जम्‍मू के दोस्‍त बने इंडियन नेवी की शान

एझिमाला। जम्‍मू के जसरोटिया, आज भी राजपूताना आन बान और शान के गवाह हैं और अब यही आन बान और शान इंडियन नेवी का हिस्‍सा भी बन गई है। न सिर्फ राजपूताना शान बल्कि इंडियन नेवी को इस बार दो ऐसे ऑफिसर मिले हैं जिनकी दोस्‍ती की मिसाल शायद जम्‍मू के कठुआ शहर में आने वाले समय में दी जाती रहेगी।

Ankush and Rajiner (Lead pic)

शनिवार को इंडियन नेवी एकेडमी की पासिंग आउट परेड में जब वनइंडिया ने इन दोनों का इंटरव्‍यू किया तो इनकी खुशी आंखों में और गर्व इनके चेहरे पर साफ झलक रहा था।

ट्यूशन में हुई दोस्‍ती

कैडेट अंकुश जसरोटिया और एडजुटेंट राजिंदर सिंह, जम्‍मू के कठुआ के रहने वाले दोनों ऑफिसरों के बीच ट्यूशन क्‍लास दोस्‍ती को परवान चढ़ाने की वजह बनीं।

कैप्‍टन अंकुश जसरोटिया उन दिनों की याद करते हुए बताते हैं, 'हम दोनों ही लोग नेवी ज्‍वॉइन करना चाहते थे। मुझे वर्ष 2007 में नेवी में एप्रेंटिस करने का मौका मिला। वर्ष 2009 में मैं मुंबई में आइएनएस तरंगिनी पर पोस्‍टेड था। लेकिन हमेशा से ही मेरी आंखों में एक ऑफिसर बनने का सपना था।'

अंकुश की मानें तो जब उनकी और राजिंदर की मुलाकात कठुआ में ट्यूशन क्‍लास में हुई तभी से इस बात का अहसास हो गया कि हम दोनों में ही कुछ बात है जो एक जैसी है। अंकुश की मानें तो दोनों ही आर्म्‍ड फोर्सेज के बारे में

काफी बातें किया करते थे। नेवी ज्‍वॉइन करने के बाद दोनों एक कदम और आगे जाना चाहते थे और अब उनकी मंजिल थी इंडियन नेवी एकेडमी। वर्ष 2010 में अंकुश का सेलेक्‍शन एकेडमी के चार वर्ष के बीटेक कोर्स के लिए हो गया।

पिता से किया था ऑफिसर बनने का वादा

शुक्रवार को एकेडमी में ग्रेजुएशन सेरमेनी के दौरान अंकुश को नेवी चीफ आरके धवन की ओर से बेस्‍ट प्रोजेक्‍ट की ट्राफी भी सौंपी गई है। अंकुश के पिता की मानें तो अंकुश ने उनसे वादा किया था कि वह एक दिन ऑफिसर बनकर रहेगा।

उन्‍होंने वन इंडिया को बातचीत के दौरान बताया कि अब जबकि उनका बेटा एक ऑफिसर बन गया है, वह काफी खुश हैं। वह कहते हैं, 'हमारी कोशिशें, हमारी सारी प्रार्थनाएं और इसकी कड़ी मेहनत से एक सपना सच हो गया है।'

जिस समय वह जॉब में थे, उनका बेटा उनसे सवाल करता था कि उनके ऑफिस की गाड़ी उन्‍हें पिक करने क्‍यों नहीं आती है। तब अंकुश के पिता उसे जवाब देते कि यह सुविधा सिर्फ अफसरों को मिलती है। उस समय अंकुश ने अपने पिता से वादा किया था कि वह एक दिन अफसर बनकर दिखाएगा।

अपने परिवार के पहले ऑफिसर राजिंदर

अंकुश से अलग अगर राजिदंर सिंह की बात करें तो वह अपने परिवार में पहले ऑफिसर हैं। वह कहते हैं कि पीओपी उनके लिए एक ऐसा मौका बन गई है, जिसे वह कभी नहीं भूला पाएंगे। वनइंडिया से बात करते हुए उन्‍होंने कहा, 'मैं अपने परिवार में पहला ऑफिसर हूं। अंकुश की दोस्‍ती ने मुझे इसमें काफी मदद की। हम दोनों के शौक एक जैसे हैं।'

राजिदंर की बहन प्रियंका जो कि एक बीकॉम स्‍टूडेंट हैं, कहती हैं कि उनके भाई ने इस बार उनके जन्‍मदिन पर उन्‍हें एक टू-व्‍हीलर गिफ्ट किया है।

आइएनए में दोस्‍तों के रोल मॉडल

राजिदंर के पिता ओंकार सिंह और मां कांता देवी के लिए अपने बेटे को अफसर बनते देखना काफी इमोशनल मौका था। अंकुश और राजिंदर दोनों का बर्थडे दिसंबर में होता है। राजिंदर सिंह को नेवी आरके धवन ने सिल्‍वर मेडल से सम्‍मानित किया है।

निश्चित तौर पर अंकुश और राजिंदर एकेडमी के लिए रोल मॉडल की तरह है। आईएनए के पीआरओ लेफ्टिनेंट कमांडर टी राहुल इन दोनों के रोल मॉडल हैं। अंकुश और राजिंदर दोनों ने बताया कि इन्‍हें राहुल में बेहतरीन लीडर की क्‍वालिटी नजर आती है।

वहीं आइएनए के प्रिंसिपल केबी मेहता ने बताया कि दोनों ही काफी बुद्धिमान हैं और आइएनए इन दोनों के बेहतर भविष्‍य की कामना करता है। वह मानते हैं कि यह दोनों ही बाकी कैडेट्स की तुलना में काफी अलग साबित हुए।

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