##ShaniShingnapur: 'शनि कोई भगवान नहीं.. उन्हें बुलाते नहीं भगाते हैं'

नई दिल्ली। शनि शिंगणापुर मंदिर विवाद को जहां महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फड़नवीस शांत करने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर इस लड़ाई में हिंदू गुरु शंकराचार्य भी कूद पड़े हैं। शंकराचार्य ने कहा कि पहली बात तो शनि देव तो भगवान है ही नहीं वो एक ग्रह हैं और दूसरी बात ये है कि शनि को बुलाते नहीं भगाते हैं। ऐसे में महिलाएं चबूतरे में पहुंचकर किसका भला चाहती हैं पहले वो ये बतायें?

क्या है शनि शिंगणापुर मंदिर विवाद, क्यों मचा है हल्ला?

हिंदू गुरु शंकराचार्य का यह बयान अब मंदिर से निकलकर शनिदेव पर अटक गया। आईये स्लाइडों के जरिये जानते हैं वाकई में शनिदेव हैं क्या?

सूर्य पुत्र

सूर्य पुत्र

वाकई में शनि देव एक ग्रह हैं, शनि को सूर्य पुत्र माना जाता है।

पितृ शत्रु

पितृ शत्रु

लेकिन शनिदेव को पितृ शत्रु माना जाता है, शनि को मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है।

मोक्ष देने वाला

मोक्ष देने वाला

मोक्ष को देने वाला एक मात्र शनि ग्रह ही है।

दुख पहुंचाता है

दुख पहुंचाता है

ऐसा माना जाता है कि शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करता है, और हर प्राणी के साथ न्याय करता है। जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्हें ही दुख पहुंचाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा

धर्मग्रंथो के अनुसार सूर्य की द्वितीय पत्नी छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ, जब शनि देव छाया के गर्भ में थे तब छाया भगवन शंकर की भक्ति में इतनी ध्यान मग्न थी की उसने अपने खाने पिने तक शुध नहीं थी जिसका प्रभाव उसके पुत्र पर पड़ा और उसका वर्ण श्याम हो गया। इसी कारण शनिदेव को पितृ विरोधी कहा जाता है।

नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान

नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान

पुराणों में उल्लेख है कि शनिदेव ने जब अपने पिता सूर्य का यह बर्ताव देखा तो उन्होंने भगवान शिव की उपासना की जिस पर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान मांगने को कहा तब शनिदेव वे कहा कि युगों-युगों से जबरदस्ती मेरी मां छाया को गलत ठहराया गया है इस कारण मुझे मेरे पिता से ज्यादा शक्तिशाली बनाओ ताकि मैं अपनी मां का बदला अपने पिता से ले सकूं तब शिवजी ने शनि को वरदान देते हुए कहा कि नवग्रहों में तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ स्थान होगा! मानव तो क्या देवता भी तुम्हरे नाम से भयभीत रहेंगे।

नवग्रहों के कक्ष में

नवग्रहों के कक्ष में

नवग्रहों के कक्ष क्रम में शनि सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर 88 करोड़ 61 लाख मील दूर है। पृथ्वी से शनि की दूरी 71 करोड़, 31 लाख, 43 हजार मील दूर है।

कैसे जानें आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है?

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