RSS: विजयदशमी पर संघ मनाता है स्थापना दिवस, भारत को गौरव दिलाने वाले होते हैं मुख्य अतिथि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर वर्ष विजयादशमी का उत्सव मनाता है। यह भारत की सांस्कृतिक पहचान को बरकरार रखने की विचारधारा को जनता के बीच ले जाने और उनके साथ सीधा संवाद का अवसर होता है। संघ की स्थापना भी विजयादशमी के दिन ही 1925 में हुई थी। इस दिन संघ प्रमुख और सभी प्रमुख स्वयंसेवक शस्त्रों की पूजा करते हैं और भगवान राम के धर्म के प्रति ध्येय का सम्मान करते हैं।
इस अवसर पर हर वर्ष कोई ना कोई विशिष्ट अतिथि भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित होता है। इस बार संगीत जगत के महारथी शंकर महादेवन मुख्य अतिथि थे। महादेवन ने कहा कि वह संघ के इस कार्यक्रम में आकर अभिभूत हैं और उन्हें आमंत्रित करने के लिए दिल से धन्यवाद करना चाहते हैं। 1998 से ही मशहूर शंकर महादेवन 7000 से अधिक गाने गा चुके हैं।

संघ की स्थापना
सरसंघचालक का विजयादशमी भाषण साल में होने वाला सबसे महत्वपूर्ण पक्ष होता है। यह एक मूल्यवान परंपरा है, जिसकी शुरुआत प्रथम सर संघ चालक डॉक्टर हेडगेवार के साथ हुई, तब केवल 15 स्वयंसेवको से साथ यह परंपरा शुरू की गई थी, पर आज देश भर में लाखों स्वयंसेवक और आम जन इसमें शामिल होते हैं। जिनमें पंचायत के सदस्य से लेकर विधायक, सांसद और वरिष्ठ मंत्री भी सम्मिलित होते हैं। शहर की मशहूर हस्तियां और धार्मिक संगठन भी इसमें हिस्सा लेते हैं।
दो साल बाद ही संघ के 100 साल पूरे हो जाएंगे। विजयादशमी पर, संघ मुख्यालय नागपुर में रेशम बाग से सटे एक बड़े मैदान वाले आयोजन स्थल को डॉ हेडगेवार ने 1932 में 2,000 रुपये की कीमत पर खरीदा था। हिंदुत्व के संरक्षण के उद्देश्य से स्थापित संघ आज दुनिया का सबसे बड़़ा गैर सरकारी सांस्कृतिक संगठन है। तीन बार के प्रतिबंध के बावजूद संघ राष्ट्र सेवा के लिए पूरे विश्व में जाना जाता हैं। संघ देश में ही नहीं दुनिया के 40 से अधिक मुल्कों में सक्रिय है।
संघ का व्यापक संपर्क
संघ भले ही हिंदुत्ववादी शक्तियों को संगठित करने वाला संगठन है, पर संघ के मंच पर वे लोग भी आते रहे हैं जिनकी इस संगठन की विचारधारा से सहमति नहीं भी रही है। महात्मा गाँधी दो बार संघ के सीघे सपर्क में आए और शिविरों तक में गए। सुभाष चंद्र बोस भी संघ के संस्थापक डॉ हेडेगवार से मिलने नागपुर आए थे। 1939 में बाबा साहेब अंबेडकर भी संघ के प्रशिक्षण शिविर में गए थे। 1948 में सरदार बल्लभ भाई पटेल भी तत्कालीन संघ प्रमुख माधव सदाशिव गोलवलकर से मिले थे।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संघ की प्रेरणा से ही जनसंघ के रूप में राजनीतिक पार्टी का गठन किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक और वाजपेयी संघ पृष्ठभूमि से आकर भारतीय राजनीति में छाने वाले नेता बने। बाद में भारतीय जनता पार्टी के रूप में एक नई पार्टी का गठन भी जनसंघ के नेताओं द्वारा ही किया गया।
पिछले कुछ सालों से संघ ने उन लोगों को भी अपने संपर्क अभियान का हिस्सा बनाना शुरू किया है, जिनका संघ से सीधा संबंध नहीं रहा, लेकिन समाज में उनकी अपनी पहचान और प्रभाव था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को संघ मुख्यालय में आने के लिए विषेश रूप से आमंत्रित किया गया। कुछ और अतिविशिष्ट लोगों को विजयदशमी के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नागपुर में स्वागत किया गया।
