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Earthquake: बढ़ रहा है भूकंप का खतरा, कब कब हुई भारत में भारी तबाही

Earthquake: 4 अप्रैल 2024 को आए भूंकप के झटकों ने हिमाचल वासियों की नींद उड़ा दी। इस भूंकप से वैसे तो किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, परंतु रात्रि करीब 9.30 बजे पर 5.3 तीव्रता वाले इस भूंकप ने हिमाचल के लोगों को तो अपने घरों से बाहर निकलने पर विवश किया ही, साथ ही साथ हरियाणा व पंजाब की धरती भी इससे डोल गई। इस भूंकप का केंद्र हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला रहा।

कुछ दिन पहले 7.2 तीव्रता वाले भूंकप ने ताइवान में भयानक तबाही मचाई थी। जिसके चलते अनेकों इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिसमें से एक इमारत, जो झुक गई थी, की तस्वीर वायरल भी हुई। तो चलिए, आज भारत के कुछ सबसे विनाशकारी भूंकपों के बारे में जानते हैं।

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8.2 तीव्रता वाला भूकंप, जिसने बिहार में मचाई तबाही (1934)

स्वतंत्रता पूर्व 15 जनवरी 1934 को दोपहर 2.13 बजे, 8.2 तीव्रता से आया यह भूकंप भारत के अभी तक के इतिहास में सबसे खराब भूकंपों में से एक है। इस भूकंप का केंद्र पूर्वी नेपाल था। यह भूकंप इतना भीषण था कि इसके केंद्र से लगभग 650 किमी तक इसका प्रभाव साफ-साफ देखा गया।

नेपाल के काठमांडू, भक्तपुर व पाटन शहरों के साथ-साथ भारत में बिहार प्रांत के करीब चार जिले इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इस भूकंप के चलते इन जिलों में चारों तरफ मलबे के ढेर ही ढेर दिखाई दिए, अर्थात ये जिलें लगभग पूरी तरह तबाह हो गये थे।

इस भूकंप से जहां बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ ही भारत में लगभग 12,000 से भी ज्यादा लोगों की जान गई तथा नेपाल सहित इसमें 30,000 से भी ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर थी। बिहार में इस दिन को आज भी काला दिन के रूप में जाना जाता है।

जब क्वेटा शहर हुआ तबाह (1935)

अविभाजित भारत में 31 मई 1935 की सुबह 3.40 बजे क्वेटा शहर, जो अब पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान की राजधानी है, 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से थरथरा गया। इस भूकंप से यह शहर लगभग मलबे के ढ़ेर में बदल गया तथा इससे करीब 50,000 से भी ज्यादा लोगों की जान गई।

असम भूकंप (1950), जब हिले पहाड़ व उफनी नदियां

जब भारत अपना तीसरा स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब 15 अगस्त 1950 को शाम 7.39 बजे 8.6 तीव्रता वाले इस भूकंप ने भारत के असम प्रांत सहित चीन में जबरदस्त तबाही मचाई थी। इसका केंद्र तिब्बत का रीमा क्षेत्र था। यह स्वतंत्र भारत का सबसे खतरनाक भूकंप था। इस भूकंप को असम-तिब्बत भूकंप के नाम से भी जाना जाता है।

इस भूकंप ने पूर्वी असम व तिब्बत की मिश्मी व अबोर पहाड़ियों में भारी तबाही मचायी थी। जहां पहाड़ हिलने लगे थे, बड़ी मात्रा में भूस्खलन हुआ, वहीं ब्रह्मपुत्र नदी में उफान व उसका बहाव भी उल्टी दिशा में देखा गया। प्रकृति से लेकर जन-मानस को इस भूकंप से काफी नुकसान हुआ था। लगभग 4,000 से भी ज्यादा लोगों की इस भूकंप में जान गई थी।

उत्तर काशी भूकंप (1991)

उत्तराखंड के उत्तरकाशी व गढ़वाल क्षेत्र में 20 अक्टूबर 1991 को 6.8 तीव्रता वाले इस भूकंप को गढ़वाल भूकंप के रूप में भी जाना जाता है। इस भूकंप से लगभग 20,000 घर पूरी तरह नष्ट हो गये तथा 74,000 से भी ज्यादा घरों को क्षति हुई। इससे 768 लोगों की जान गई तथा 5066 लोग घायल हुए थे। इस भूकंप के झटके दिल्ली तक महसूस किये गये थे।

महाराष्ट्र भूकंप (1993), जब लातूर शहर हुआ तबाह

30 सितंबर 1993 को सुबह 3.56 बजे 6.2 तीव्रता से आए इस भूकंप ने लातूर व उस्मानाबाद जिलों में काफी तबाही मचाई थी। लातूर व उस्मानाबाद सहित आसपास के 12 जिलों के 2.11 लाख मकान इस भूकंप में तबाह हो गये थे। इसमें लगभग 10,000 लोग मारे गये तथा 30,000 से भी ज्यादा घायल हुए। इस भूकंप का केंद्र किलारी नामक स्थान था।

गुजरात भूकंप (2001), भुज हुआ तबाह

भारत में जब 52वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था, वहीं 26 जनवरी 2001 में सुबह 8.50 बजे आए 7.7 तीव्रता वाले भुकंप ने कच्छ जिले के भुज शहर को मलबे का ढ़ेर बना दिया। भूकंप इतना भयानक था कि सिर्फ दो मिनट के अंदर ही भुज के आसपास का इलाका खण्डर बन गया था। इसमें 20,000 से भी ज्यादा लोगों की जान गई और लाखों लोग बेघर हो गये थे। अपने केंद्र भचाऊ (कच्छ जिला) से करीब 700 किमी. दूर तक इस भूकंप के झटके महसूस किये गये थे।

इसके अलावा दिसंबर 26, 2004 को हिंद महासागर में आये भूकंप व सुनामी ने भी लाखों लोगों की जान ली, जिसमें लगभग 20,000 भारतीयों की भी जान गई थी।

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