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Asif Ali Zardari: बदनाम जरदारी दूसरी बार बने पाकिस्तान के राष्ट्रपति

Asif Ali Zardari: पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ अली जरदारी दूसरी बार पाकिस्तान के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। उन्होंने पीटीआई-सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल के समर्थित उम्मीदवार महमूद खान अचकजई को एकतरफा मुकाबले में हरा दिया।

जरदारी ने 411 वोट हासिल किए, जबकि अचकजई को केवल 181 वोट मिले। जरदारी पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के संयुक्त उम्मीदवार थे। वह डॉ. आरिफ अल्वी का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल सितंबर 2023 तक ही था लेकिन पाकिस्तान की संसद भंग होने और राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल नहीं होने के कारण नए राष्ट्रपति के चुनाव में लगभग छह माह की देरी हुई।

Asif Ali Zardari

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने जरदारी के राष्ट्रपति चुने जाने को पाकिस्तान के लिए दुर्भाग्य करार दिया है और फिर एक बार दावा किया है कि बड़ी संख्या में पाकिस्तान के लोगों ने इमरान खान को वोट दिया है, पर कुछ लोगों ने आवाम के वोटों पर डाका डाल दिया है। जरदारी की राष्ट्रपति के चुनाव में जीत अलोकतांत्रिक और अवैध है। यह संविधान का भी उल्लंघन है। पीटीआई ने पीएमएल-एन और पीपीपी को राष्ट्रीय संसाधनों पर कब्जा करने वाला गिरोह करार दिया है।

जरदारी से जुड़े अंतहीन विवाद

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ अली जरदारी का एक राजनीतिज्ञ के रूप में करियर विवादों से भरा हुआ है। यहाँ तक कि उनके खिलाफ इमरान खान ने उनकी हत्या की साजिश रचने तक का आरोप लगाया था। इमरान खान ने कहा था कि जरदारी उनकी हत्या की सुपारी आतंकवादियों को दे चुके हैं।

वैसे जरदारी इस तरह के कई मामलों में जेल में जाते रहे हैं। संभवतः वह पाकिस्तान में सबसे बदनाम राजनेता हैं। उन्हें राजनीतिक डीलिंग में इस समय सबसे माहिर नेता माना जाता है। इस बार भी पीपीपी तीसरे स्थान पर रहकर भी अपनी सारी मांगें पूरी करवाने में सफल हो रही है।

प्रधानमंत्री के पद के लिए शाहबाज शरीफ को समर्थन के बदले जरदारी ने खुद के लिए राष्ट्रपति पद मांग लिया। पाकिस्तान की राजनीति में जरदारी को एक अबूझ पहेली के रूप में जाना जाता है। उनके विरोधी भी कहते हैं कि आसिफ अली जरदारी से बेहतर सत्ता की राजनीति कोई नहीं कर सकता। 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद बदली हुई परिस्थतियों का फायदा उठाकर जरदारी पहली बार राष्ट्रपति बने थे और उन्होंने अपना कार्यकाल भी पूरा किया था।

वर्षों तक जेल में रहे जरदारी

1 दिसंबर 1988 को बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की पहली महिला प्रधान मंत्री बनी। लेकिन यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चली। अगस्त 1990 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने भ्रष्टाचार और अन्य दुर्भावनाओं के आरोप में बेनजीर सरकार को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद अक्टूबर 1990 के चुनावों में भुट्टो की पीपीपी को हार का सामना करना पड़ा।

बेनजीर के पहले कार्यकाल के दौरान, जरदारी पर संपत्ति हासिल करने के लिए अपनी पत्नी के पद का दुरुपयोग करने का व्यापक आरोप लगा। कहा गया कि जरदारी ने हर सरकारी परियोजना पर कमीशन लिया। जरदारी को पाकिस्तान में "मिस्टर टेन परसेंट" कहा जाने लगा। बेनजीर की पहली सरकार के पतन के लिए जरदारी को ही दोषी ठहराया गया।

