Rajasthan Politics: कितनी संभावनाएं है राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ थर्ड फ्रंट की?
राजस्थान में चुनावों की सरगर्मी दिखने लगी है। इस बार भाजपा और कांग्रेस को टक्कर देने के लिए समाजवादी पार्टी, आरएलपी, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी एक छत के नीचे आने की तैयारी में है।

Rajasthan Politics: पुरानी कहावत है - तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा। इसी 'थर्ड' ने राजस्थान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस और भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों के सियासी घटनाक्रमों ने 'टू पार्टी स्टेट' कहे जाने वाले राजस्थान में थर्ड फ्रंट (तीसरे मोर्च) की चर्चाएं होने लगी हैं। चुनावी चौसर बिछनी शुरू हो गई है। इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर जहां भाजपा और कांग्रेस ने अपने चुनावी घोड़े खोल दिए हैं तो वहीं अब राजस्थान में थर्ड फ्रंट को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ पार्टियां लामबंद हो रही हैं। इसके लिए सियासी जोड़ तोड़ की कवायद जोरों पर है।
बेनीवाल ने शुरू की एक्सरसाइज
नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल थर्ड फ्रंट को लेकर सियासी एक्सरसाइज शुरू कर चुके हैं। इसकी बानगी पिछले दिनों दिल्ली में उनकी बेटी दीया के जन्मदिन के मौके पर देखने को मिली। बेटी के जन्मदिन पर आयोजित पार्टी में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने विशेष तौर पर शिरकत की। इसके बाद से ही आप ने राजस्थान में तेजी से अपनी सक्रियता बढ़ाई है। दिल्ली के बाद पंजाब में मिली सफलता के बाद आप राजस्थान में भी अपने लिए राजनीतिक भूमि तलाश रही थी। बेनीवाल पिछले लंबे समय से भाजपा से दरकिनार है। उन्होंने सचिन पायलट को भी आगे आकर अलग पार्टी बनाने का प्रस्ताव दिया है।
क्या राजस्थान में प्रभावी साबित होगा थर्ड फ्रंट
राजस्थान में थर्ड फ्रंट दो तरह से प्रभावी हो सकता है। एक अलग-अलग तरीके से और दूसरा संगठित तरीके से। अलग-अलग पार्टियों के तौर पर देखें तो राजस्थान में इस बार आम आदमी पार्टी (आप), राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और एआईएमआईएम जैसी पार्टियां चुनाव लड़कर अलग-अलग क्षेत्र से सीटें जीतने की कोशिश करेंगी। वहीं अगर संगठित तौर पर देखा जाए तो आरएलपी, आप और बीटीपी जैसे पार्टियां साथ आ सकती हैं।
हालांकि बीटीपी का झुकाव कई बार कांग्रेस की ओर भी रहता है। मगर इस बार माना जा रहा है कि कई मसलों को लेकर बीटीपी पूरी तरह अलग रहेगी। अगर सचिन पायलट को लेकर जाहिर की जा रही संभावनाएं भी इसी दिशा में आगे बढ़ती हैं तो बेनीवाल के कहे अनुसार एक नया थर्ड फ्रंट देखने को मिल सकता है।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी
हनुमान बेनीवाल की आरएलपी लगातार राजस्थान में मजबूत हो रही है। आरएलपी ने 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन करके नागौर से हनुमान बेनीवाल सांसद भी बने। आरएलपी इसलिए भी प्रभावी है क्योंकि राजस्थान में हुए उपचुनावों में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। उपचुनाव के परिणाम देखें तो आरएलपी करीब-करीब भाजपा के बराबर ही खड़ी नजर आती है। राजस्थान में हुए 8 उपचुनावों में से 6 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। वहीं, 1 सीट भाजपा और 1 आरएलपी को मिली है।
आरएलपी ने खींवसर सीट अपने नाम की। इसके अलावा बाकी सीटों पर हुए चुनाव में भी आरएलपी ने जबरदस्त वोट हासिल करते हुए भाजपा या कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। सरदारशहर में हुए पिछले उपचुनाव में आरएलपी के प्रत्याशी को 46 हजार वोट मिले। जबकि जीत का अंतर 17 हजार के करीब रहा। इसी तरह वल्लभनगर में भी आरएलपी ने 45 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए। यहां पर वह दूसरे स्थान पर रही।
जबकि सुजानगढ़ में 32 हजार और सहाड़ा में 12 हजार वोट आरएलपी ने हासिल किए हैं। पार्टी राजस्थान में मुख्य रूप से जाट समाज को साधती है। इसी को देखते हुए आरएलपी की दावेदारी और भी ज्यादा मजबूत हो जाती है। 2018 में आरएलपी का वोट शेयर 2.40 प्रतिशत था। इस चुनाव में RLP 20 से 25 सीटों पर प्रभाव डाल सकती है। यही वजह है कि आरएलपी के साथ थर्ड फ्रंट के तौर पर आम आदमी पार्टी की संभावनाओं को देखा जा रहा है।
