Revenue from Alcohol: शराब बेचकर रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही हैं ये राज्य सरकारें, देखें ये आंकड़ें
शराब बेचकर हजारों करोड़ की कमाई करने वाले राज्य एक-एक दिन में लाखों लीटर शराब बेच रहे हैं। वर्तमान में इनके पूरे राजस्व का 10 से 20 प्रतिशत शराब से कमाया जाता है।

कर्नाटक में राज्य सरकार शराब पर लगाए टैक्स से करीब 14.27 प्रतिशत की कमाई करती है यानि अगर सरकार 100 रुपये की कमाई करती है तो उसमें से करीब 14.27 रुपये का राजस्व शराब से आता है। कर्नाटक ने साल 2020-21 में शराब की बिक्री और लाइसेंस फीस के मद में करीब 21 हजार करोड़ रुपये की कमाई की थी।
इस बीच कर्नाटक ने साल 2022 के आखिरी सप्ताह में रिकॉर्ड कमाई की है। 23 दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच कर्नाटक में 1,262 करोड़ रुपये की 20.66 लाख लीटर शराब की बिक्री हुई। वहीं 15.4 लाख लीटर बीयर की बिक्री हुई। आबकारी विभाग की आधिकारिक सूचना के अनुसार 27 दिसंबर को 3.57 लाख लीटर शराब (2.41 लाख लीटर बीयर), 28 दिसंबर को 2.31 लाख लीटर (1.67 लाख लीटर बीयर), 29 दिसंबर को 2.31 लाख लीटर (1.93 लाख लीटर बीयर), 30 दिसंबर को 2.93 लाख लीटर (2.59 लाख लीटर बीयर), 31 दिसंबर 3 लाख लीटर (2.41 लाख लीटर बीयर), 31,181 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री बताई गई है।
बताते चलें कि राज्य सरकार ने आबकारी विभाग के लिए साल 2022-23 के लिए 29,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा था। विभाग ने 29 दिसंबर तक प्रदेश भर में शराब की बिक्री से 21,981 करोड़ रुपये की आय कर ली है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 2021-22 की तुलना में इस साल शराब की बिक्री में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली की कमाई भी हजारों करोड़
एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली का कुल (टैक्स) राजस्व 2022-23 में 47,700 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। जिसमें शराब बेचकर 9,500 करोड़ रुपये से अधिक की आय का अनुमान लगाया है यानि कुल राजस्व का 20 प्रतिशत। जबकि दो साल पहले तक शराब से दिल्ली को करीब 5,000 करोड़ रुपये की कमाई होती थी। दिल्ली सरकार अगर 100 रुपये की कुल कमाई करती है तो उसमें से 11.37 रुपये शराब पर लगे टैक्स से कमाती है।
उत्तर प्रदेश की शराब से कमाई
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार शराब पर लगाए टैक्स से 9.92 प्रतिशत की कमाई करती है। यानि अगर सरकार 100 रुपये की कुल कमाई करती है तो उसमें से कुल 9.92 रुपये का राजस्व शराब से आता है। साल 2021-22 में मार्च 2022 तक जो राजस्व हासिल हुआ, उसके मुताबिक सरकार ने 36,208.44 करोड़ रुपये की कमाई शराब से की थी। जबकि साल 2020-21 की बात करें तो यह कमाई 30061.44 करोड़ रुपये थी। इस तरह साल 2020-21 और 2021-22 के आंकड़ों को देखें तो एक साल में यूपी सरकार को 6147 करोड़ रुपये की अधिक कमाई शराब से हुई है। वहीं साल 2022-23 में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में लगभग 41,000 करोड़ का राजस्व कमाने का लक्ष्य रखा है।
तेलंगाना की कमाई कम नहीं
तेलंगाना भी शराब से भारी कमाई करती है। तेलंगाना सरकार अगर 100 रुपये राजस्व की कमाई करती है तो उसमें से 9.65 रुपये शराब पर लगे टैक्स से कमाती है। बता दें कि साल 2021-22 के संशोधित बजटीय अनुमानों के अनुसार, राज्य सरकार ने शराब की बिक्री से 31,225 करोड़ रुपये कमाए थे। वहीं 2022-23 के लिए तेलंगाना सरकार ने शराब से लगभग 37,500 करोड़ के राजस्व का अनुमान लगाया है।
हरियाणा की कमाई भी बहुत ज्यादा