1990 में जब कार्यवाहक सरकार बनी तो जरदारी फौरन गिरफ्तार कर लिए गए। उन पर कई मुकदमे चलाए गए। 1993 में नेशनल असेंबली का फिर चुनाव हुआ और इस बार जरदारी खुद चुनाव लड़े और जीत भी गए। इस बीच ढाई साल वह जेल में रहे और 200 से अधिक मुकदमों का सामना किया।

जरदारी के खिलाफ फिरौती के लिए अपहरण करने, बैंकों को धोखा देने, राजनीतिक विरोधियों की हत्या की साजिश रचने और भ्रष्टाचार में शामिल होने तक आरोप लगे। लेकिन वे लगभग सभी मुकदमों में बरी भी हो गए। जब 1993 में अंतरिम सरकार बनी तो जरदारी संघीय मंत्री के रूप में उसमें शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि जरदारी को मंत्री पद की शपथ उसी राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने दिलवाई, जिन्होंने जरदारी को जेल भेजा था।

बेनजीर की आड़ में जरदारी सत्ता का खेल खेलते रहे

अक्टूबर 1993 में हुए चुनावों में पीपीपी को बहुमत मिला और बेनजीर फिर से पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। लेकिन इस बार बेनजीर की सरकार में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डगमगा गई और कानून-व्यवस्था में भी गिरावट का अनुभव किया गया। इस बीच बेनजीर के भाई मुर्तजा और उनके पति आसिफ अली जरदारी के बीच झगड़ा शुरू हुआ और मुर्तजा ने जरदारी पर सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

अपनी बढ़ती परेशानियों के बीच भुट्टो ने जनता का विश्वास खो दिया और अंततः राष्ट्रपति लेघारी ने नवंबर 1996 में बेनजीर की सरकार को बर्खास्त कर दिया। कहा जाता है कि जरदारी इस बार भी परदे के पीछे से प्रधानमंत्री की तरह फैसले लेने लग गए थे।

बहरहाल बेनजीर की सरकार के हटते ही जरदारी को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर फिर भ्रष्टाचार से लेकर राजनीतिक कार्यालय के दुरुपयोग और हत्या तक कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए। सरकारी कंपनी पाकिस्तान स्टील मिल्स से रिश्वत लेने के एक मामले में अदालत ने 2002 में उन्हें सात साल की सजा सुनाई थी। लेकिन रसूख वाले जरदारी के लिए ऊंची अदालत ने सजा पलट दी। कुल मिलाकर जरदारी ने लगभग 11 साल जेल में बिताए हैं। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद भी ज़रदारी को अपनी नकारात्मक छवि को बदलना बेहद मुश्किल होगा।

पहले पत्नी और फिर बेटे को रखा आगे

जरदारी ने 2008 में पीपीपी की कमान संभाली और कई चुनावों में पार्टी को जीत दिलाई है। वह खुद राजनीतिक सत्ता के शिखर तक पहुंच चुके हैं। जरदारी कभी भी लोकप्रिय राजनेता नहीं रहे, लेकिन वह हर चुनाव में अपनी पार्टी की सफलता की संभावनाओं को बनाकर रखने में कामयाब रहे हैं। 2013 के चुनावों में अपमानजनक हार के बाद जरदारी सिंध में लगातार सत्ता में बने हुए हैं। 8 फरवरी 2024 को हुए चुनाव में एक बार फिर सिंध में पीपीपी जीती है और फिर से पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रही है।

जरदारी ने 2014 में देश छोड़ दिया और लगभग 18 महीने तक दुबई में रहे। उस दौरान जरदारी पीछे हट गए और अपने बेटे बिलावल भुट्टो को कमान सौंप दी। शायद जरदारी को पार्टी के लिए एक नए चेहरे की जरूरत महसूस होने लगी थी। अब बिलावल ही पीपीपी के चेयरमैन हैं, लेकिन अभी भी पार्टी की असली कमान जरदारी के हाथ में ही है।

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