2000 Rupee Note: क्या 2000 का नोट कालाधन बढ़ा रहा है, जानें ब्लैक मनी में कितने हैं 2000 के नोट?
नोटबंदी के दौरान 2000 के नोटों को लेकर तर्क दिया गया था कि इससे कालेधन पर रोक लगेगी। लेकिन बीते कुछ सालों में छापेमारी के दौरान जब्त हुए 2000 के नोटों ने इस बात को झूठा साबित कर दिया है।

2000 Rupee Note: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2 मई 2023 को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जल शक्ति मंत्रालय से जुड़ी वॉटर एंड पावर कंसल्टेंसी के सीएमडी रहे राजेंद्र कुमार गुप्ता के आवास पर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस छापेमारी के दौरान पूर्व सीएमडी के आवास समेत अन्य स्थानों से करीब 20 करोड़ रुपये की नकदी मिले। जिसमें भारी मात्रा में 2000 के नोट बरामद हुए।
अब सवाल ये उठता है कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी का ऐलान किया था, जिसके बाद उसी दिन आधी रात से 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर कर दिये गये थे। ताकि कालेधन पर लगाम लगाई जा सके, लेकिन पिछले कुछ सालों में लगातार ईडी व अन्य एजेंसियों के छापेमारी में भारी मात्रा में 2000 के बड़े नोट बरामद किये गये हैं। तो क्या 2000 के नोट काला धन जमा करने में उपयोग हो रहे हैं?
'2000 के नोट का मतलब कालाधन'
इस पर 12 दिसंबर 2022 को राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कहा कि 2000 रुपये के मूल्यवर्ग के नोटों का कालाधन के रूप में उपयोग हो रहा है। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। बाजार में 2000 रुपये के नोट मिलना मुश्किल है, ये आजकल एटीएम में भी नहीं मिलते। पिछले तीन सालों से आरबीआई ने इसकी छपाई बंद कर दी है और बड़ी संख्या में 2,000 रुपये के नकली नोट जब्त किये जा रहे हैं। 2000 के नोट का मतलब है काला धन और जमाखोरी।
आखिर कहां गए 2000 रुपये के नोट?
हालांकि, ये बात सच है कि 2000 के नोट अब बाजारों में ज्यादा चलन में नहीं हैं। साल 2017-18 के दौरान बाजार में 2000 के 33,630 लाख नोट चलन में थे। इनका कुल मूल्य ₹6.72 लाख करोड़ था। रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2017 को सर्कुलेशन वाले नोट की कुल वैल्यू में 2000 रुपये के नोट की हिस्सेदारी 50.2 फीसदी थी। वहीं, 31 मार्च 2022 को सर्कुलेशन वाले कुल नोट की वैल्यू में 2000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी घटकर 13.8 फीसदी थी। यहां यह स्पष्ट कर दें कि रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट को बंद नहीं किया है। हां, सरकार की ओर से यह बताया गया है कि इसकी छपाई नहीं की जा रही है लेकिन नोट बंद करने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है।
2000 के नोटों का 'काला सच'?
नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी भी कई बार बता चुकी है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश व म्यांमार से 2,000 रुपये के जाली नोट बड़ी संख्या में भारतीय बाजार में पहुंचाए जा रहे हैं। इन नोटों की पहचान करना भी आसान नहीं है। जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और फाइनेंशल इंटेलिजेंस यूनिट ने भी सरकार को गैर कानूनी गतिविधियों के लिए 2,000 रुपये के नोटों को जमा किए जाने का चलन बढ़ने की रिपोर्ट दी थी। जबकि इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय के जितने भी छापे हुए हैं, वहां जब्त किये गये नोटों में अधिकतर 2,000 रुपये के ही नोट होते हैं। इससे यह साबित होता है कि टैक्स चोरी, आर्थिक अपराधों में 2000 के नोटों का चलन ज्यादा है।
2000 के करोड़ों नकली नोट मिले?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से देश की कई एजेंसियों ने तकरीबन ₹245.33 करोड़ के नकली नोट बरामद किये हैं। साल 2021 में ₹20.21 करोड़ के 3.10 लाख से ज्यादा नकली नोट जब्त किये गये। इससे पहले साल 2020 में ₹92.17 करोड़ के 8.34 लाख नकली नोट पकड़े गये थे। साल 2019 में ₹34.79 करोड़, साल 2018 में ₹26.35 करोड़ और 2017 में ₹55.71 करोड़ नकली करेंसी बरामद की गयी थी। जबकि नोटबंदी वाले साल यानी 2016 में जांच एजेंसियों ने ₹15.92 करोड़ पकड़े थे।
