Bharat Chawal: 29 रूपये प्रति किलो ‘भारत चावल’: क्या है इसका गणित?
केंद्र की मोदी सरकार ने भारत की जनता को मंहगाई से राहत देते हुए 7 फरवरी को 'भारत चावल' योजना की शुरुआत की है।
इससे पूर्व मोदी सरकार 'भारत आटा', 'भारत दाल' लॉन्च कर चुकी है। इन योजनाओं से निश्चित रूप से गरीब व मध्यम वर्ग को मंहगाई से राहत मिल सकती है।

भारत चावल योजना का औचित्य
पिछले एक साल के अंदर खुदरा बाजार में चावल की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जिसके कारण गरीब जनता परेशान हो रही थी। पहले तो पीएम मोदी ने चावल के आयात पर रोक लगवाई ताकि बाजार में चावल की उपलब्धता बनी रहे। फिर जनता को राहत देने के उद्देश्य से बाजार में सस्ते चावल उपलब्ध करवाने का फैसला किया है। भारत चावल सिर्फ 29 रूपये प्रति किलो उपलब्ध होगा। यह 5 किलो व 10 किलो की पैकिंग में उपलब्ध होगा।
फिलहाल भारत चावल को नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार आदि के स्टोर से खरीदा जा सकता है। जबकि, भविष्य में यह रिटेल चेन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध होगा। मोदी सरकार इसे मोबाइल वैन के माध्यम से भी बेचने की तैयारी कर रही है।
कितना है चावल का उत्पादन
भारत की आधी से भी अधिक आबादी मुख्य रूप से भोजन के लिए चावल पर निर्भर है। विश्व के कुल चावल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत भारत में होता है। वर्ष 2022 के दौरान विश्व में 5195 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ, जबकि इस दौरान भारत में 1294.7 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ। सर्वाधिक चावल उत्पादन में विश्व स्तर पर भारत का स्थान चीन के बाद आता है।
वित्तीय वर्ष 2010 में भारत ने जहां 890.9 लाख टन चावल का उत्पादन किया, वहीं वित्तीय वर्ष 2014 तक इसमें 19.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर यह 1066.5 लाख टन पहुंच गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2014 से 2022 के दौरान भारत में चावल उत्पादन में 21.39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और वर्ष 2022 में चावल उत्पादन 1294.7 लाख टन पहुंच गया।
अगर चावल निर्यात को देखें तो वित्तीय वर्ष 2022 के दौरान भारत ने लगभग 721 अरब रूपये के चावल का निर्यात किया गया, जबकि 2021 में 654 अरब रूपये के चावल का निर्यात हुआ।
सरकार का एक किलो चावल पर व्यय
केंद्र सरकार ने चावल को 'भारत चावल' के रूप में 29 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचने का निर्णय किया है। क्या आप जानते है कि केंद्र सरकार का एक किलो चावल जनता तक पहुंचाने में कितना खर्च होता है?
वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2183 है। इसका तात्पर्य यह है कि केंद्र सरकार ने किसानों से एक क्विंटल धान खरीदने के लिए 2183 रूपये खर्च किया। एक क्विंटल धान से लगभग 60 किलो चावल प्राप्त करने का मानक है। इस आधार पर सरकार को एक किलो चावल प्राप्त करने में 36.38 रूपये खर्च हुए।
इसके उपरांत क्रय केंद्र से भण्डारण व पुनः पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) तक आते-आते एक किलो चावल की आर्थिक लागत लगभग 50 रू. प्रति किलो पहुंच जाती है। अर्थात खरीदने के उपरांत भी एक किलो चावल के रखरखाव व ट्रांसपोर्ट पर सरकार का करीब 13-14 रूपये खर्च होते हैं।
भारत सरकार कोरोना महामारी से अभी तक लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत राज्यों को सब्सिडी वाला खाद्यान्न प्रदान करती है।
भारतीय खाद्य निगम द्वारा राज्यों को आपूर्ति किए जाने वाले खाद्यान्न की लागत और रियायती मूल्य के बीच के अंतर की पूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है। 25 मई 2023 को पीआईबी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले लगभग 9 वर्षों के दौरान भारत सरकार ने फूड सब्सिड़ी पर लगभग 18.5 लाख करोड़ रूपये खर्च किये, जो सरकार की सभी लोगों के लिए खाद्यान्न उपलब्धता और पोषण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।












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