Iran Vs America War: 'होर्मुज को बना देंगे कब्रिस्तान', IRGC ने अमेरिकी सेना को दी खुली धमकी

Iran Vs America War: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी सेना की ताकतवर यूनिट Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे 'जोरदार जवाब' मिलेगा। ईरान ने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को हमला करने वालों का 'कब्रिस्तान' बना दिया जाएगा।

दूसरी तरफ अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए दक्षिणी ईरान में मिसाइल साइट्स और हथियारबंद नौकाओं पर कार्रवाई की है। इस बढ़ते तनाव से दुनिया भर में तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है।

irgc warns us military

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। अब ईरान ने दावा किया है कि उसने यहां 'स्मार्ट कंट्रोल' कायम कर रखा है। IRGC के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 25 कारोबारी जहाज उसकी निगरानी में सुरक्षित निकाले गए। ईरान का कहना है कि बिना अनुमति कोई जहाज सुरक्षित रास्ता नहीं पा सकता। इससे साफ है कि तेहरान इस समुद्री रूट पर अपनी पकड़ मजबूत दिखाना चाहता है।

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अमेरिकी सेना ने क्या कार्रवाई की?

United States Central Command यानी सेंटकॉम के अनुसार अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और माइन बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं को निशाना बनाया। अमेरिकी प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा कि यह कार्रवाई 'आत्मरक्षा' में की गई ताकि अमेरिकी सैनिकों को खतरे से बचाया जा सके। अमेरिका ने यह भी कहा कि सीजफायर लागू होने के बावजूद उसकी सेना अपने जवानों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाती रहेगी। इस बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा।

सीजफायर पर मंडराने लगा खतरा

8 अप्रैल से लागू युद्धविराम पहले ही काफी कमजोर माना जा रहा था, लेकिन ताजा हमलों के बाद इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात और बिगड़े तो पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है। इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा पर नहीं बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा।

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जहाजों की आवाजाही पर असर

अमेरिका और ईरान दोनों की कार्रवाइयों का असर समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से कई जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। दूसरी तरफ ईरान ने उन जहाजों पर सख्ती बढ़ा दी है जिनका संबंध अमेरिका या इजरायल से बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई तेल टैंकर और कंटेनर जहाजों की आवाजाही धीमी हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

दुनिया की नजर अब अगले कदम पर

इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और बढ़ती है तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल सप्लाई, शिपिंग रूट और वैश्विक व्यापार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। हालांकि फिलहाल जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं, उससे लग रहा है कि हालात जल्द शांत होने वाले नहीं हैं और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

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