन, चार्ल्स का शैतानी दिमाग कहता कुछ और करता कुछ और था। जन्मदिन को लेकर उसने बाजार से मिठाई और फल मंगवाएं और उसमें नशीली दवा मिला दी। जेल के मौजूद सभी लोगों के बीच उसने यह सभी चीजें बंटवा दी। कुछ समय में कैदी ही नहीं बल्कि पुलिसवाले भी बेहोश हो गये। जब जेल प्रशासन बेहोशी से बाहर आया तब तक शोभराज आराम से जेल के फाटक खोलकर वहां से फरार हो चुका था। बताया जाता है कि जेल से बाहर निकलकर उसने रिक्शा किया और दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा। वहां जाकर उसने गोवा जाने वाली ट्रेन का टिकट लिया और बकायदा ट्रेन से गोवा पहुंच गया।

पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!

तिहाड़ जेल में अब सेंध लग चुकी थी और कई हत्याओं का गुनहगार फरार हो चुका था। जेल अधिकारियों के माथे से पसीना नहीं रुक रहा था और नौकरी जाने की बारी आ चुकी थी। सड़क से लेकर संसद तक इस मामले पर जमकर हंगामा हुआ, सवाल उठे और प्रदर्शन भी हुए। लिहाजा दिल्ली पुलिस अपनी खोई हुई इज्जत पाने के लिए एड़ी-चोटी का लगा रही थी। अब चार्ल्स को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने देश के कई हिस्सों में अपनी टीमों को दौड़ा दिया। कहीं भी चार्ल्स मिल नहीं रहा था। अब सबको लगने लगा था कि वह देश छोड़कर भाग गया है।

मगर तीन हफ्तों के बाद पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली। पूरे देश के बड़े अखबारों में पहले पेज पर खबर छपी कि पकड़ा गया चार्ल्स शोभराज। तब जाकर दिल्ली पुलिस ने भी चैन की सांस ली। लेकिन, अभी पिक्चर बाकी थी!

जब चार्ल्स को गोवा से पकड़कर दिल्ली लाया तो उसे सख्त पहरे के बीच तिहाड़ की कालकोठरी में बंद कर दिया गया। यह कालकोठरी ऐसी थी कि जहां दिन में भी रोशनी नहीं पहुंच पाती थी। इसी बीच दिल्ली पुलिस चार्ल्स के भागने की गुत्थी सुलझाने की कोशिश में जुट गयी। दरअसल, 10 सालों तक शांत रहने वाला चार्ल्स अगले 2 साल बाद रिहा हो जाता। फिर भी वह क्यों भागा? जब जांच में पुलिस को पता चला कि वह वास्तव में क्यों भागा तो सबके होश उड़ गए। सच्चाई तो यह थी कि वह भागा नहीं था बल्कि जेल से भागकर खुद को दोबारा पकड़वाया था।

चार्ल्स शोभराज ने तिहाड़ जेल से भागने और फिर पकड़े जाने का पूरा मास्टरप्लान खुद ही तैयार किया था। असल में उसे सजा-ए-मौत के चंगुल से निकलना था। अब सवाल यह है कि सजा-ए-मौत कैसी? उसे तो 12 साल की जेल काटने की सजा मिली थी।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक चार्ल्स को भारत में 12 साल की सजा मिली थी जिसमें से 10 साल काट चुका था। अब उसकी मात्र दो साल की सजा बाकी थी। मगर उसी दौरान चार्ल्स को इस बात का डर भी था कि भारत में जब उसकी सजा जब पूरी हो जाएगी तो उसे थाईलैंड के हवाले कर दिया जाएगा। क्योंकि 1977 में थाईलैंड की तरफ से चार्ल्स की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया था। जिसकी डेडलाइन 20 साल तक थी।

उसने थाईलैंड में कई सीरियल किलिंग्स (serial killings) की थी, जिसके चलते वहां के कानून के मुताबिक उसे सजा-ए-मौत ही मिलनी तय थी। इसलिए चार्ल्स ने तिहाड़ जेल से भागकर अपने लिए एक मास्टर प्लान बनाया। ताकि भारत के कानून के मुताबिक आसानी से कुछ और साल तिहाड़ में ही काट सके। हुआ भी यही, उसकी सजा तकरीबन 10 साल और बढ़ गई। इस लिहाज से उसे पहले की सजा जोड़कर अगले 11 साल तक तिहाड़ में रहना पड़ा और 1997 में वह अपनी सजा पूरी करने के बाद बाहर निकला। तब तक थाईलैंड के उस वारंट की मियाद भी खत्म हो चुकी थी।

खैर, शोभराज के पापों का हिसाब पूरा नहीं हुआ था। कई साल पेरिस में रईसी जीवन जीते हुए और एक सेलिब्रिटी की तरह इंटरव्यू देते हुए गुजारने के बाद शोभराज किसी नई चाल के तहत नेपाल पहुंच गया। वहां एक पत्रकार ने उसे पहचान लिया और खबर छाप दी। नेपाल पुलिस ने शोभराज को एक कैसिनो से गिरफ्तार कर लिया और नेपाल के कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी। 2003 से 2022 तक 19 वर्ष की सजा काट लेने के बाद 78 वर्षीय चार्ल्स शोभराज को उसकी आयु देखते हुए अब रिहा करने का आदेश नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है।

यह भी पढ़ें: Tablighi Jamaat: क्या है तब्लीगी जमात, आतंकवाद से इसका क्या संबंध है?

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