आंसू बहाने वाला 'राजू' बन गया सुपरस्टार, विजय अमृतराज बनाएंगे फिल्म
नई दिल्ली। आपको वह हाथी राजू तो याद ही होगा, जिसे जुलाई माह में एक एनजीओ ने 50 वर्ष के बाद रिहा कराया था और रिहा होने पर जब राजू रोया तो उसके आंसूओं ने कई पत्थर दिलों को भी पिघला दिया था।
हॉलीवुड की प्रेरणा राजू
राजू ने न सिर्फ कई लोगों को काफी कुछ सोचने पर मजबूर किया है बल्कि अब उसकी कहानी ने हॉलीवुड के फिल्ममेकर्स को भी प्रेरित कर दिया है।
अमेरिका के फिल्म मेकर लैरी ब्रेजनर और भारतीय मूल के फिल्ममेकर और पूर्व टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज ने फैसला किया है कि वह जल्द ही राजू पर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं।
राजू को एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस ने रिहा कराया था। एनजीओ की टीम को भारत से बाहर यूके में इसकी वॉलेंटियर पूजा बिनपाल लीड करती हैं और अमेरिका में निक्की शार्प इसका नेतृत्व करती हैं।
दुनियाभर में मशहूर हुआ राजू का रेस्क्यू
राजू के रेस्क्यू ऑपेरशन के बारे में पूरी दुनिया में खूब चर्चा हुई थी। राजू को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से बचाया गया था और फिलहाल उसे मथुरा के एलीफेंट कंजर्वेशन एंड केयर सेंटर में रखा गया है।
एनजीओ की संस्थापक गीता और कार्तिक से अमेरिकी फिल्ममेकर्स ने संपर्क साधा और फिर उनके सामने राजू के रेस्क्यू ऑपरेशन पर एक फिल्म बनाने का प्रस्ताव रखा।
इस पूरे मामले पर गीता का कहना है कि उन्हें यह जानकार काफी खुशी है कि राजू को बचाने के लिए जो भी प्रयास किए गए उसे इस कदर सराहा जा रहा है।
फिल्म बदलेगी हाथियों की किस्मत
गीता को उम्मीद है कि यह फिल्म भारत में हाथियों की दशा को बदलने में काफी कारगर साबित होगी। गीता की मानें तो भारत हाथियों को बुरी तरह से प्रताड़ित किया जाता है और कभी-कभी तो उन्हें इतने अमानवीय हालातों में रखा जाता है कि सोच के ही सिहरन हो जाती है।
वहीं कार्तिक की मानें तो राजू की कहानी वाकई काफी प्रेरणा देने वाली है और यह भारत में हाथियों की दुर्दशा और उनके दर्द को लोगों के सामने लाने में काफी अहम साबित होगी।
इंतजार बहुत मुश्किल
कैलिफोर्निया की एक फिल्म कंपनी के मालिक और किसी जमाने में टेनिस के कोर्ट पर भारत का नाम रोशन करने वाले विजय अमृतराज कहते हैं कि राजू की कहानी हमें काफी अच्छी लगी और हम इस पर फिल्म बनाने के लिए एक भी पल इंतजार नहीं कर सकते हैं।
राजू के ऊपर जो फिल्म बनाई जा रही है उस फिल्म में दिखाया जाएगा कि कैसे गीता और कार्तिक के साथ एनजीओ की टीम ने कई चुनौतियों का सामना करने के बाद राजू की जान बचाई।
राजू को जब 50 वर्ष बाद आजादी मिली थी तो उसके आंसू निकल पड़े। राजू को रोता देख एनजीओ की पूरी टीम भी रोई थी। राजू के उस एक पल ने उसे पूरी दुनिया में हीरो बना दिया था और अब वह पर्दे पर भी हीरो बनने के लिए पूरी तरह से तैयार है।













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