Rashida Tlaib: अमेरिका में इजरायल के खिलाफ मुस्लिम आवाज बनी रशीदा तलीब

रशीदा तलीब अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट मेंबर हैं, जो खुले रूप में फिलिस्तीन और हमास का समर्थन करती हैं। भले ही अमेरिका हमास के साथ लड़ाई में घोषित रूप से इजरायल का समर्थन कर रहा है, अपने सैनिक और वारशिप भी भेज रहा है। लेकिन रशीदा तलीब नेतन्याहू के समर्थन की घोर निंदा करती है। इसके लिए वह अपने ओहदे को भी दांव पर लगाने में हिचक नहीं दिखाती। उन्होंने 18 अक्टूबर को हमास के समर्थन में जनसभा की।

राष्ट्रपति जो बाइडेन को ललकारते हुए रशीदा तलीब ने नेतन्याहू की सहायता को उनका व्यक्तिगत फैसला बताया। जवाब में अमेरिकी कांग्रेस में उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया, लेकिन तब रिपब्लिकन पार्टी के 23 सदस्यों ने ही उनका बचाव किया और उनके पक्ष में मतदान कर निंदा प्रस्ताव को पास नहीं होने दिया।

Rashida Tlaib becomes Muslim voice against Israel in America hamas

कट्टर इजरायल विरोधी
1 नवंबर को अमेरिकी कांग्रेस में रशीदा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव के विरोध में 222 मत पड़े जबकि समर्थन में 186 मत। इस तरह से रशीदा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव बिना बहस के ही खारिज हो गया। पर रशीदा अपने कहे पर अब भी कायम हैं। वह अमेरिका में मुस्लिम आवाज की पहचान बन गई हैं। वह भारत के खिलाफ भी बोल चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी का बहिष्कार कर चुकी हैं। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध कर चुकी हैं। इजरायल इन्हें अपने यहां आने पर पाबंदी लगा चुका है।

7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला कर लगभग 1400 लोगों को मार दिया और 200 से अधिक लोगों को अगवा कर लिया। जवाब में इजरायल ने गाजा पट्टी पर बमबारी शुरू कर दी, क्योंकि हमास का मुख्यालय वहीं है और वहीं से हमास के आतंकवादी अपनी गतिविधियां चलाते हैं। इजरायल पर हमास के हमले को अमेरिका ने भी आतंकवादी कार्रवाई माना और इजरायल की जवाबी कार्रवाई को पूरा समर्थन देने की घोषणा की। राष्ट्रपति जो बाइडेन खुद तेल अबीब जाकर अपना समर्थन जता आए।

बाइडेन को चुनौती
इस बीच 17 अक्टूबर को गाजा के एक अस्पताल में एक बम गिरा जिसमें कहा गया कि 500 लोग मारे गए। हमास ने यह कह कर प्रचारित किया कि इजरायल ने जानबूझ कर निहत्थे लोगों की बम मारकर हत्या की है, मगर इजरायल ने कहा कि हमास के ही राॅकेट मिस फायर हुए और उसी से इतने लोगों की जान गई। 18 अक्टूबर को रशीदा तलीब ने एक सार्वजनिक सभा करके राष्ट्रपति जो बाइडेन को ललकारते हुए कहा था कि मैं यह समझाना चाहती हूं मिस्टर बाइडेन कि नेतान्यहू को मदद करने का फैसला आपका अपना हो सकता है, यह अमेरिका का फैसला नहीं हो सकता। यह समय जागने का है। हम ऐसे ही लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते। हालांकि रशीदा ने कभी भी हमास के हमले की निंदा नहीं की।

अपने ही हैं रशीदा के खिलाफ
रशीदा तलीब के इस भाषण को लेकर अमेरिका में कड़़ी प्रतिक्रिया हुई। यहां तक कि तलीब के सहकर्मियों ने उनका यह भाषण यहूदी विरोध करार दिया। तलीब की आलोचना डेमोक्रेटिक समर्थकों ने भी करनी शुरू कर दी। मिशिगन की प्रतिनिधि रशीदा तलीब खुद डेमोक्रेट हैं। रशीदा इजरायल विरोध में इतना आगे निकल गई हैं कि उन्होंने इजराइल और हमास के बीच संघर्ष विराम के एक प्रस्ताव को प्रायोजित किया। लेकिन एक डेमोक्रेटिक इजराइल समर्थक समूह ने ही टेलीविजन विज्ञापनों के जरिए रशीदा तलीब का विरोध करना शुरू कर दिया। विज्ञापन में कहा गया कि संघर्ष विराम का फायदा हमास आतंकवादी खुद के लिए फिर से हथियार जुटाने में करेंगे।

तलीब खुद फिलिस्तीनी अमेरिकी हैं और अभी भी उनके परिवार के लोग फिलीस्तीन में रहते हैं। मार्च 2020 में भी तलीब ने फिलिस्तीन के लिए अमेरिकी मुसलमानों की एक बड़ी बैठक की जिसमें वेस्ट बैंक को इजरायल के कब्जे से मुक्त कराने और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए वापसी के अधिकार के समर्थन का प्रस्ताव किया गया।

मोदी का भी विरोध कर चुकी है रशीदा
रशीदा तलीब का विरोध इजरायल तक सीमित नहीं है। बल्कि वह इस्लामिक मुल्कों और इस्लामफोबिया के बारे में भी लगातार बोलती रहती हैं। अभी जुलाई में अमेरिका के दौर पर जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गए थे तो रशीदा ने इस्लाम के नाम पर मोदी का विरोध किया था। 18 जुलाई 2023 को अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त सभा को मोदी ने संबोधित किया था जिसका ऐलानिया बायकाट रशीदा तलीब ने किया था। अगले दिन 19 जुलाई को एक प्रेस कांफ्रेंस में रशीदा तलीब ने कहा था कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने अपने कुछ डेमोक्रेट साथियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि वह यह मानती हैं कि यह जगह समाज में विद्वेष फैलाने वालों को मान्यता देने की नहीं है।

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का भी किया था विरोध
5 सितंबर 2019 को भारत ने जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा समाप्त करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया था। देश भर में इस फैसले की सराहना हुई, लेकिन अमेरिकी डेमोक्रेट रशीदा तलीब ने इसका खुला विरोध किया था। उन्होंने सितंबर 2019 में कहा था - "यद्यपि मेरे मन में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ इसके महत्वपूर्ण संबंधों के प्रति गहरा सम्मान है, मैं भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35 ए को रद्द करने, उसके द्वारा लगाए गए संचार नाकाबंदी, दमन और बड़े पैमाने पर मानवाधिकार के हनन की रिपोर्टों की निंदा करती हूं।

जम्मू-कश्मीर में हिंसा, अत्याचार और अन्य मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। ये अस्वीकार्य कार्रवाइयां कश्मीरियों की मानवीय गरिमा को छीन लेती हैं, लाखों लोगों को खतरे में डालती हैं, और भारत और कश्मीर में लोकतंत्र को गंभीर रूप से कमजोर करती हैं।"

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