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JNU Controversy: स्वामी विवेकानंद, देवी दुर्गा, भगवान राम के बाद अब शिवाजी का हुआ अपमान जेएनयू में

भारत में वामपंथी विचारधारा का गढ़ रहा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय हमेशा किसी न किसी विवाद के कारण सुर्खियों में रहता है।

ruckus in JNU over insult of shivaji picture after Swami Vivekananda lord rama Controversy

JNU Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक बार फिर बड़ा बवाल शुरू हो गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और लेफ्ट के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये। एबीवीपी का कहना है कि लेफ्ट के कार्यकर्ताओं ने शिवाजी महाराज की तस्वीर को नीचे फेंक दिया और उनका अपमान किया। जबकि लेफ्ट का आरोप है कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की है।

हालांकि, छात्र संगठनों के बीच मारपीट, हंगामा और बवाल होना कोई नई बात नहीं है लेकिन सवाल यह उठता है कि हर बार जेएनयू में ही बवाल क्यों होता है? और ये बवाल, हंगामा, मारपीट किसी महान व्यक्तित्व की जयंती मानने या भगवान की पूजा के रोकने के लिए ही क्यों होता है? जेएनयू के इतिहास में ऐसे कई उदाहरण भरे पड़े हैं। चाहे वो स्वामी विवेकानंद की मूर्ति पर पत्थर मारना, उस पर आपत्तिजनक बाते लिखना, रामनवमी पर मांस पकाकर खाना हो या मां दुर्गा को अपमानित करने के लिए उन पर 'अपशब्द' बोलना, या विभिन्न समुदायों के खिलाफ जेएनयू की दीवारों पर अपशब्द लिखना हो। ऐसी कई बाते हैं जो जेएनयू पर सवाल खड़े करती हैं। जानिए पिछले कुछ सालों में जेएनयू में कब-कब ऐसी घटनाओं को दिया गया अंजाम?

शिवाजी महाराज का अपमान

जेएनयू में हुए इस पूरे विवाद को लेकर एबीवीपी द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की कई तस्वीरें शेयर की गई हैं। उन तस्वीरों में शिवाजी की फोटो नीचे गिरी दिख रही है, फूल भी जमीन पर बिखरे हुए हैं। उन तस्वीरों के साथ एबीवीपी ने लिखा है कि जेएनयू में छात्र संघ कार्यालय में वामपंथियों द्वारा #वीर_शिवाजी के चित्र से माला उतारी गई और तोड़ फोड़ कर वहां लगे महापुरुषों की तस्वीरों को फेंका गया है। हालांकि, लेफ्ट ने इस पर सफाई तो नहीं दी लेकिन ये जरूर कहा कि एबीवीपी ने हमारे छात्रों के साथ मारपीट की है।

मां दुर्गा को कहा गया 'सेक्स वर्कर'

जेएनयू में महिषासुर शहादत दिवस मनाया जाता है। इस सन्दर्भ में, 24 फरवरी 2016 को कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में सबको चौंका दिया था। दरअसल, स्मृति ईरानी का कहना था कि अक्टूबर 2014 में इस दिवस के आयोजन के वक्त कॉलेज के कुछ दलित-आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों ने एक बयान जारी किया था। इस बयान को पढ़कर स्मृति ईरानी ने बताया था कि जेएनयू जैसे संस्थान में मां दुर्गा को 'सेक्स वर्कर' कहा जाता है और वहां दुर्गा पूजा व नवरात्र का विरोध होता है।

गौर करने वाली बात ये है कि साल 2011 में भी AIBSF (All India Backward Students Forum) ने बेहद आपत्तिजनक शब्दों के साथ मां दुर्गा की अश्लील तस्वीरें छापीं थी और उसके पर्चें बांटे गये थे। दरअसल लेफ्ट विंग के छात्र ने 'महिषासुर शहादत दिवस' मनाने की योजना के दौरान ये सब किया था। इस दौरान भी जेएनयू में खूब हंगामा हुआ था।

दुर्गापूजा पर हंगामा

गौर करने वाली बात है कि हर साल दुर्गापूजा या नवरात्रि के दौरान जेएनयू से हंगामे की खबर आती ही रहती है। पिछले साल ही नवरात्र के मौके पर एबीवीपी के छात्रों ने आरोप लगाया कि नवरात्रि पूजा के दौरान उन्हें हॉस्टल में पूजा करने से रोकने का प्रयास किया गया था। इस मामले की जेएनयू प्रशासन और स्थानीय पुलिस को शिकायत भी की गई थी।

स्वामी विवेकानंद की मूर्ति पर अपशब्द

नवंबर 2019 में भी जेएनयू में हंगामा हुआ था। तब स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के ऊपर किसी ने अपशब्द लिख दिए। दरअसल उसी दौरान कैंपस में फीस बढ़ोतरी को लेकर लेफ्ट विंग के छात्र संगठन आन्दोलन कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान प्रदर्शन की आड़ में मूर्ति को अपमानित किया गया। साथ ही जहां मूर्ति स्थापित है वहां पर अभद्र टिप्पणियां (भगवा जलेगा जैसे शब्द) और भड़काऊ बातें लिखी गयी।

भगवान श्रीराम से जुड़ी विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग

दिसंबर 2021 में भगवान श्रीराम और अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर भी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय माहौल गरमा गया था। जेएनयू छात्रसंघ और आईसा (AISA) ने कैंपस के अंदर बिना विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बगैर 'राम के नाम' नाम की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की थी। जबकि जेएनयू प्रशासन ऐसे कार्यक्रम या डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का अंदेशा जता चुका था। लेकिन लेफ्ट विंग के छात्र नेता नहीं माने।

वहीं भगवान राम से संबंधित एक घटना और है। जब छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान बहुजन स्टूडेंट्स फ्रंट के उम्मीदवार रघुनाथ प्रसाद साकेत ने भगवान राम के बारे में अभद्र टिप्पणी की थी, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में दो उम्मीदवार और चार पुलिसकर्मी घायल हो गये थे। जब भगवान राम पर टिप्पणी की गई तो एबीपीवी के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई थी, फिर मामला बिगड़ गया।

रामनवमी पर हिंसक झड़प

अप्रैल 2022 में रामनवमी के अवसर पर कावेरी छात्रावास में छात्रों के दो गुटों के बीच हॉस्टल के मेस में मांसाहारी भोजन परोसने को लेकर हंगामा हो गया और फिर जमकर मारपीट भी हुई। उस दौरान लेफ्ट विंग ने कहा कि हमें मांसाहारी खाने से मना किया गया है। जबकि एबीवीपी के छात्रों ने कहा कि हमें पूजा नहीं करने दी जा रही है। जिसके बाद हिंसक झड़प हो गई।

ब्राह्मणों और बनियों के खिलाफ अपशब्द

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    दिसंबर 2022 में जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में एक बार फिर बवाल मच गया। इस बार वहां विश्वविद्यालय की दीवारों पर ब्राह्मणों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखे गये थे। लिखा गया कि 'ब्राह्मण भारत छोड़ो' और बनिया समुदाय को लेकर भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद वहां जमकर हंगामा हुआ।

    यह भी पढ़ें: JNU Row: शिवाजी महाराज की मूर्ति के अपमान को लेकर लेफ्ट-ABVP में झड़प

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