जानलेवा हो सकती है ये जहरीली धुंध, बचाव के ये रहे उपाय
धुआं, गैस और रसायनिक कणों का मिश्रण होता है स्मॉग। इससे ना केवल सांस लेना मुश्किल हो जाता है बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत खतनाक है।
नई दिल्ली। दिवाली के बाद अचानक मौसम का मिजाज बदल सा गया है। ठंड तो थोड़ी है लेकिन सुबह और शाम को धुंध ज्यादा है। पर आप इस सोच के साथ न रहिएगा कि, यह फॉग है। क्योंकि यह फॉग नहीं बल्कि स्मॉग है। और आपको इससे सावधान रहने की जरूरत है।
आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि धुआं, गैस और रसायनिक कणों का मिश्रण होता है स्मॉग। इससे ना केवल सांस लेना मुश्किल हो जाता है बल्कि यह सेहत के लिए भी बहुत खतनाक है। किसी-किसी मामले में तो स्मॉग से जान भी जा सकती है। तो आईए आपको कुछ ऐसे जरुरी उपाय बताते हैं जिसे अपनाकर आप इस खतरे से बच सकते हैं।

सैर पर ना निकलें
अस्थमा के रोगियों को स्मॉग से बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे जिस जगह पर रहते हैं वहां की हवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी रखें। अगर आपके इलाके की हवा अधिक प्रदूषित है तो घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें और अगर बाहर जाना जरूरी है तो पूरी सतर्कता का पालन करें। आम लोग भी इन नियमों का पालन करेंगे तो ये उन्हें सांस और फेफड़े संबंधी बीमारियों से बचाए रखेगा।

एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें
ठंड के मौसम में अस्थमा के रोगियों के लिए घर के बाहर की ही नहीं बल्कि घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं है। अगर संभव हो तो घर के भीतर एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें। जब भी खिड़की या दरवाजे खोलें पहले बाहर की हवा की गुणवत्ता जांच लें। अगर जरूरी न हो तो दरवाजे और खिड़की बंद रखें।

एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल ना करें
ठंड के मौसम में अस्थमा के रोगियों के लिए घर के बाहर की ही नहीं बल्कि घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं है। अगर संभव हो तो घर में एयर फ्रेंशनर का इस्तेमाल करने से बचें।

पार्क में जाकर व्यायाम करने से बचें
ठंड के मौसम में अस्थमा के रोगियों के लिए घर के बाहर की ही नहीं बल्कि घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं है। अगर संभव हो तो पार्क में जाकर व्यायाम करने से बचें।

जरूरत हो तो ही बाहर निकलें
जरुरत हो तो ही बाहर निकलें। जितना हो सकता है उतनी कोशिश करें की घर पर ही रहें। अगर घर से बाहर जा रहे हैं तो बिना मॉस्क के न जायें। जो लोग अस्थमा से पीडि़त हैं उनके लिए यह मौसम अधिक खतरनाक होता है।

हवा का आना-जाना संतुलित बना रहे
जिस समय आप ड्राइव कर रहे हों या फिर गाड़ी में बैठे हों, यह जरूर सुनिश्चित करें कि हवा का आना-जाना संतुलित बना रहे। केबिन में CO का लेवल बढ़ जाने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।












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