Shahenshah-E-Jadoo ओपी शर्मा ने डायनासोर दिखाकर लोगों को किया था हैरान, जमकर ब्लैक में बिके थे टिकट
Jadugar O P Sharma: एक दुखद खबर ने आज एक बार फिर से लोगों को हिलाकर रख दिया है। शनिवार रात कानपुर के एक अस्पताल में 'शहंशाह-ए-जादू' कहने वाले जादूगर ओपी शर्मा का लंबी बीमारी के बाद से निधन हो गया और इसी के साथ ही इंद्रजाल का तिलिस्म भी खत्म हो गया है। आपको बता दें कि ओपी शर्मा जादू की दुनिया के वो सितारे थे, जिन्होंने विश्वपटल पर देश का नाम रौशन किया था। दूसरे जादूगरों की तरह जादू को आंखों का धोखा ना कहने वाले ओपी शर्मा इसे विज्ञान का चमत्कार मानते थे और इसी कारण उन्होंने अपने जादू से लोगों को मनोरंजित करने के साथ -साथ उन्हें जागरुक करने का भी काम किया था। मूल रूप से यूपी के बलिया में जन्मे ओपी कानपुर के दक्षिण के बर्रा - 2 में रहते थे और इन्होंने अपने घर का नाम 'भूत बंगला' रखा था, जिसके सामने सेल्फी खिंचाने वालों की होड़ मची रहती थी। ओपी शर्मा के मैजिक शो को देखने के लिए लोग ब्लैक में टिकट खरीदते थे। आपको बता दें कि ओपी शर्मा अपने साथ लाव-लश्कर लेकर चला करते थे। उनके साथ 150 लोगों की टीम हुआ करती थी और वो 16 ट्रक सामान लेकर यात्रा करते थे।

यूं तो ओपी शर्मा से जुड़े बहुत सारे यादगार शो है लेकिन आगरा का एक शो हमेशा लोगों के जेहन में जिंदा रहता है क्योंकि उस शो में ओपी शर्मा ने अपने मायाजाल से लुप्त हो चुके डायनासोर को प्रकट कर दिया था, जिसके बाद उनके उस शो को देखने के लिए आगरा में जमकर ब्लैक में टिकट बिके थे। यही नहीं उन्होंने अपने मैजिक शो में एक बार चिंपैजी को लड़की बना दिया था, जिसकी भी काफी चर्चा हुई थी। वक्त बीतने और मनोरंजन के साधन बढ़ने के साथ-साथ लोगों का रूझान मैजिक शो के प्रति कम होता गया लेकिन ओपी शर्मा का क्रेज कभी नहीं खत्म हुआ, लोग उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहते थे।
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मात्र पांच साल की उम्र से जादू का करतब दिखाने वाले ओपी शर्मा साल 1971 में कानपुर शहर आए थे। तब उन्हें यहां एक छोटी सी फैक्ट्री में डिजाइनर की नौकरी मिली थी, तब परिवार पालने के लिए उन्हें ये जॉब करनी पड़ी थी। उसके बाद उनका पूरा परिवार कानपुर का ही निवासी बन गया। पहले वो कानपुर के शास्त्रीनगर कॉलोनी में रहते थे, उसके बाद उन्होंने अपना घर बर्रा-2 में बनवा लिया था उन्होंने अपना पहला कमर्शियल शो मुंबई में किया था और उन्होंने देश-विदेश में मिलाकर करीब 34000 शो किए थे। साल 2001 में उन्हें Indian Magic Media Circle ने 'शहंशाह-ए-जादू अवार्ड' से नवाजा था।

जादू की दुनिया के अलावा उन्होंने सियासी पिच पर भी अपनी किस्मत आजमाई थी। साल 2002 में वो सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके थे लेकिन सफलता नही मिली थी। इसके बाद वो साल 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे। वो हमेशा कहते थे 'मैं रहूं ना रहूं जादू चलता रहेगा, जिसकी शुरुआत हुई है उसका अंत निश्चित है।' तिलिस्म और मायजाल के इस सिपाही ने भले ही आज सदा के लिए आंखें मूंद ली हों लेकिन अपनी कलाकारी के चलते वो हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगे।

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