Republic Day 2018: परेड का मुख्य आकर्षण होती है BSF के ऊंटों की टुकड़ी, जानिए खास बातें
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की परेड काफी खास होती है, इस परेड के चर्चे केवल भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी होते हैं। वैसे तो इस परेड के जरिए भारत अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करता है और परेड से जुड़ी हर चीज काफी निराली होती है। इसी निराली चीज में एक से है, ऊंटों की टुकड़ी, जिसे परेड में लाने के लिए बीएसफ काफी मेहनत करती है।
चलिए जानते हैं ऊंटों के दस्ते के बारे में विस्तार से...
- दरअअसल सीमा सुरक्षा बल की पहचान ऊंटों का दस्ता से ही होती है।
- ऊंटों के रंग-बिरंगे दस्ते का कोई जवाब नहीं होता है।
- करीब 40 सालों से यह ऊंट दस्ता परेड में शामिल होकर गणतंत्र दिवस की रौनक बढ़ाता रहा है।

इकलौता ऊंट दस्ता
- दुनिया का यह इकलौता ऊंट दस्ता है जो न केवल बैंड के साथ राजपथ पर प्रदर्शन करता है बल्कि सरहद पर रखवाली भी करता है।
- 90 ऊंटों की टुकड़ी पहली बार 1976 में गणतंत्र दिवस का हिस्सा बनी थी, जिसमें 54 ऊंट सैनिकों के साथ और शेष बैंड के जवानों के साथ थे।
- बीएसएफ देश का अकेला ऐसा फोर्स है, जिसके पास अभियानों और समारोह दोनों के लिए सुसज्जित ऊंटों का दल है।
- बीएसएफ के जवान इंडो-पाक बार्डर पर गश्त के लिए ऊंटों का प्रयोग करते हैं।
- सीमा सुरक्षा बल यानि कि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है।
- रेगिस्तान में बिना पानी के ऊंट काफी रह सकता है इसलिए इनका प्रयोग बीएसएफ वाले करते हैं।
- इन ऊंटों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।
- बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स का गठन 1 दिसम्बर 1965 में हुआ था।
- इस समय बीएसएफ की 188 बटालियन है।

ऊंटों का दल

विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल

बीएसएफ की 188 बटालियन

बीएसएफ के जवान
यह 6,385.36 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है जो कि पवित्र, दुर्गम रेगिस्तानों, नदी-घाटियों और हिमाच्छादित प्रदेशों तक फैली है।












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