Connaught Place: क्या दिल्ली का प्रसिद्ध कनॉट प्लेस अपनी चमक खोने लगा है, जानें इसका इतिहास
दिल्ली के दिल में बसे कनॉट प्लेस में कई दफ्तर अब खाली हो चुके हैं। इसकी वजह कनॉट प्लेस में फिलहाल चल रहे मरम्मत के काम हैं, क्योंकि जुलाई 2023 में दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन होने जा रहा है।

Connaught Place: दिल्ली के मुख्य आकर्षण में से एक राजधानी के दिल में बसा कनॉट प्लेस है। कभी दिल्ली आने वाले सैलानियों के मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहने वाली यह जगह अब अपनी चमक खोने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए इसकी साजो-सज्जा की जा रही है। हालांकि, यह पहली बार नहीं जब कनॉट प्लेस की मरम्मत की जा रही है। इससे पहले भी कई बार इसकी मरम्मत की जा चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कनॉट प्लेस कब बना था और कब-कब इसकी मरम्मत की गई?
क्या है कनॉट प्लेस?
नई दिल्ली की जान कहे जाने वाला कनॉट प्लेस दिल्ली का एक मशहूर शॉपिंग सेंटर है। कनॉट प्लेस को दो भागों- इनर सर्कल और आउटर सर्कल में बांटा गया है। इनर सर्कल में कई बड़े ब्रांड्स के शोरूम, हाई-एंड रेस्तरां, कैफे और बार हैं। जबकि आउटर सर्कल में ऑफिस और बैंक हैं। यह एक लोकप्रिय शॉपिंग डेस्टिनेशन होने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों का भी केंद्र है। कनॉट प्लेस के आसपास कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी मौजूद है, जिनमें जंतर-मंतर वेधशाला, और हनुमान मंदिर शामिल हैं। यह देश के संसद भवन और इंडिया गेट से भी महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है।
कब बना कनॉट प्लेस?
दिल्ली के दिल में बसा कनॉट प्लेस ब्रिटिश शासन के दौरान 20वीं शताब्दी की शुरुआत में डिजाइन और तैयार हुआ था। इसका नाम ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य ड्यूक ऑफ कनॉट और स्ट्रैथर्न के नाम पर रखा गया था। कनॉट प्लेस का निर्माण कार्य सन् 1929 में शुरू हुआ था और 1933 में पूरा हुआ। कनॉट प्लेस को ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट टोर रसेल ने डबल्यू. एच. निकोल्स के सहयोग से डिजाइन किया था, जो उस समय भारत में ब्रिटिश सरकार के लोक निर्माण विभाग के मुख्य इंजीनियर थे। कनॉट प्लेस का डिजाइन इंग्लैंड में मौजूद बिल्डिंग रॉयल क्रीसेंट और रोमन कोलोसियम से प्रेरित था। भारतीय स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों के दौरान, कनॉट प्लेस दिल्ली में आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।
कब-कब हुई इसकी मरम्मत?
पिछले कुछ दिनों से कनॉट प्लेस में जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण का काम चल रहा है। इस सौंदर्यीकरण में दीवारों की सफेदी करना, इनर और आउटरसर्कल को रंगना, और कनॉट प्लेस की सड़कों और इमारतों की मरम्मत करना शामिल है। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के मुताबिक, इस समय कनॉट प्लेस में हो रही मरम्मत का खर्चा 3.19 करोड़ रुपये के करीब है। नगर पालिका परिषद के कर्मचारी के मुताबिक, इसके सौंदर्यीकरण का काम जुलाई 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। जुलाई में ही दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। कनॉट प्लेस की मरम्मत इससे पहले 2010 में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले की गई थी।
क्या है कनॉट प्लेस रिडेवलपमेंट प्लान?
कनॉट प्लेस के लिए पुनर्विकास योजना (Redevelopment Plan) की शुरुआत 2005 में की गई थी और इसकी लागत लगभग ₹80 करोड़ थी। इस पुनर्विकास योजना को 2010 तक समाप्त होना था क्योंकि उस वर्ष राष्ट्रीय राजधानी में कॉमनवेल्थगेम्स आयोजित किए जाने थे। योजना का मकसद कनॉट प्लेस की मरम्मत करना और उसे फिर से सुंदर बनाना था। उस समय कनॉट प्लेस (सीपी) को बने हुए 70 साल से भी ज्यादा हो गए थे और इसकी मरम्मत की आवश्यकता थी। कॉमनवेल्थ गेम से पहले इसकी मरम्मत पुनर्विकास परियोजना इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) के सहयोग से की गई थी। हालांकि, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने इस परियोजना को विफल बताया।
कनॉट प्लेस में मौजूद हैं कितने ऑफिस?
Housing.com की रिपोर्ट के मुताबिक, कनॉट प्लेस में फिलहाल लगभग 412 से भी ज्यादा ऑफिस मौजूद हैं। ये ऑफिस कनॉट प्लेस की इनर और आउटर सर्कल की अलग-अलग बिल्डिंगों में स्थित हैं। ये सभी ऑफिस अलग-अलग सेक्टर के उद्योगों से संबंधित हैं, जिनमें वित्त, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, कानूनी सेवाएं, मीडिया आदि शामिल हैं। दिल्ली का सेंटर प्वाइंट होने की वजह से कनॉट प्लेस में ऑफिस या दुकान किराए पर लेने का खर्च बहुत ज्यादा है। इकोनामिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कनॉट प्लेस में दुकान या ऑफिस लेने का मौजूदा किराया ₹900 प्रति वर्ग फीट है, जो इसे दुनिया के सबसे महंगे प्रॉपर्टीज में से एक बनाता है।
कब हुआ बम धमाका?
13 सितंबर, 2008 को, राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के बीचों-बीच भीड़-भाड़ वाले बाजारों और सड़कों पर पांच बम विस्फोट हुए, जिनमें 30 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। इन बम धमाकों में से दो बम धमाके कनॉट प्लेस में किए गए थे। इनमें से एक धमाका दिल्ली मेट्रो के भूमिगत मेट्रो स्टेशन, राजीव चौक के ऊपर बने कनॉट प्लेस गोलचक्कर के केंद्र में बने पार्क में किया गया था। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल में रखे कचरे के डिब्बे में ये बम धमाके हुए थे, जिसकी वजह से दिल्ली दहल उठी थी।
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