Parkash Singh Badal: आजादी के साथ शुरू हुई ‘बादल’ की राजनीति, जानें कुछ ‘अनकहीं बातें’
पंजाब की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को हुआ था और उनका निधन 25 अप्रैल 2023 को पंजाब के मोहाली में हुआ।

Parkash Singh Badal: पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल का 25 अप्रैल (मंगलवार) को मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 95 वर्षीय प्रकाश सिंह बादल उम्र के लिहाज से भारत के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। वह 1996 से 2008 तक शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष भी रहे थे।
बता दें कि देश के सबसे वरिष्ठ राजनेताओं में से एक प्रकाश सिंह बादल का पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों के नेता सम्मान करते थे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पैर छूते थे। वहीं 2017 में मुख्यमंत्री का उनका पांचवां कार्यकाल जब पूरा हुआ, तब वह 90 साल के थे। इस तरह वह भारत के किसी भी राज्य के सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री बने। अभी भी यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है। आज हम आपको प्रकाश सिंह बादल से जुड़े कुछ इसी तरह के अनोखे तथ्य बताते हैं।
आजाद देश में प्रकाश सिंह बादल बने सरपंच
एक तरफ देश आजाद हुआ और दूसरी तरफ प्रकाश सिंह बादल ने साल 1947 में राजनीति की शुरुआत की। इसी दौरान प्रकाश सिंह बादल ने अपने पिता रघुराज सिंह की तरह सरपंच का चुनाव लड़ा और वह महज 20 साल की उम्र में सरपंच बन गये। तब वह सबसे कम उम्र के सरपंच बने थे। उसके बाद उन्हें लांबी ब्लॉक समिति का अध्यक्ष बनाया गया था।
पांच बार बने पंजाब के मुख्यमंत्री
प्रकाश सिंह बादल पंजाब में 18 साल 340 दिन मुख्यमंत्री पद पर रहे। पहली बार वह 27 मार्च 1970 से 14 जून 1971 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद दूसरी बार वह 20 जून 1977 से 17 फरवरी 1980 तक मुख्यमंत्री रहे। तीसरी बार 12 फरवरी 1997 से 26 फरवरी, 2002 तक सीएम बने। चौथी बार 1 मार्च 2007 से 15 मार्च 2012 और पांचवी बार 16 मार्च 2012 से लेकर 16 मार्च 2017 तक प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री पद पर रहे।
यहां बता दें कि चौथा और पांचवा कार्यकाल मिलाकर लगातार वह 10 साल 15 दिन सीएम पद पर रहे। ऐसा पंजाब में किसी एक शख्स द्वारा मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का रिकॉर्ड है।
देश के सबसे युवा और बुजुर्ग मुख्यमंत्री
प्रकाश सिंह बादल ने 1969-70 का मध्यावधि चुनाव अकाली दल के टिकट पर लड़ा और पंजाब की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में मंत्री बने। तब जस्टिस गुरनाम सिंह की यह सरकार जनसंघ के सहयोग से बनी थी और दूसरी बार विधायक बने प्रकाश सिंह बादल इस सरकार के विकास विभाग के मंत्री बने। उन्होंने पंचायती राज, पशुपालन, मत्स्य पालन और डेयरी मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। लेकिन, 1970 में राज्यसभा चुनाव के दौरान अकाली उम्मीदवार की हार के कारण, अकाली (फतेह सिंह गुट) दल के तत्कालीन अध्यक्ष संत फतेह सिंह ने जस्टिस गुरनाम सिंह को बर्खास्त कर दिया और प्रकाश सिंह बादल को मुख्यमंत्री बनाया गया। तब 43 वर्षीय प्रकाश सिंह देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।
वहीं 2007 से 2012 और 2012 से 2017 के बीच लगातार दो बार मुख्यमंत्री बनकर प्रकाश सिंह बादल ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले पंजाब के पहले मुख्यमंत्री बने थे। फरवरी 2017 में अकाली दल की हार के बाद प्रकाश सिंह बादल ने जब इस्तीफा दिया, तब उनकी उम्र 90 साल थी। यह भी रिकॉर्ड है कि मुख्यमंत्री पद संभालने वाले सबसे बुजुर्ग शख्स भी बादल ही बने।
जीवन में दो बार चुनाव हारे प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल ने साल 1967 में गिद्दड़बाहा क्षेत्र से अकाली दल (संत फतेह सिंह ग्रुप) से पर्चा भरा लेकिन उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार एच. सिंह ने मात्र 57 वोटों से परास्त कर दिया। यह उनकी पहली हार थी। लेकिन उसके बाद 1969 से लेकर 2017 तक उन्होंने कोई चुनाव नहीं हारा। हालांकि, साल 2022 के विधानसभा चुनाव में वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुरमीत सिंह खुदिया से चुनाव हार गये। यह उनका अंतिम चुनाव था। इस दौरान वह श्री मुक्तसर साहिब जिले के लांबी विधानसभा सीट से खड़े हुए थे। यह सीट उनके परिवार की पारंपरिक सीट रही है। बता दें कि 2022 के पंजाब चुनाव में खुदियां को 66,313 वोट मिले थे, जबकि प्रकाश सिंह बादल को 54,917 वोट ही मिले थे।
भारत के 'नेल्सन मंडेला' थे बादल
अक्टूबर 2015 की बात है। जब पीएम नरेंद्र मोदी ने जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में पंजाब के तत्कालीन सीएम प्रकाश सिंह बादल को 'भारत का नेल्सन मंडेला' की संज्ञा दे दी थी। तक पीएम मोदी ने कहा था कि बादल भारत के नेल्सन मंडेला हैं। बादल साहब जैसे लोगों का एकमात्र अपराध यह था कि उनके राजनीतिक विचार सत्ता में बैठे लोगों से अलग थे।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत तौर पर प्रकाश सिंह बादल का बहुत आदर करते थे। कई बार सार्वजनिक मंचों पर पीएम मोदी उनके पैर छूते दिख जाते थे। वहीं 2019 में जब लोकसभा चुनाव थे, तब नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से ठीक पहले कलेक्ट्रेट में शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के पैर छुए थे। वहीं जब मई 2019 में 17वीं लोकसभा चुनाव जीते तब भी पीएम मोदी ने सेंट्रल हॉल में सबके सामने उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया था।
पीएम बनने से पहले ही मोदी की तारीफ करते थे 'बादल'
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प्रकाश सिंह बादल ने 2013 में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल एग्रीकल्चर के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में कहा था कि "मोदीजी आप खुद को केवल गुजरात तक ही सीमित न समझें। आपको वाइब्रेंट गुजरात नहीं लिखना चाहिए, आपको वाइब्रेंट भारत लिखना चाहिए, आगे बढ़िए। गुजरात वह राज्य है जिसने महात्मा गांधी को जन्म दिया, जिसने हमें सरदार पटेल दिया और अब इसने हमारे देश को 'सरदार' मोदी दिया है।"
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