The Daily Guardian के मुताबिक हरियाणा ने साल 2020-21 में 6791.98 करोड़ रुपये के मुकाबले साल 2021-22 में 7938.8 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व एकत्रित किया जोकि 17 प्रतिशत अधिक है। जबकि चालू वर्ष में 2022-23 में साल 2022-23 में 9200 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य है।
इसी तरह पश्चिम बंगाल में सरकार की कुल 100 रुपये कमाई में से शराब बेचकर 8.62 रुपये, मध्यप्रदेश में 7.35 रुपये, पंजाब में 7.35 रुपये, उत्तराखंड में 7.25 रुपये, राजस्थान में 7.19 रुपये और महाराष्ट्र में 5.28 रुपये की कमाई होती है।
राज्यों में पीने वालों का प्रतिशत
सर्वे कंपनी क्रिसिल (CRISIL) की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में दक्षिण भारत के पांच राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल देश में बिकी कुल शराब का करीब 45 प्रतिशत सेवन कर गए थे।
वहीं एक और आंकड़े के मुताबिक करीब 3 करोड़ जनसंख्या वाले प्रदेश छत्तीसगढ़ में करीब 35.6 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं। त्रिपुरा में 34.7 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें 13.7 प्रतिशत नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं। तीसरे नंबर पर शामिल आंध्र प्रदेश में करीब 34.5 प्रतिशत लोग शराब का नियमित सेवन करते हैं। इसके बाद 3 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में 28.5 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें नियमित शराब पीने वालों का आंकड़ा 6 प्रतिशत है। अरुणाचल प्रदेश में 28 प्रतिशत, गोवा में करीब 26.4 प्रतिशत, केरल में 19.9 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 14 प्रतिशत, तमिलनाडु में 15 प्रतिशत, कर्नाटक में करीब 11 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं।
शराब पीने को लेकर महिला और पुरुष की तुलना
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2022 के अनुसार पूरे देश में 18 प्रतिशत पुरुष (व्यस्क) शराब पीते हैं। इनमें से 16.5 प्रतिशत जहां शहरी इलाकों से हैं, वहीं 19.9 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के लोग हैं। जबकि देशभर में महिलाओं की कुल 1.3 प्रतिशत संख्या शराब पीती हैं। इसमें शहरी इलाकों में 0.6 प्रतिशत, जबकि ग्रामीण इलाकों की 1.6 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं।
पुरुषों के शराब पीने के मामले में सबसे ऊपर अरुणाचल प्रदेश (52.6 प्रतिशत), तेलंगाना (43 प्रतिशत), सिक्किम (39.9 प्रतिशत) शीर्ष राज्य हैं। इसके अलावा महिलाओं के मामले में भी अरूणाचल प्रदेश ही सबसे ऊपर है। यहां 24 प्रतिशत महिलाएं शराब पीती हैं। इसके बाद सिक्किम, असम और तेलंगाना का नंबर आता है।
कैसे तय होती है शराब की कीमत
दरअसल पेट्रोल और डीजल की तरह शराब पर भी जीएसटी लागू नहीं होती है इसलिए राज्य अपने हिसाब से एक्साइज या वैट लगाती है। कुल मिलाकर कहें तो शराब की कीमतें राज्य सरकार खुद तय करती हैं। वैसे शराब की कीमत तय करने के तीन-चार फार्मूले भी हैं, जो राज्य सरकारें अपनाती आईं हैं। महाराष्ट्र और गोवा में शराब की कीमत का फार्मूला ओपन मार्केट का है। इसमें कंपनियां दाम खुद तय करती हैं। सरकार को सिर्फ सूचना देनी होती है ताकि वह उसी हिसाब से एक्साइज ड्यूटी वसूले। वहीं हरियाणा और पंजाब में ऑक्शन सिस्टम है। इसमें कंपनियां ठेका उठाती हैं और अपने हिसाब से दाम तय करती हैं। तीसरा कॉरपोरेट तरीका है। इसमें राज्य सरकार दाम तय करती है और उस राज्य में शराब की हर एक बोतल सरकारी कंपनी के जरिए बेची जाती है। ओडिशा और राजस्थान समेत देश के दो तिहाई राज्यों में इसी तरीके से दाम तय किए जाते हैं।












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