Dharavi: मुंबई में धारावी का पुनर्निर्माण शुरू, जानें दुनिया के अन्य बड़े स्लम एरिया का हाल
Dharavi: धारावी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में सबसे पहले झुग्गी झोपड़ी की तस्वीर आती होगी, जिसे एशिया का सबसे बड़ा स्लम एरिया माना जाता है। 239 हेक्टेयर के एरिया में फैली धारावी की आबादी 7 लाख से 10 लाख के बीच है, जिसकी वजह से इसे दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला इलाका भी माना जाता है।
मुंबई में बसे धारावी में छोटी छोटी गलियां, झुग्गी, झोपड़ी और छोटे छोटे व्यवसाय मौजूद हैं, जो शहर की व्यापारिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाता है। आज धारावी एक घनी आबादी वाला इलाका है, लेकिन कई साल पहले यह इलाका एक आईलैंड हुआ करता था।

मछुआरों ने बसाया था धारावी
शुरुआत में मछुआरों ने धारावी में रहना शुरू किया और देखते ही देखते यह पूरा इलाका आबाद होने लगा। लोगों की बढ़ती आबादी की वजह से आज धारावी एशिया के सबसे बड़े स्लम एरिया में तब्दील हो चुका है।
धारावी की नींव ब्रिटिश काल के दौरान सन् 1884 में रखी गई थी, जब अंग्रेजों ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुंबई शहर से हटाना शुरू कर दिया था। ऐसे में जिन लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं था या फिर वह मुंबई में महंगा किराया नहीं दे सकते थे, उन्होंने धारावी में रहना शुरू कर दिया था।
मुंबई का 60 फीसदी कचरा होता है रिसाइकिल
धारावी में भले ही आबादी बहुत ज्यादा है और लोग छोटी छोटी झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं, लेकिन यहां के लोगों के पास व्यवसाय की कमी नहीं है। धारावी में मुंबई शहर का लगभग 60 फीसदी प्लास्टिक कचरा रिसाइकिल किया जाता है, जबकि यहां चमड़े का एक बड़ा मार्केट भी है और चमड़े के कारखाने में सैकड़ों लोग काम करते हैं।
अडानी की कंपनी बदलेगी धारावी की सूरत
धारावी में घनी आबादी निवास करती है, लेकिन यहां शिक्षा, स्वास्थ्य और साफ सफाई की कमी देखने को मिलती है। ऐसे में भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी ने धारावी की किस्मत को बदलने का फैसला किया है।
इसके लिए गौतम अडानी की कंपनी अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर धारावी में रिडेवलमेंट का काम शुरू करेगी, जिसके लिए साल 2022 में टेंडर को मंजूरी दी गई थी। धारावी में आम लोगों के घरों के साथ 12 हजार से ज्यादा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स हैं, इसलिए धारावी में गंदगी की मात्रा काफी ज्यादा है।
बीमारी और गंदगी के बीच रहते हैं लोग
धारावी इलाके में वायरस और बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा रहता है, जबकि जगह जगह पानी के जमाव और मच्छरों की पैदावार बढ़ने की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं इलाके में रहने वाले लगभग 80 प्रतिशत लोग पब्लिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
दरअसल झुग्गी झोपड़ी वाला इलाका होने की वजह से धारावी के लोगों के पास पर्सनल टॉयलेट की सुविधा नहीं है, जबकि यहां अच्छे अस्पताल, स्कूल और पीने के साफ पानी की कमी है। ऐसे में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि अडानी ग्रुप कैसे इतने बड़े धारावी में रिडेवलपमेंट का काम पूरा करेगा।
कई बार महामारी की मार झेल चुका है धारावी
साल 1896 में दुनिया के ज्यादातर देशों में प्लेग नामक महामारी फैली थी, जबकि इस बीमारी की चपेट में धारावी भी आया था। उस वक्त धारावी की आबादी देश के अन्य इलाकों से ज्यादा थी, इसलिए वहां रहने वाले लोग प्लेग की चपेट में आ गए थे और कई लोगों ने बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा दी थी।
इसी तरह साल 1986 में धारावी में हैजा का प्रकोप बढ़ गया था, जिसकी वजह से कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी। वहीं साल 2020 में कोरोना महामारी की वजह से भी धारावी के हालात काफी खराब हो गए थे, जबकि यहां रहने वाले कई लोग अब भी घातक बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है
धारावी में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है, जिसमें स्मलडॉग मिलियनेयर और गली बॉय जैसी सुपर हिट फिल्म का नाम भी शामिल है। वहीं एशिया की सबसे बड़ी बस्ती होने की वजह से धारावी में हर साल कई पर्यटक घूमने के लिए आते हैं, जबकि धारावी में सोशल वर्क भी बड़े पैमाने पर किए जाते हैं।
अन्य देशों में भी हैं बड़ी झुग्गी बस्तियां
साउथ अफ्रीका के केप टाउन में स्थित ख़येलित्शा की गिनती दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में की जाती है, जिसमें लगभग 4 लाख लोग रहते हैं। सामाजिक शोध से पता चलता है कि ख़येलित्शा में लगभग 12 हजार लोगों के घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है। इस वजह से महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि बस्ती में गंदगी और कूड़े के ढेर भी काफी ज्यादा हैं।
केन्या
अफ्रीका की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती केन्या के नैरोबी शहर में स्थित है, जिसे किबेरा के नाम से जाना जाता है। इस बस्ती में लगभग 50 हजार से ज्यादा बच्चे रहते हैं, जो अनौपचारिक रूप से चलाए जा रहे स्कूलों में पढ़ते हैं। इस बस्ती पर कई बार बुलडोजर चलाने की कोशिश की गई है, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामला अदालत में पहुंच गया।
मैक्सिको
मैक्सिको में स्थित स्यूदाद नेज़ा भी एक बड़ी झुग्गी बस्ती है, जहां रहने वाले ज्यादातर लोग अपराध की चपेट में आ चुके हैं और इस वजह से इस बस्ती को मैक्सिको के सबसे खतरनाक इलाकों में से एक माना जाता है।
पाकिस्तान
पाकिस्तान के कराची शहर में भी एक झुग्गी बस्ती है, जिसे ओरंगी टाउन के नाम से जाना जाता है। इस बस्ती में बेशुमार गंदगी और बीमारी है, जिसकी वजह से बस्ती में रहने वाले लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। इस बस्ती में मौजूद सीवर पाइप खुद स्थानीय लोगों द्वारा डाले गए हैं, लेकिन आम लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ता है।












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