Spying on Politicians: प्रणब मुखर्जी की ‘जासूसी’, चिदंबरम का इस्तीफा, जानें क्या था जासूसी का वह बड़ा मामला
साल 2011 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर अपने दफ्तर की गुप्त जांच कराने के लिए कहा था। वित्तमंत्री को अपने विभाग की जासूसी होने के प्रमाण मिले थे।

Spying on Politicians: बीते दिनों लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके फोन में पेगासस (जासूसी सॉफ्टवेयर) था। उन्होंने कथित तौर पर बताया कि उन्हें फोन पर संभलकर बात करने को कहा गया है क्योंकि उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है। बता दें कि पेगासस के जरिए जासूसी की रिपोर्ट सामने आने के बाद जमकर बवाल हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था। जिसमें पेगासस होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
जब पेगासस का मुद्दा उठा था, तब बीजेपी नेताओं का कहना था कि ये कांग्रेस की सरकार नहीं है, जो विपक्षी नेताओं के साथ-साथ अपने ही मंत्रियों की जासूसी करवाती है। दरअसल, यह किस्सा जून 2011 का है। तब तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर उनसे अपने कार्यालय की गुप्त जांच कराने के लिए कहा था। रिपोर्टों के अनुसार प्रणब मुखर्जी को संदेह था कि उनके कार्यालय को बदनाम करने के लिए उनका एक कैबिनेट सहयोगी उनकी जासूसी करवा रहा है।
आखिर मामला क्या था?
साल 2010 में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के कार्यालय में 16 अहम जगहों पर कुछ चिपकने वाले पदार्थ (च्यूइंग गम जैसा) पाए गये थे। तब वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) की ओर से निजी जांचकर्ताओं की मदद ली गई थी। सीबीडीटी की जांच टीम ने पाया कि ये चिपकने वाला पदार्थ माइक्रोफोन या छोटे कैमरों को चिपकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, कार्यालय में कोई माइक्रोफोन या रिकॉर्डिंग उपकरण नहीं मिला था। इसके बाद खुद प्रणब मुखर्जी ने इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए 7 सितंबर 2010 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खत लिखकर अपने कार्यालय की सुरक्षा में चूक की गोपनीय जांच कराने का अनुरोध किया।
उसी दौरान जून 2011 में ही सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एक नया खुलासा करते हुए सोनिया गांधी और पी. चिदंबरम पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सोनिया गांधी के कहने पर ही प्रणब मुखर्जी की जासूसी कराई गई थी। स्वामी का कहना था कि सानिया गांधी को हसन अली केस को लेकर प्रणब मुखर्जी पर शक था और उन्होंने जासूसी के लिये गृह मंत्री पी. चिंदबरम को तैयार किया।
प्रणब मुखर्जी के मन में चिदंबरम के प्रति थी 'खटास'
विवाद को बढ़ता देख और पार्टी और नेताओं पर गंभीर आरोपों के बीच बचाव के लिए खुद तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी सामने आए और कहा कि ये फर्जी मामला है। इसमें समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। तब लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि वित्तमंत्री इसे रफा-दफा करना चाहें तो ये उनकी मजबूरी हो सकती है।
दूसरी ओर प्रणब मुखर्जी खुद भी इस जासूसी से परेशान थे और उनका शक तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर ही था। इस जासूसी के कारण पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी के बीच खटास भी पैदा हो गयी थी। दरअसल, जासूसी की बात सामने आने के बाद प्रणब मुखर्जी ने इसकी जानकारी गृहमंत्री पी. चिदंबरम को नहीं दी और सीधे पीएम से इसकी शिकायत कर दी।
क्यों की गई थी जासूसी
कहानी को थोड़ा पीछे और विस्तृत तरीके से समझते है। जब जासूसी की गई थी, उसी दौरान वित मंत्रालय की ओर से 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही थी। 2जी स्पेक्ट्रम मामले को लेकर वित्त मंत्रालय की ओर से 15 मार्च 2011 को एक नोट तैयार किया गया। इसमें यह कहा गया कि तत्कालीन वित्त मंत्री (बाद में गृह मंत्री) पी. चिदंबरम चाहते तो 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी रोक सकते थे।
यह नोट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया था। इस मामले के सामने आने के बाद से विपक्ष चिदंबरम के इस्तीफे की मांग करने लगा। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमणयम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में इस नोट को सबूत के तौर पर पेश किया और मांग की कि अगर ए. राजा दोषी हैं तो फिर चिंदबरम भी उतने ही दोषी हैं।
अब इस विवाद के बाद से पी. चिदंबरम बैकफुट पर आ गये थे और प्रणब मुखर्जी से उनकी तकरार रोज अखबारों की सुर्खियों में रहती थी। कहने को तो ये 2जी का मामला था लेकिन प्रणब मुखर्जी की जासूसी करवाना 'आग में घी' का काम कर गया। कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं के बीच विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया था कि पी. चिदंबरम ने तीन बार इस्तीफा देने की पेशकश कर दी।
विवाद और सुलह की कोशिशें
सितम्बर 2011 में यह तनाव चरम पर पहुंच गया था। 2जी मामले में कांग्रेस के अंदर जारी कलह के बीच मौजूदा हालात यह थे कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्दी से जल्दी इस विवाद को निपटाना चाहते थे। लगातार बैठकों का दौर चल रहा था। पार्टी के दवाब में प्रणब मुखर्जी, पी. चिंदबरम को महत्वपूर्ण सहयोगी बता चुके थे। जबकि चिदंबरम इतने ज्यादा नाराज थे कि इस्तीफे की पेशकश कर चुके थे।
दोनों नेताओं के बीच बढ़ते तनाव से सोनिया गांधी इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने अल्टीमेटम दे दिया और कहा कि किसी भी हाल में विवाद खत्म होना चाहिए। इसके बाद सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी, ए.के. एंटनी और अहमद पटेल से मुलाकात की। तो दूसरी तरफ चिदंबरम से सलमान खुर्शीद और नारायण सामी जाकर मिले। उसी तारीख को शाम को ब्रेकिंग खबर आई कि कांग्रेस में अब सबकुछ ठीक हो गया है। कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वित्त मंत्रालय के नोट में कोई नयी बात नहीं है और वैसे भी इस नोट से चिदंबरम पर कोई आपराधिक आरोप साबित नहीं होता है।
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