वहीं साल 2021-2022 में आरबीआई ने नकली नोटों पर एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया कि साल 2020-2021 के मुकाबले साल 2021-2022 में नकली नोटों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसमें 10 रुपये के नकली नोट में 16.4 प्रतिशत, 20 रुपये के नकली नोट में 16.5 प्रतिशत, 200 रुपये के नकली नोट में 11.7 प्रतिशत, 500 रुपये के नकली नोट में 101.9 प्रतिशत और 2000 रुपये के नकली नोट में 54.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल थी। दरअसल, ये वे नकली नोट हैं जो बैंकिंग सिस्टम में पकड़े गये यानी, बैंकों में नकली नोट आये थे। इनमें से 6.9 प्रतिशत नकली नोट आरबीआई में और 93.1 प्रतिशत नकली नोट दूसरे बैंकों में पकड़े गये थे।
बीते कुछ सालों की छापेमारी में मिले 2000 के कई नोट
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीते साल 2022 में अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया था कि अप्रैल 2014 से मार्च 2022 के बीच 3,555 केस दर्ज किये और 99 हजार 355 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। हालांकि, यहां गौर करने वाली बात यह है कि कभी भी ईडी, आईटी विभाग, जीएसटी इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट जनरल (DGGI) ने छापेमारी के बाद यह स्पष्ट रूप से कभी नहीं बताया कि आखिर कितने नोट 500 के थे और कितने नोट 2000 के थे। एक मोटा-मोटा कुल आंकड़ा ही गिनवा देते हैं। चूंकि 500 रुपए के नोट के मुकाबले 2000 रुपए के नोट की कीमत चार गुणा होती है तो यदि जब्त किए गए नोटों में 500 और 2000 के नोट बराबर संख्या में हों, तब भी कुल जब्त राशि में 2000 के नोटों का मूल्य लगभग 80 प्रतिशत होगा। अर्थात कुल जब्त कालाधन जो लगभग एक लाख करोड़ रुपए था, उसमें 80 हजार करोड़ रुपए तो 2000 के नोटों में ही था।
10 दिसंबर 2016 - नोटबंदी के बाद तमिलनाडु के आयकर अधिकारियों ने वेल्लूर में एक कार से 24 करोड़ के 2000 रुपये के नये नोट जब्त किये थे। वहीं आयकर विभाग ने एक लिखित बयान में कहा कि सूबे में बीते कुछ समय दिनों में छापेमारी के दौरान ₹96.9 करोड़ के पुराने नोट, ₹9.63 करोड़ के 2000 के नये नोट और करीब ₹36.29 करोड़ का सोना जब्त किया गया था।
18 जुलाई 2018 - चेन्नई में आयकर विभाग ने 'ऑपरेशन पार्किंग मनी' के नाम से एक ऑपरेशन चलाया। इसमें आयकर विभाग ने ₹100 करोड़ कैश और 90 किलो सोना बरामद किया था। यह छापा चेन्नई में सड़क ठेकेदार नागराजन सेय्यदुरई की कंपनी एसकेजी ग्रुप के दफ्तरों पर मारा गया था।
दिसंबर 2021 - कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर से ₹175 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई। साथ ही 23 किलो सोना और 600 किलो से अधिक चंदन का तेल (लगभग ₹6 करोड़ का) बरामद किया गया।
19 जनवरी 2022 - ईडी ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक रिश्तेदार के पास से ₹10 करोड़ से अधिक की नकदी जब्त की।
7 मई, 2022 - ईडी ने झारखंड में मनरेगा कोष में 18 करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन से जुड़े मामले में झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की। रांची में दो परिसरों पर छापेमारी के दौरान कुल ₹19.31 करोड़ की नकदी मिली।
7 जून, 2022 - ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी पूनम जैन और उनके सहयोगियों और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल दूसरे लोगों के घरों से ₹2.82 करोड़ नकद और 1.8 किलो सोना जब्त किया।
15 जुलाई 2022 - ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी पंकज मिश्रा और उसके सहयोगियों के 37 बैंक खातों से ₹11.88 करोड़ जब्त किये।
28 जुलाई 2022 - ईडी ने शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के आवास से छापा मारकर करीब ₹55 करोड़ की नकदी और जेवरात बरामद किये थे।
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10 सितंबर, 2022 - ईडी ने कोलकाता के गार्डनरीच इलाके में एक कारोबारी के घर छापेमारी कर ₹17.32 करोड़ कैश बरामद किये।
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