इतिहास के पन्नों- दिल्ली की पहली माडर्न बिल्डिंग के डिजाइनर का नाम लेवा भी नहीं
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) दिल्ली में एक खास वर्ग से जुड़े लोगों को मालूम है कि एडविन लुटियन और हरबर्ट बेकर कौन थे? दरअसल इन दोनों ने नई दिल्ली की अहम इमारतों के डिजाइन तैयार किए थे।
पर उस शख्स को शायद ही कोई जानता हो जिसने नई दिल्ली की पहली आधुनिक इमारत का डिजाइन तैयार किया। हम बात कर रहे दिल्ली असेंबली इमारत का डिजाइन बनाने वाले ई. मोनटेगे थामस की। जब साल 1912 में गोरों ने नई दिल्ली को देश की नई राजधानी बनाने का फैसला किया तब उन्होंने इस इमारत का डिजाइन तैयार किया।
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10 एकड़ का स्पेस
थामस ने इसका डिजाइन तैयार करते हुए 10 एकड़ का स्पेस सिर्फ हरियाली के लिए रखा। ये इमारत बनी चंद्रावल गांव को लोगों को दूसरी जगह देकर। इधर ही सेंट्रल लेजिस्लेचर की बैठकें होती रही साल 1913 से लेकर 1926 के बीच। यहां पर ही हुआ दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहला कानवोकेशन 26 मार्च, 1923 को हुआ। कहते हैं कि इस इमारत का डिजाइन करने से निर्माण तक के लिए एक साल तक का वक्त मिला था। और थामस के नेतृत्व में इसे एक साल में तैयार भी कर दिया गया।
दिल्ली में महानगर परिषद
पहली दिल्ली विधानसभा गठित हुई 1952 में। उस विधानसभा को 1956 में भंग करा गया। उसके बाद दिल्ली में महानगर परिषद ने काम करना शुरू किया। दिल्ली विधानसभा की तरह से महानगर परिषद भी इसी इमारत से काम करती थी। दिल्ली में 1993 में विधान सभा को फिर से स्थापित करने के बाद उसने फिऱ से इसी थामस की तरफ से डिजाइन की इमारत से काम करना जारी रखा।
इधर के मेन गेट के कुछ आगे महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय और विट्ठलभाई पटेल की प्रतिमाएं लगी है। गांधी जी तो इधर एक बार आए भी थे। कुछ साल पहले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रहम प्रकाश की भी इधर प्रतिभा लगी।
फोटो तक नहीं मिलेगी
पर अफसोस की बात है कि दिल्ली की पहली आधुनियक इमारत को बनाने वाले डिजाइनर की आपको फोटो तक नहीं मिलेगी। आप दिल्ली असेंबली की लाइब्रेयरी से लेकर कहीं चल जाइये पर आपको ई. मोनटेगे थामस कोई फोटो नहीं दे पाएगा।













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