भारतीय ट्राइबल पार्टी
राजस्थान में बीटीपी भी एक अहम पार्टी बनकर उभरी है। पिछले चुनाव में बीटीपी ने 2 सीटें हासिल की थीं। जबकि बीटीपी का वोट शेयर 0.72 प्रतिशत रहा था। बीटीपी का दक्षिणी राजस्थान में प्रभाव है। इस चुनाव में दक्षिणी राजस्थान की 16 आदिवासी सीटों पर बीटीपी फोकस करेगी। इसमें उदयपुर और बांसवाड़ा की 5-5, डूंगरपुर की 4 और प्रतापगढ़ की 2 सीटें शामिल हैं।
गौरतलब है कि कई मसलों को लेकर बीटीपी का अशोक गहलोत सरकार से मतभेद देखने को मिला है। ऐसे में यह संभावना भी है अगर राजस्थान में कोई थर्ड फ्रंट खड़ा होता है तो बीटीपी भी उसका हिस्सा हो सकती है। आदिवासी राजस्थान में बड़ा वोट बैंक है। राजस्थान में 25 सीटें एसटी रिजर्व हैं। ऐसे में अगर बीटीपी कांग्रेस और बीजेपी से अलग होकर किसी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है तो इन सीटों को आकर्षित कर सकती है।
आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी की नजर अलग-अलग राज्यों पर है। आप पार्टी अब अधिकारिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है। गुजरात विधानसभा चुनावों में 12 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर हासिल करने के बाद आप की नजर अब राजस्थान पर है। पार्टी यह घोषणा कर चुकी है कि वह पूरी ताकत से राजस्थान में चुनाव लड़ेगी। ऐसे में अगर थर्ड फ्रंट का गठबंधन राजस्थान में होता है तो उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी उसमें अहम रोल अदा करेगी।
राजस्थान में पंजाब से सटे इलाके और ब्राह्मण-वैश्य प्रभाव वाली सीटों को आप टारगेट कर सकती है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मार्च में राजस्थान में बड़ी जनसभा की थी। पिछले दिनों हुनमान बेनीवाल के साथ उनकी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीरें सामने आने के बाद इसे भविष्य के नये गठबंधन के तौर पर देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी राजस्थान में लगातार बीजेपी और कांग्रेस के राज पर सवाल उठाते हुए अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगी। ऐसे में पार्टी का फोकस उन सीटों और उन प्रत्याशियों पर होगा जो निर्दलीय चुनाव जीतते हैं। इसके बूते आप पार्टी 10 से 15 सीटों पर फोकस करेगी।
बीएसपी और मजलिस भी मैदान में, पर गठबंधन मुश्किल
इसके अलावा राजस्थान में बीएसपी और एआईएमआईएम भी अगले चुनाव में जोर लगाएंगी। पिछले विधानसभा चुनावों में बीएसपी ने 6 सीटें हासिल की थी। मगर सभी विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। मगर इस बार बीएसपी राजस्थान में अलग ढंग से चुनाव लड़ सकती है। वहीं असदुद्दीन औवेसी की एआईएमआईएम भी अगले चुनाव में जोर लगाएंगी। औवेसी का राजस्थान में 40 से ज्यादा मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान है। ओवैसी ने हाल ही में राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए जयपुर, जोधपुर और सीमावर्ती बाड़मेर की यात्रा की है। माना जा रहा है कि बीएसपी और ओवैसी की पार्टी लगभग 10 सीटों पर सेंध लगा सकती है।
कम्युनिस्ट पार्टी
इसी बीच कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव और पूर्व विधायक अमराराम ने भी राजस्थान में थर्ड फ्रंट को लेकर संभावित गठबंधन को लेकर संकेत दिए हैं। कम्युनिस्ट पार्टी राजस्थान की 30 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी, आरएलपी, आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी जैसे दल शामिल हो सकते हैं। अमराराम का कहना है कि वह आरएलपी, बीटीपी, आम आदमी पार्टी, सपा और चंद्रशेखर रावण की पार्टी को साथ लाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। राजस्थान की जनता भाजपा और कांग्रेस से त्रस्त हो चुकी हैं। दोनों ने राजस्थान का विकास नहीं किया। लिहाजा ऐसे में तीसरा मोर्चा राजस्थान की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।
कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस
गौरतलब है कि राजस्थान में पिछले तीन दशकों से एक बार कांग्रेस एक बार भाजपा सत्ता में आती रही है। हालांकि इस दौरान कई बार तीसरा मोर्चा बना कर कांग्रेस और भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई भी पार्टी इसमें सफल नहीं हो पाई है।
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