2017 में संत निर्मल दास बने मुख्य अतिथि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 30 अक्टूबर 2017 को नागपुर में अपने वार्षिक विजयदशमी समारोह के लिए जालंधर के दलित सिख धार्मिक नेता संत निर्मल दास महाराज का मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत किया। गुरु रविदास साधु संप्रदाय के प्रमुख संत निर्मल दास संत प्रोतम दास डेरा (बेबे जौरे) के भी प्रमुख थे, जिनके अनुयायियों में रविदासिया समुदाय और जाट सिख शामिल हैं।
कैलाश सत्यार्थी 2018 में मुख्य अतिथि थे
2018 के आरएसएस विजयादशमी समारोह के मुख्य अतिथि बचपन बचाओ आंदोलन के प्रवर्तक और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी रहे। बाल अधिकारों के वैश्विक लीडर कैलाश सत्यार्थी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कुछ लोगों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया, पर उन्होंने संघ के मंच से सबको जवाब दिया और कहा कि विजयादशमी का पर्व हम एक निर्वासित राजकुमार के नेतृत्व में क्रूर सत्ता के भूखे शासक पर भारत के वंचित की जीत के रूप में मनाते हैं और वह भारत के गांव की एक दलित लड़की की भलाई से देश के विकास को मापते हैं। उसी वर्ष पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के साथ मिले थे।
2019 में एचसीएल के शिव नादर मुख्य अतिथि रहे
संघ ने 2019 के विजयादशमी के कार्यक्रम में आईटी कंपनी एचसीएल के संस्थापक और पद्म भूषण से सम्मानित शिव नादर को आमंत्रित किया। शिव नादर ने रेशमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र, नागरिकों और गैर सरकारी संगठनों को देश के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए आगे आने आना चाहिए, क्योंकि सरकार अकेले देश को अगले स्तर पर नहीं ले जा सकती, हमें सभी हितधारकों की समान भागीदारी की आवश्यकता है।
2020 में कोरोना का प्रभाव
2020 में संघ ने हमेशा की तरह विजयादशमी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सिर्फ 50 स्वयंसेवकों के साथ विजयदशमी की पारंपरिक पूजा की और देश को यूट्यूब और अन्य मीडिया के माध्यम से संबोधित किया। भागवत ने विश्व में फैली कोरोना महामारी से बचने के लिए लोगों से सावधानी बरतने और स्वयंसेवकों से लोगों की सहायता करने का आह्वान किया।
2021 में इजरायली राजनयिक मुख्य अतिथि रहे
2021 भी एक तरह से कोरोना से ही प्रभावित रहा। लेकिन इस साल संघ ने परंपरागत तरीके से विजयादशमी के कार्यक्रम का आयोजन किया। इस बार मुख्य अतिथि के रूप में इजरायली महावाणिज्य दूत कोब्बी शोशानी थे। कोब्बानी संघ के कार्यक्रम में आकर बहुत खुश हुए और उन्होंने कहा कि आरएसएस एक राष्ट्रवादी संगठन है और यह राष्ट्र निर्माण में लगा हुआ है।
2022 में पर्वतारोही संतोष यादव मुख्य अतिथि रहीं
परंपरा से हट कर 2022 में संघ ने एक महिला को अपने विजयादशमी कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सम्मानित किया। पर्वतारोही संतोष यादव दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली महिला हैं।
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